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बगैर फिजिशियन के चल रहा बेस अस्पताल
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अल्मोड़ा। नगर के बेस अस्पताल में पिछले चार माह से फिजिशियन नहीं है। पूर्व में तैनात फिजिशियन के त्यागपत्र के बाद अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल आना पड़ रहा है या फिर हल्द्वानी जाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन को भी मरीजों के डायलिसिस के लिए हफ्ते में दो दिन बेस अस्पताल जाना पड़ रहा है जिसके चलते जिला अस्पताल में भी समस्या खड़ी हो रही है।
जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति इस कदर खराब है कि तीन बड़े अस्पतालों में सिर्फ रानीखेत स्थित नागरिक चिकित्सालय और जिला अस्पताल में ही फिजिशियन तैनात है।
बेस अस्पताल पिछले चार माह से बगैर फिजिशियन के चल रहा है। हर रोज करीब तीन सौ से अधिक की ओपीडी वाले बेस अस्पताल में फिजिशियन नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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दूसरी ओर जिला अस्पताल में भी मरीजों को हफ्ते में चार दिन ही फिजिशयन उपलब्ध हो पा रहे हैं। दरअसल बेस अस्पताल में शुरू हुई डायलिसिस प्रक्रिया के लिए ट्रेनिंग कर आए डॉ. पीएस टाकुली को मरीजों को डायलिसिस उपचार के लिए दो दिन बेस जाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में जिला अस्पताल में भी दो दिन फिजिशियन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
इधर बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचसी गड़कोटी ने बताया कि अस्पताल में चार माह से फिजिशयन नहीं है। माह के अंत में खाली पदों को लेकर निदेशालय को रिपोर्ट भी भेजी जाती है।
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जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति इस कदर खराब है कि तीन बड़े अस्पतालों में सिर्फ रानीखेत स्थित नागरिक चिकित्सालय और जिला अस्पताल में ही फिजिशियन तैनात है।
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बेस अस्पताल पिछले चार माह से बगैर फिजिशियन के चल रहा है। हर रोज करीब तीन सौ से अधिक की ओपीडी वाले बेस अस्पताल में फिजिशियन नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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दूसरी ओर जिला अस्पताल में भी मरीजों को हफ्ते में चार दिन ही फिजिशयन उपलब्ध हो पा रहे हैं। दरअसल बेस अस्पताल में शुरू हुई डायलिसिस प्रक्रिया के लिए ट्रेनिंग कर आए डॉ. पीएस टाकुली को मरीजों को डायलिसिस उपचार के लिए दो दिन बेस जाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में जिला अस्पताल में भी दो दिन फिजिशियन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
इधर बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचसी गड़कोटी ने बताया कि अस्पताल में चार माह से फिजिशयन नहीं है। माह के अंत में खाली पदों को लेकर निदेशालय को रिपोर्ट भी भेजी जाती है।