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पहाड़ के अस्पताल का एक और नमूना, न बिजली, न पानी
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा
Updated Wed, 17 Aug 2016 11:26 PM IST
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एलोपैथिक अस्पताल भैसडग़ांव की छत में भरा बरसाती पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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राजकीय ऐलोपैथिक अस्पताल भैसड़गांव का भवन लंबे समय से बदहाल हुआ है। छत से पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से भवन की दीवारें सीलन से पटी हैं। जिससे चलते भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है, लेकिन विभाग इसके स्थान पर नया भवन नहीं बना रहा है। जिससे खतरा बना हुआ है। कर्मचारी आवास भी जीर्ण-शीर्ण बने हुए हैं। पानी और बिजली की व्यवस्था भी नहीं है।
चालीस लाख रुपये की लागत से 1996 में राजकीय एलोपैथिक अस्पताल भैसड़गांव का भवन बनाया गया। लोगों को आशा थी कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन बीस साल में ही अस्पताल का भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है। अस्पताल भवन की छत से पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। बरसाती पानी लेंटर की छत में जमा हो जाता है। इससे पूरे भवन में सीलन आ गई है।
अस्पताल में एक तदर्थ डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा फार्मेसिस्ट, वार्डब्वाय के अलावा दो एएनएम भी नियुक्त हैं। अस्पताल में पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल के पास बने स्टाफ क्वार्टर भी जीर्ण-क्षीर्ण हो गए हैं। उसमें कर्मचारी नहीं रहते हैं और बंद पड़े हैं। रात में अस्पताल परिसर शराबियों का अड्डा बन जाता है, लेकिन प्रशासन और विभाग का ध्यान इस ओर नहीं है। संसाधन नहीं होने से अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। अस्पताल के डाक्टर सुरेश चंद्र पाठक का कहना है कि इस संबंध में एडीएम को भी अवगत कराया गया था। दो साल पहले तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने अस्पताल का निरीक्षण किया, लेकिन अब तक अस्पताल भवन दुरुस्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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चालीस लाख रुपये की लागत से 1996 में राजकीय एलोपैथिक अस्पताल भैसड़गांव का भवन बनाया गया। लोगों को आशा थी कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन बीस साल में ही अस्पताल का भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है। अस्पताल भवन की छत से पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। बरसाती पानी लेंटर की छत में जमा हो जाता है। इससे पूरे भवन में सीलन आ गई है।
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अस्पताल में एक तदर्थ डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा फार्मेसिस्ट, वार्डब्वाय के अलावा दो एएनएम भी नियुक्त हैं। अस्पताल में पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल के पास बने स्टाफ क्वार्टर भी जीर्ण-क्षीर्ण हो गए हैं। उसमें कर्मचारी नहीं रहते हैं और बंद पड़े हैं। रात में अस्पताल परिसर शराबियों का अड्डा बन जाता है, लेकिन प्रशासन और विभाग का ध्यान इस ओर नहीं है। संसाधन नहीं होने से अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। अस्पताल के डाक्टर सुरेश चंद्र पाठक का कहना है कि इस संबंध में एडीएम को भी अवगत कराया गया था। दो साल पहले तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने अस्पताल का निरीक्षण किया, लेकिन अब तक अस्पताल भवन दुरुस्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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