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पिरुल से बिजली बनाएं, आय अर्जित करें
Updated Sun, 10 Jun 2018 12:19 AM IST
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पिरूल हटाते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) द्वारा पिरुल से बिजली बनाने की परियोजना पर कवायद शुरू कर दी गई है। परियोजना के तहत 10 किलोवाट से 250 किलोवाट की इकाई स्थापित करने वाली संस्था को बिजली उत्पादन कर विद्युत विभाग को विक्रय करना होगा। इस योजना के धरातल पर उतरने से पिरुल का बिजली उत्पादन में उपयोग होने के साथ ही जंगलों को भी आग से बचाया जा सकेगा।
पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में पिरुल बहुतायत में होता है। जंगलों में आग लगने का भी यह प्रमुख कारक है। सरकार ने पिरुल और अन्य प्रकार के जैविक ईंधनों से विद्युत उत्पादन हेतु नीति-2018 घोषित की है। जिसके लिए वन विभाग और उरेडा को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। नीति के अनुसार 10 किलोवाट से 250 किलोवाट तक पिरुल आधारित विद्युत उत्पादन परियोजना लगाई जानी है।
योजना के क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय नियोजन एवं अनुश्रवण समिति गठित की गई है। जिला स्तर पर चीड़ के जंगलों से प्राप्त होने वाले पिरुल, स्थापित होने वाली इकाईयों की क्षमता और संख्या के निर्धारण के लिए मानचित्र तैयार किए जाएंगे। इसके उपरांत उरेडा द्वारा पात्र संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे।
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पिरुल का उपयोग होने से जंगल भी बचेंगे आग से
उरेडा ने परियोजना पर काम शुरू किया
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पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में पिरुल बहुतायत में होता है। जंगलों में आग लगने का भी यह प्रमुख कारक है। सरकार ने पिरुल और अन्य प्रकार के जैविक ईंधनों से विद्युत उत्पादन हेतु नीति-2018 घोषित की है। जिसके लिए वन विभाग और उरेडा को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। नीति के अनुसार 10 किलोवाट से 250 किलोवाट तक पिरुल आधारित विद्युत उत्पादन परियोजना लगाई जानी है।
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योजना के क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय नियोजन एवं अनुश्रवण समिति गठित की गई है। जिला स्तर पर चीड़ के जंगलों से प्राप्त होने वाले पिरुल, स्थापित होने वाली इकाईयों की क्षमता और संख्या के निर्धारण के लिए मानचित्र तैयार किए जाएंगे। इसके उपरांत उरेडा द्वारा पात्र संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे।
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पिरुल का उपयोग होने से जंगल भी बचेंगे आग से
उरेडा ने परियोजना पर काम शुरू किया