{"_id":"69cd5efc66a8e45a520ba2f8","slug":"almoras-soil-is-suitable-for-gucchi-mushroom-almora-news-c-232-1-alm1002-141601-2026-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: गुच्छी मशरूम को रास आई अल्मोड़ा की मिट्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: गुच्छी मशरूम को रास आई अल्मोड़ा की मिट्टी
Wed, 01 Apr 2026 11:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 01 Apr 2026 11:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ गुच्छी मशरूम (मोरल मशरूम) को अल्मोड़ा की मिट्टी रास आ रही है। अल्माेड़ा में इस जंगली मशरूम का सफल उत्पादन होना मशरूम उत्पादकों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। यह मशरूम अपनी सौंधी महक और औषधीय गुणों के कारण दुनिया के सबसे महंगे मशरूमों में शुमार हैं।
कुमाऊं में पहली बार अल्माेड़ा जिले में इस दुर्लभ मशरूम का उत्पादन हुआ है। यह क्षेत्र के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं। यह मशरूम जिले को मशरूम हब के रूप में नई पहचान दिलाएगा। अब तक इस मशरूम का उत्पादन चीन सहित कुछ विकसित देशों तक सीमित था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुच्छी मशरूम की प्रति किलो कीमत 35 से 40 हजार रुपये तक है। अब तक यह बहुमूल्य मशरूम केवल उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उगता था। बाबा एग्रोटेक के कमल, नमिता, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मेर, नवीन वर्मा, सेना से सेवानिवृत्त चंद्रराम, उनकी पत्नी हरूली देवी की टीम ने लंबे शोध और नए प्रयोगों ने इस जंगली मशरूम को उगाने में सफलता हासिल की।
इस तरह तैयार हुई फसल
मशरूम गर्ल के नाम से प्रसिद्ध नमीता ने बताया कि एक वर्ष तक लगातार हुुए शोध और अलग-अलग तरह की मिट्टी और विशेष पोषक तत्वों वाले सब्सट्रेट के उपयोग के बाद आखिरकार टीम को यह सफलता मिली। इस शोध के दौरान मौसम में अचानक बदलाव, अत्यधिक ठंड, बारिश, वन्यजीवों के फसल को नुकसान जैसी कई चुनौतियां सामने आईं लेकिन टीम ने सभी बाधाओं को दर किनारे करते हुए गुच्छी जंगली मशरूम को उगाने में सफलता हासिल की।
विज्ञापन
खास मौके पर परोसा जाता यह मशरूम
गुच्छी मशरूम अपनी विशिष्ट बनावट, स्वाद और पोषण गुणों के कारण महंगे होटलों, लक्जरी रेस्टोरेंट और हाई प्रोफाइल आयोजनों में विशेष व्यंजन के रूप में उपयोग किया जाता है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में इसे एक प्रीमियम और स्टेटस फूड के रूप में देखा जाता है।
विज्ञापन
कुमाऊं में पहली बार अल्माेड़ा जिले में इस दुर्लभ मशरूम का उत्पादन हुआ है। यह क्षेत्र के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं। यह मशरूम जिले को मशरूम हब के रूप में नई पहचान दिलाएगा। अब तक इस मशरूम का उत्पादन चीन सहित कुछ विकसित देशों तक सीमित था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुच्छी मशरूम की प्रति किलो कीमत 35 से 40 हजार रुपये तक है। अब तक यह बहुमूल्य मशरूम केवल उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उगता था। बाबा एग्रोटेक के कमल, नमिता, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मेर, नवीन वर्मा, सेना से सेवानिवृत्त चंद्रराम, उनकी पत्नी हरूली देवी की टीम ने लंबे शोध और नए प्रयोगों ने इस जंगली मशरूम को उगाने में सफलता हासिल की।
विज्ञापन
इस तरह तैयार हुई फसल
मशरूम गर्ल के नाम से प्रसिद्ध नमीता ने बताया कि एक वर्ष तक लगातार हुुए शोध और अलग-अलग तरह की मिट्टी और विशेष पोषक तत्वों वाले सब्सट्रेट के उपयोग के बाद आखिरकार टीम को यह सफलता मिली। इस शोध के दौरान मौसम में अचानक बदलाव, अत्यधिक ठंड, बारिश, वन्यजीवों के फसल को नुकसान जैसी कई चुनौतियां सामने आईं लेकिन टीम ने सभी बाधाओं को दर किनारे करते हुए गुच्छी जंगली मशरूम को उगाने में सफलता हासिल की।
विज्ञापन
खास मौके पर परोसा जाता यह मशरूम
गुच्छी मशरूम अपनी विशिष्ट बनावट, स्वाद और पोषण गुणों के कारण महंगे होटलों, लक्जरी रेस्टोरेंट और हाई प्रोफाइल आयोजनों में विशेष व्यंजन के रूप में उपयोग किया जाता है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में इसे एक प्रीमियम और स्टेटस फूड के रूप में देखा जाता है।