अल्मोड़ा। सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों के निजीकरण पर रोक लगाने समेत 15 सूत्री मांगों को लेकर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।
वक्ताओं ने सरकार से स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं के निजीकरण के प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारियों के अनुसार योजना श्रमिकों को 21 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने, दस हजार रुपये पेंशन, ईएसआई, पीएफ का लाभ देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि भोजन के अधिकार, शिक्षा के अधिकार की तरह सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा अधिकार के लिए भी कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि टैक्स के दायरे से बाहर के सभी परिवारों को 7500 रुपये प्रतिमाह देने, जरूरतमंदों के लिए मुफ्त राशन, भोजन की व्यवस्था करने के साथ ही नौकरी सुनिश्चित की जाए। कोविड ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए सदस्यों को न्यूनतम दस लाख रुपये मुआवजा देने, सभी फ्रंटलाइन श्रमिकों को 50 लाख रुपये का बीमा कवर मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री से सभी 15 सूत्री मांगों के समाधान की मांग उठाई। इनमें आशा कार्यकर्ता नीमा जोशी, चंपा पांडे, विजय लक्ष्मी, ममता भट्ट, भगवती आर्या, देवकी बिष्ट, प्रेमा देवी, नरगिस, आनंदी गुप्ता आदि थे।