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हरियाणा से आए थे व्यवसाय को पहाड़ के हो गए
Almora
Updated Sat, 06 Dec 2014 05:30 AM IST
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चौखुटिया(अल्मोड़ा)। रमेश चंद्र अग्रवाल के पिता स्व. परमानंद अग्रवाल 1957 में हरियाणा के जिला महेंद्रगढ से चौखुटिया में व्यवसाय करने आए थे। और उनका परिवार यहीं का गया। परिवार के सभी सदस्य कुमाऊंनी बोलते और समझते हैं।
चौखुटिया के चांदीखेत बाजार में आटा चक्की, तेल की मशीन के साथ ही जनरल स्टोर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल बताते हैं कि उनके पिता स्व. परमानंद अग्रवाल 1957 में चौखुटिया आए थे। उन्होंने राशन की दुकान से व्यवसाय की शुरुआत की बाद में तेल की मशीन लगाई, बिस्कुट आदि की एजेंसी और बाद में कुछ समय ट्रांसपोर्ट संबंधी कार्य भी किया।
बताते हैं कि उस दौर में सड़कें नहीं थी। रामनगर से घोड़ों में सामान आता था और घोड़ों में ही दूरस्थ क्षेत्रों को भेजा जाता था। अग्रवाल बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा इसी ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय नागाड़ और हाईस्कूल तक की शिक्षा जीआईसी चौखुटिया में हुई। बाद में उन्होंने रामनगर के एमपी इंटर कालेज से इंटर किया। और स्नातक की डिग्री लखनऊ से ली।
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रमेश चंद्र अग्रवाल के तीन बेटे हैं दो बाहर रहते हैं जबकि बड़ा बेटा राजेश उन्हीं के साथ व्यवसाय करता है। अग्रवाल की पत्नी व उनके सभी बेटे कुमाऊंनी बोलते और समझते हैं। अलबत्ता शादियां बाहर शहरों में होने से बहुओं को कुमाऊंनी बोलने में थोड़ा दिक्कत होती है। अग्रवाल बताते हैं कि परिवार के सभी सदस्य कुमाऊंनी व्यंजनों को खासा पसंद करते हैं। उनका कहना है कि वह पूरी तरह से कुमाऊंनी रंग में रंग चुके हैं। समय की कमी के चलते पुश्तैनी गांव जाना भी नहीं हो पाता है।
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चौखुटिया के चांदीखेत बाजार में आटा चक्की, तेल की मशीन के साथ ही जनरल स्टोर के मालिक रमेश चंद्र अग्रवाल बताते हैं कि उनके पिता स्व. परमानंद अग्रवाल 1957 में चौखुटिया आए थे। उन्होंने राशन की दुकान से व्यवसाय की शुरुआत की बाद में तेल की मशीन लगाई, बिस्कुट आदि की एजेंसी और बाद में कुछ समय ट्रांसपोर्ट संबंधी कार्य भी किया।
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बताते हैं कि उस दौर में सड़कें नहीं थी। रामनगर से घोड़ों में सामान आता था और घोड़ों में ही दूरस्थ क्षेत्रों को भेजा जाता था। अग्रवाल बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा इसी ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय नागाड़ और हाईस्कूल तक की शिक्षा जीआईसी चौखुटिया में हुई। बाद में उन्होंने रामनगर के एमपी इंटर कालेज से इंटर किया। और स्नातक की डिग्री लखनऊ से ली।
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रमेश चंद्र अग्रवाल के तीन बेटे हैं दो बाहर रहते हैं जबकि बड़ा बेटा राजेश उन्हीं के साथ व्यवसाय करता है। अग्रवाल की पत्नी व उनके सभी बेटे कुमाऊंनी बोलते और समझते हैं। अलबत्ता शादियां बाहर शहरों में होने से बहुओं को कुमाऊंनी बोलने में थोड़ा दिक्कत होती है। अग्रवाल बताते हैं कि परिवार के सभी सदस्य कुमाऊंनी व्यंजनों को खासा पसंद करते हैं। उनका कहना है कि वह पूरी तरह से कुमाऊंनी रंग में रंग चुके हैं। समय की कमी के चलते पुश्तैनी गांव जाना भी नहीं हो पाता है।