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कला हमारी संस्कृति, योग विज्ञान में शामिल : कुलपति
Fri, 28 Nov 2025 11:26 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 28 Nov 2025 11:26 PM IST
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फोटो- 28एएलएम17पी- एसएसजे परिसर में आयोजित सेमिनार में मौजूद प्राध्यापक और विद्यार्थी। स्रोत-
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। एसएसजे परिसर के दृश्यकला संकाय में डब्ल्यूएवाईएसएसी और विवि के प्रयासों से उत्तराखंड स्कूल ऑफ आर्ट के तहत प्री-सेमिनार और हाइब्रिड वर्कशॉप आयोजित हुई।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोककलाओं का संरक्षण कर इन कलाओं को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाना था। दृश्यकला संकायाध्यक्ष प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने कहा कि कला के विविध रूपों और पारंपरिक तकनीकों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। इससे उत्तराखंड की संस्कृति का संरक्षण हो सके।
विवि के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने सेमिनार में ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर इस पहल की सराहना की।
उन्होंने कहा कि कला हमारी संस्कृति, विज्ञान और योग में शामिल है। कुमाऊं और गढ़वाल की लोककलाओं का संरक्षण और इन कलाओं पर शोध कार्य होना अति आवश्यक है।
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अल्मोड़ा। एसएसजे परिसर के दृश्यकला संकाय में डब्ल्यूएवाईएसएसी और विवि के प्रयासों से उत्तराखंड स्कूल ऑफ आर्ट के तहत प्री-सेमिनार और हाइब्रिड वर्कशॉप आयोजित हुई।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोककलाओं का संरक्षण कर इन कलाओं को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाना था। दृश्यकला संकायाध्यक्ष प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने कहा कि कला के विविध रूपों और पारंपरिक तकनीकों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। इससे उत्तराखंड की संस्कृति का संरक्षण हो सके।
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विवि के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने सेमिनार में ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर इस पहल की सराहना की।
उन्होंने कहा कि कला हमारी संस्कृति, विज्ञान और योग में शामिल है। कुमाऊं और गढ़वाल की लोककलाओं का संरक्षण और इन कलाओं पर शोध कार्य होना अति आवश्यक है।

फोटो- 28एएलएम17पी- एसएसजे परिसर में आयोजित सेमिनार में मौजूद प्राध्यापक और विद्यार्थी। स्रोत-
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