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Bus Accident: मुझे मम्मी के पास जाना है...हादसे में चार साल की शिवानी ने खो दिए मां-बाप, रोती-बिलखती रही मासूम
Tue, 05 Nov 2024 09:28 AM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
Published by: हीरा मेहरा
Updated Tue, 05 Nov 2024 09:28 AM IST
सार
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में एक बस 150 फुट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 36 यात्रियों की मौत हो गई जबकि 27 लोग घायल हैं। इस हादसे में एक एक चार साल की मासूम ने अपने मां-बाप को खोया है। मासूम के बिलखने की आवाज सुनकर सभी भावुक हो गए।
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अल्मोड़ा बस हादसे में चार साल की बच्ची ने खोए अपने मां-बाप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अस्पताल में भर्ती चार साल की मासूम के बिलखने और बार-बार मम्मी-मम्मी पुकारने की आवाज हॉस्पिटल कर्मियों को भावुक कर रही थी। किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि उस मासूम को कैसे बताएं कि जिन्हें वह बुला रही है वह कभी लौटकर नहीं आएंगे। मरचूला हादसे ने उसके सिर से मां-पिता साया छीन लिया है। बच्ची की देखरेख के लिए उसके नाना हरिकृष्ण नेगी, नानी सुशीला देवी अस्पताल पहुंच गए हैं। दोनों अपने बेटी-दामाद को खोने का गम छुपाए अपनी नवासी की तीमारदारी में लगे हैं।
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नानी बार-बार आंचल से अपने आंसू पोछती दिखी। शाम करीब साढ़े तीन बजे बच्ची को रामनगर अस्पताल से एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया है। शिवानी के पिता मनोज रावत रामनगर में उद्यान विभाग के अंतर्गत फल संरक्षण में ट्रेनिंग सुपरवाइजर पद पर कार्यरत थे और मां चारू रावत गृहिणी थीं।
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रावत दंपती रामनगर में ईदगाह रोड पर आस्थान के फ्लैट में अपनी बेटी शिवानी के साथ किराये पर रहते थे। बच्ची अस्पताल में बार-बार अपनी मां को पूछ रही थी। अस्पताल कर्मी किसी तरह उसे दिलासा दे रहे थे।
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दिवाली पर आए थे घर
बच्ची के नाना ने बताया कि सभी लोग गांव में दिवाली मनाने आए थे। त्योहार के बाद सभी रामनगर जा रहे थे। मेरे दामाद के पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी, गांव में उनकी मां मालती देवी हैं। त्योहार के बाद बेटी और दामाद कभी घर नहीं लौटेंगे, ऐसा सोचा नहीं था। अब शिवानी की जिम्मेदारी भी अब उनके कंधों पर है।