{"_id":"5bcf66f7bdec2269c41f448a","slug":"41540318967-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोलह सालों में भी नहीं बिछ सकी सीवर लाइन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोलह सालों में भी नहीं बिछ सकी सीवर लाइन
Updated Tue, 23 Oct 2018 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। सीवर लाइन शहर की प्रमुख समस्या है पर 16 साल में भी अल्मोड़ा नगर में सीवर लाइन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। मात्र एक चौथाई हिस्से में ही सीवर लाइन डाली जा सकी है। पिछले तेरह साल से शेष बचे हिस्से में सीवर लाइन बिछाने के लिए बजट नहीं मिला है। सीवर लाइन इस चुनाव में भी प्रमुख मुद्दा रहेगा।
पालिका क्षेत्र में करीब एक लाख आबादी निवास करती है। 16 साल पहले नगर में सीवर लाइन को मंजूरी मिली। शहर को चार जोन में बांटकर सीवर लाइन डालने की योजना बनाई गई।
2002 में उप्र की निर्माण एजेंसी सीएनडीएस ने करीब 6.10 करोड़ रुपये की लागत से जोन प्रथम के अंतर्गत राजपुर, मकेड़ी, हीरा डुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर, बीटीसी हॉस्टल में सीवर लाइन डाल दी और इससे कनेक्शन भी दे दिए गए। प्रथम जोन का कार्य पूरा होने के बाद 2005 में जल निगम सर्वे शाखा ने 8.10 करोड़ की लागत से द्वितीय चरण में तीसरे जोन का कार्य प्रारंभ किया।
विज्ञापन
शासन से 4.86 करोड़ रुपये अवमुक्त होने के बाद विभाग ने तृतीय जोन में पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, साईं बाबा मंदिर, झिझाड़, गुरुरानी खोला, चंपानौला, खोल्टा मुहल्ले में लाइन तो बिछा दी, लेकिन 2007 से शेष 3.24 करोड़ का बजट विभाग को नहीं मिला।
इस कारण तीसरे जोन के थपलिया, जोशीखोला आदि मोहल्लों में लाइन डालने, रोडवेज के पास पंप हाउस और पांडेखोला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का काम अधर में है। बजट के अभाव में द्वितीय और चतुर्थ जोन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। सीवर लाइन के अभाव में शहर में कई स्थानों पर गंदगी फैली रहती है। लोग घरों की गंदगी नालियों में बहा देते हैं। राज्य बनने के बाद हुए पिछले निकाय चुनावों में सीवर लाइन मुद्दा बना था, लेकिन सीवर लाइन का काम पूरा नहीं हो सका है। इस चुनाव में भी सीवर लाइन मुख्य मुद्दा रहेगा।
विज्ञापन
पालिका क्षेत्र में करीब एक लाख आबादी निवास करती है। 16 साल पहले नगर में सीवर लाइन को मंजूरी मिली। शहर को चार जोन में बांटकर सीवर लाइन डालने की योजना बनाई गई।
विज्ञापन
2002 में उप्र की निर्माण एजेंसी सीएनडीएस ने करीब 6.10 करोड़ रुपये की लागत से जोन प्रथम के अंतर्गत राजपुर, मकेड़ी, हीरा डुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर, बीटीसी हॉस्टल में सीवर लाइन डाल दी और इससे कनेक्शन भी दे दिए गए। प्रथम जोन का कार्य पूरा होने के बाद 2005 में जल निगम सर्वे शाखा ने 8.10 करोड़ की लागत से द्वितीय चरण में तीसरे जोन का कार्य प्रारंभ किया।
विज्ञापन
शासन से 4.86 करोड़ रुपये अवमुक्त होने के बाद विभाग ने तृतीय जोन में पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, साईं बाबा मंदिर, झिझाड़, गुरुरानी खोला, चंपानौला, खोल्टा मुहल्ले में लाइन तो बिछा दी, लेकिन 2007 से शेष 3.24 करोड़ का बजट विभाग को नहीं मिला।
इस कारण तीसरे जोन के थपलिया, जोशीखोला आदि मोहल्लों में लाइन डालने, रोडवेज के पास पंप हाउस और पांडेखोला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का काम अधर में है। बजट के अभाव में द्वितीय और चतुर्थ जोन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। सीवर लाइन के अभाव में शहर में कई स्थानों पर गंदगी फैली रहती है। लोग घरों की गंदगी नालियों में बहा देते हैं। राज्य बनने के बाद हुए पिछले निकाय चुनावों में सीवर लाइन मुद्दा बना था, लेकिन सीवर लाइन का काम पूरा नहीं हो सका है। इस चुनाव में भी सीवर लाइन मुख्य मुद्दा रहेगा।