{"_id":"60217ced8ebc3e26ca691920","slug":"a-four-member-team-from-almora-will-find-out-the-cause-of-chamoli-disaster-almora-news-hld414076338","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्मोड़ा से चार सदस्यीय टीम करेगी चमोली आपदा के कारणों का पता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्मोड़ा से चार सदस्यीय टीम करेगी चमोली आपदा के कारणों का पता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा (नरेंद्र देव सिंह)। चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा का सही कारण जानने के लिए जीबी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन इनवायरमेंट अल्मोड़ा की टीम चमोली मंगलवार को रवाना होगी। इस टीम में वैज्ञानिक और इंजीनियर होंगे। टीम आपदा का सही कारण जानने के लिए वहां रुककर शोध करेगी और बाद में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
जीबी पंत इंस्टीट्यूट में हिमालय में पर्यावरण में होने वाले बदलावों को लेकर लगातार शोध होते रहते हैं। केदारनाथ में आई आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर संस्थान की ओर से विशेष तौर पर नजर रखी जाती है। चमोली में आपदा आने के बाद पूरे विश्व की नजर इस ओर है। कोई इस आपदा का मूल कारण हिमालय क्षेत्र में बन रहे बांध को बता रहा है तो कोई जलवायु परिवर्तन को बता रहा है। इंस्टीट्यूट की ओर से बताया गया कि आपदा का सही कारण पता लगाने के लिए चार लोगों की टीम का गठन किया गया है। जिसका नेेतृत्व इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल करेंगे। उनके साथ टीम में वैज्ञानिक डॉ. सुमित राय, डॉ. कपिल केसरवानी और इंजीनियर वैभव होंगे। बताया कि टीम मंगलवार को चमोली के लिए रवाना हो जाएगी और शोध के लिए वहीं रुकेगी। व्यापक शोध करने के बाद आपदा के सही कारणों और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों को बाद में पेश किया जाएगा। (संवाद)
सही कारण जाने बिना कुछ भी कहना मुश्किल : डॉ. रावल
अल्मोड़ा। जीबी पंत इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने बताया कि आम व्यक्ति आपदा को लेकर कोई भी आकलन कर सकता है लेकिन एक वैज्ञानिक जब तक कोई प्रमाणित डेटा न हो तब तक कोई भी राय जाहिर नहीं करेगा। कहा कि संस्थान की टीम आपदा के क्षेत्र में जाएगी और वहां पूरी मेहनत के साथ डेटा इकट्ठा करेगी। जल्द ही आपदा के सही कारणों का पता लगा लिया जाएगा। हम सभी जानकारियों पर नजर बनाए हुए हैं। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
जीबी पंत इंस्टीट्यूट में हिमालय में पर्यावरण में होने वाले बदलावों को लेकर लगातार शोध होते रहते हैं। केदारनाथ में आई आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर संस्थान की ओर से विशेष तौर पर नजर रखी जाती है। चमोली में आपदा आने के बाद पूरे विश्व की नजर इस ओर है। कोई इस आपदा का मूल कारण हिमालय क्षेत्र में बन रहे बांध को बता रहा है तो कोई जलवायु परिवर्तन को बता रहा है। इंस्टीट्यूट की ओर से बताया गया कि आपदा का सही कारण पता लगाने के लिए चार लोगों की टीम का गठन किया गया है। जिसका नेेतृत्व इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल करेंगे। उनके साथ टीम में वैज्ञानिक डॉ. सुमित राय, डॉ. कपिल केसरवानी और इंजीनियर वैभव होंगे। बताया कि टीम मंगलवार को चमोली के लिए रवाना हो जाएगी और शोध के लिए वहीं रुकेगी। व्यापक शोध करने के बाद आपदा के सही कारणों और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों को बाद में पेश किया जाएगा। (संवाद)
विज्ञापन
सही कारण जाने बिना कुछ भी कहना मुश्किल : डॉ. रावल
अल्मोड़ा। जीबी पंत इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने बताया कि आम व्यक्ति आपदा को लेकर कोई भी आकलन कर सकता है लेकिन एक वैज्ञानिक जब तक कोई प्रमाणित डेटा न हो तब तक कोई भी राय जाहिर नहीं करेगा। कहा कि संस्थान की टीम आपदा के क्षेत्र में जाएगी और वहां पूरी मेहनत के साथ डेटा इकट्ठा करेगी। जल्द ही आपदा के सही कारणों का पता लगा लिया जाएगा। हम सभी जानकारियों पर नजर बनाए हुए हैं। (संवाद)
विज्ञापन