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‘विजयपथ’ पर भाई-बहन की जोड़ी
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अल्मोड़ा। द अल्टीमेट उत्तराखंड हिमालय एमटीबी चैलेंज में एक भाई-बहन की जोड़ी भी जीत के लिए जोर आजमाइश कर रही है। तीसरी बार किसी प्रतियोगिता में भाग ले रही इस जोड़ी में साइकिलिंग के प्रति जबर्दस्त उत्साह है।
शीतला मुक्तेश्वर निवासी कमलेश राणा (23) और उनकी बहन पूनम राणा 2014 से साइकिलिंग कर रहे हैं।
नागा रेजीमेंट में सिपाही पद पर तैनात कमलेश बताते हैं कि उनके ताऊ का बेटा राकेश साइकिलिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है, जिसे देखकर उसकी भी साइकिलिंग के प्रति रुचि जाग गई। हल्द्वानी निवासी पूनम ने बताया कि उसके पति भी सेना में हैं। वह घर का कामकाज निपटाकर रोजाना चार से पांच घंटे साइकिलिंग करती हैं।
कमलेश ने 2018 में हुई एमटीबी नेशनल चैंपियनशिप में चतुर्थ स्थान प्राप्त किया, वहीं पूनम 2018 एमटीबी नेशनल चैंपियनशिप में महिला वर्ग में टाइम ट्रायल और मास्टर आर्ट में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। दोनों ने एक साथ वर्ष 2018 में बीएसएफ की ओर से देहरादून में हुई साइकिलिंग प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग किया। दोनों की प्रतिभा को देखते हुए सेना ने कमलेश को चार लाख तो पूनम को एसएसबी के कमाडेंट राकेश ठाकुर ने डेढ़ लाख की साइकिल दी है।
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पूनम एशियन गेम्स की कर रही तैयारी
अल्मोड़ा। पूनम ने बताया कि उनका लक्ष्य एशियन गेम्स में होने वाली साइकिलिंग प्रतियोगिता में भाग लेना है। इसके लिए वह कड़ा परिश्रम भी कर रही है। बताया कि जब उन्होंने गांव में साइकिल चलानी शुरू की थी तब आसपास के लोग तरह-तरह की बातेें करते थे लेकिन उसने इसकी कोई परवाह नहीं है। उन्होंने अपने शौक और जुनून को कायम रखा और साइकिल का पैडल नहीं छोड़ा। आज वह कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है।
शीतला मुक्तेश्वर निवासी कमलेश राणा (23) और उनकी बहन पूनम राणा 2014 से साइकिलिंग कर रहे हैं।
नागा रेजीमेंट में सिपाही पद पर तैनात कमलेश बताते हैं कि उनके ताऊ का बेटा राकेश साइकिलिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है, जिसे देखकर उसकी भी साइकिलिंग के प्रति रुचि जाग गई। हल्द्वानी निवासी पूनम ने बताया कि उसके पति भी सेना में हैं। वह घर का कामकाज निपटाकर रोजाना चार से पांच घंटे साइकिलिंग करती हैं।
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कमलेश ने 2018 में हुई एमटीबी नेशनल चैंपियनशिप में चतुर्थ स्थान प्राप्त किया, वहीं पूनम 2018 एमटीबी नेशनल चैंपियनशिप में महिला वर्ग में टाइम ट्रायल और मास्टर आर्ट में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। दोनों ने एक साथ वर्ष 2018 में बीएसएफ की ओर से देहरादून में हुई साइकिलिंग प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग किया। दोनों की प्रतिभा को देखते हुए सेना ने कमलेश को चार लाख तो पूनम को एसएसबी के कमाडेंट राकेश ठाकुर ने डेढ़ लाख की साइकिल दी है।
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पूनम एशियन गेम्स की कर रही तैयारी
अल्मोड़ा। पूनम ने बताया कि उनका लक्ष्य एशियन गेम्स में होने वाली साइकिलिंग प्रतियोगिता में भाग लेना है। इसके लिए वह कड़ा परिश्रम भी कर रही है। बताया कि जब उन्होंने गांव में साइकिल चलानी शुरू की थी तब आसपास के लोग तरह-तरह की बातेें करते थे लेकिन उसने इसकी कोई परवाह नहीं है। उन्होंने अपने शौक और जुनून को कायम रखा और साइकिल का पैडल नहीं छोड़ा। आज वह कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है।