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कृत्रिम गर्भाधान के तहत पशुओं को लगने वाले सीमेन निष्प्रभावी
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धौलछीना(अल्मोड़ा)। कृत्रिम गर्भाधान में पशुओं को लगने वाले सीमेन निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं, जिससे पशुओं में बांझपन बढ़ रहा है। विकासखंड के कई पशुपालकों ने बताया कि उन्होंने अपने दुधारू जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान करवाया, कई बार कृत्रिम गर्भाधान करवाने के बाद भी मवेशी गाभिन नहीं हो रहे हैं। परेशान पशुपालक चिकित्सकों के यहां चक्कर लगाने के साथ-साथ देहाती उपाय का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
विकासखंड भैंसियाछाना के दर्जनों पशुपालकों के पशुधन पर संकट मंडरा रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि कृत्रिम गर्भाधान करवाने के बाद भी लगभग 90 प्रतिशत मवेशी गाभिन नहीं हो रहे हैं। पैरावेट कृष्णा रावल ने बताया कि पहले जब सामान्य सीमेन आते थे तो वह लगभग 60 से 70 प्रतिशत सफल रहते थे। जब से सेक्स शॉर्टेड सीमेन (गोवंश पशुओं में वर्गीकृत वीर्य का इस्तेमाल) आने लगे हैं तब से सीमेन की सफलता का प्रतिशत काफी कम हो गया है।
बबुरिया नायल के ग्राम प्रधान महेश बोरा ने बताया कि उन्होंने अपनी भैंस को धौलछीना, काफलीगैर, बसोली, कफडखान आदि अलग-अलग पशु चिकित्सालयों से करीब 10 बार सीमेन लगवाया लेकिन सफलता नहीं मिली। बताया कि यह समस्या केवल उनकी नहीं बल्कि गांव के अन्य पशुपालकों की भी है।
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हटोला के आनंद सिंह, मोहन सिंह, खुड़ियारी के गोकुल सिंह, भैंसियाछाना के कमल पांडे, गैनार के चंद्र सिंह, नाली के राजेंद्र दुर्गापाल, जमराडी के सोबन सिंह, बूंगा के ललित जड़ोत समेत विकासखंड के दर्जनों पशुपालक अपने दुधारू जानवरों का कई बार कृत्रिम गर्भाधान करवा चुके हैं लेकिन हर बार सीमेन निष्प्रभावी साबित हो रहा है। जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान के साथ ही पशुधन का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की गई है।
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विकासखंड भैंसियाछाना के दर्जनों पशुपालकों के पशुधन पर संकट मंडरा रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि कृत्रिम गर्भाधान करवाने के बाद भी लगभग 90 प्रतिशत मवेशी गाभिन नहीं हो रहे हैं। पैरावेट कृष्णा रावल ने बताया कि पहले जब सामान्य सीमेन आते थे तो वह लगभग 60 से 70 प्रतिशत सफल रहते थे। जब से सेक्स शॉर्टेड सीमेन (गोवंश पशुओं में वर्गीकृत वीर्य का इस्तेमाल) आने लगे हैं तब से सीमेन की सफलता का प्रतिशत काफी कम हो गया है।
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बबुरिया नायल के ग्राम प्रधान महेश बोरा ने बताया कि उन्होंने अपनी भैंस को धौलछीना, काफलीगैर, बसोली, कफडखान आदि अलग-अलग पशु चिकित्सालयों से करीब 10 बार सीमेन लगवाया लेकिन सफलता नहीं मिली। बताया कि यह समस्या केवल उनकी नहीं बल्कि गांव के अन्य पशुपालकों की भी है।
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हटोला के आनंद सिंह, मोहन सिंह, खुड़ियारी के गोकुल सिंह, भैंसियाछाना के कमल पांडे, गैनार के चंद्र सिंह, नाली के राजेंद्र दुर्गापाल, जमराडी के सोबन सिंह, बूंगा के ललित जड़ोत समेत विकासखंड के दर्जनों पशुपालक अपने दुधारू जानवरों का कई बार कृत्रिम गर्भाधान करवा चुके हैं लेकिन हर बार सीमेन निष्प्रभावी साबित हो रहा है। जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान के साथ ही पशुधन का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की गई है।