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ट्रीटमेंट बगैर पीने योग्य नहीं है अल्मोड़ा के नौलों का पानी
Updated Wed, 07 Jun 2017 10:52 PM IST
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ट्रीटमेंट बगैर पीने योग्य नहीं है अल्मोड़ा के नौलों का पानी
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा नगर में स्थित अधिकांश नौलों का पानी बगैर ट्रीटमेंट के पीने योग्य नहीं है। लोक विज्ञान संस्थान (पीएसआई) के अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक नगर की नालियों में बहने वाला गंदा पानी रिसकर नौलों तक पहुंचता है, जिससे यह पानी लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। कलक्ट्रेट में आयोजित बैठक में पीएसआई के प्रतिनिधियों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए नौलों के पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए अल्मोड़ा में सीवेज सिस्टम को दुरुस्त करने का सुझाव दिया।
पीएसआई के प्रमुख डा. रवि चोपड़ा और अन्य प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने पिछले एक साल से अल्मोड़ा के नौलों पर विस्तृत अध्ययन करके नौलों की स्थिति और नौलों के पानी की शुद्धता आदि की जांच की। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान चला कि अल्मोड़ा में कभी 369 नौले हुआ करते थे, लेकिन अब सिर्फ 52 नौले जीवित हैं। इनमें से भी कई की जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। है। हालांकि इन 52 नौलों में पानी आज भी मिलता है, लेकिन एक-दो नौलों को छोड़कर किसी का भी पानी बगैर ट्रीटमेंट के पीने योग्य नहीं है। नौलों के पानी के सैंपल की लैब में जांच कराई गई तो पता चला कि करीब 90 प्रतिशत नौलों का पानी प्रदूषित है और ट्रीटमेंट किए बगैर पीने पर लोग बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।
पीसीएसआई के अधिकारियों ने बताया कि अल्मोड़ा के लिए आज भी इन नौलों का काफी महत्व है और कई लोग आज भी नौलों पर निर्भर हैं। बारिश होने पर आए दिन कोसी से पानी की आपूर्ति बाधित हो जाती है और ऐसे में लोग इन नौलों के पानी का ही उपयोग करते हैं। साथ ही अधिकारियों ने बताया कि नगर में तमाम इलाकों में लोग अपना सीवेज नालियों में बहाते हैं यही गंदगी रिसकर नौलों तक पहुंच रही है। पीएसआई शीघ्र ही अपनी संस्तुतियां प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को सौंपेगी। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, उत्तराखंड सेवा निधि के निदेशक पद्मश्री डा. ललित पांडे, कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर भूगोल विभाग के प्रो.जेएस रावत, वरिष्ठ पत्रकार डा.शमशेर सिंह बिष्ट, पीसी तिवारी, पीएसआई के चीफ साइंटिस्ट अनिल गौतम, देवाशीष सेन, जीबी पंत हिमालयन पर्यावरण विकास संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार, ब्रिगेडियर केसी जोशी, डा.रमेश पांडे राजन, यूसुफ तिवारी, सभासद अशोक पांडे, हेम तिवारी, राजेंद्र तिवारी, पूरन चंद्र तिवारी, डीके कांडपाल, छावनी उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा, दयाकृष्ण कांडपाल, जीवन चंद्र गुप्ता आदि मौजूद थे।
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा नगर में स्थित अधिकांश नौलों का पानी बगैर ट्रीटमेंट के पीने योग्य नहीं है। लोक विज्ञान संस्थान (पीएसआई) के अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक नगर की नालियों में बहने वाला गंदा पानी रिसकर नौलों तक पहुंचता है, जिससे यह पानी लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। कलक्ट्रेट में आयोजित बैठक में पीएसआई के प्रतिनिधियों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए नौलों के पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए अल्मोड़ा में सीवेज सिस्टम को दुरुस्त करने का सुझाव दिया।
पीएसआई के प्रमुख डा. रवि चोपड़ा और अन्य प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने पिछले एक साल से अल्मोड़ा के नौलों पर विस्तृत अध्ययन करके नौलों की स्थिति और नौलों के पानी की शुद्धता आदि की जांच की। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान चला कि अल्मोड़ा में कभी 369 नौले हुआ करते थे, लेकिन अब सिर्फ 52 नौले जीवित हैं। इनमें से भी कई की जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। है। हालांकि इन 52 नौलों में पानी आज भी मिलता है, लेकिन एक-दो नौलों को छोड़कर किसी का भी पानी बगैर ट्रीटमेंट के पीने योग्य नहीं है। नौलों के पानी के सैंपल की लैब में जांच कराई गई तो पता चला कि करीब 90 प्रतिशत नौलों का पानी प्रदूषित है और ट्रीटमेंट किए बगैर पीने पर लोग बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।
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पीसीएसआई के अधिकारियों ने बताया कि अल्मोड़ा के लिए आज भी इन नौलों का काफी महत्व है और कई लोग आज भी नौलों पर निर्भर हैं। बारिश होने पर आए दिन कोसी से पानी की आपूर्ति बाधित हो जाती है और ऐसे में लोग इन नौलों के पानी का ही उपयोग करते हैं। साथ ही अधिकारियों ने बताया कि नगर में तमाम इलाकों में लोग अपना सीवेज नालियों में बहाते हैं यही गंदगी रिसकर नौलों तक पहुंच रही है। पीएसआई शीघ्र ही अपनी संस्तुतियां प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को सौंपेगी। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, उत्तराखंड सेवा निधि के निदेशक पद्मश्री डा. ललित पांडे, कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर भूगोल विभाग के प्रो.जेएस रावत, वरिष्ठ पत्रकार डा.शमशेर सिंह बिष्ट, पीसी तिवारी, पीएसआई के चीफ साइंटिस्ट अनिल गौतम, देवाशीष सेन, जीबी पंत हिमालयन पर्यावरण विकास संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार, ब्रिगेडियर केसी जोशी, डा.रमेश पांडे राजन, यूसुफ तिवारी, सभासद अशोक पांडे, हेम तिवारी, राजेंद्र तिवारी, पूरन चंद्र तिवारी, डीके कांडपाल, छावनी उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा, दयाकृष्ण कांडपाल, जीवन चंद्र गुप्ता आदि मौजूद थे।
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