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बूढ़ी पंपिंग योजना जनता की प्यास बुझाने में असफल
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अल्मोड़ा। कोसी नदी से अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों को पेयजल आपूर्ति करने वाली पेयजल योजना करीब तीन दशक अधिक पुरानी हो गई है। जरूरत के मुताबिक पंपिंग नहीं होने से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। जिससे जनता को गर्मी के सीजन में गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने 24 जून 2017 को पेयजल योजना के पुनर्गठन के लिए 49 करोड़ रुपये की घोषणा भी की थी, लेकिन पुनर्गठन का कार्य भी अब तक शुरू नहीं हो सका है।
1992 में कोसी पेयजल योजना का पुनर्गठन हुआ और शहर के लिए पेयजल योजना बनाई गई। कोसी में तीन पंपों से शहर को पानी की आपूर्ति होती है। मटेला स्थित फिल्टरेशन प्लांट से सर्किट हाउस टैंक, पातालदेवी टैंक और एडम्स टैंक के लिए तीन अलग-अलग पेयजल लाइनें हैं।
पेयजल लाइनें जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच चुकी हैं। जनसंख्या बढ़ने के साथ ही पेयजल की खपत भी बढ़ने लगी है। वर्तमान में 16 से 18 एमएलडी पानी की जरूरत है, परंतु जल संस्थान आठ एमएलडी पानी की ही आपूर्ति कर पा रहा है।
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गर्मी के सीजन में पानी की खपत बढ़ जाती है। जरूरत का आधा पानी ही मिलने से लोगों को गर्मी के सीजन में गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। शहर के कई मोहल्लों में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति हो रही है।
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1992 में कोसी पेयजल योजना का पुनर्गठन हुआ और शहर के लिए पेयजल योजना बनाई गई। कोसी में तीन पंपों से शहर को पानी की आपूर्ति होती है। मटेला स्थित फिल्टरेशन प्लांट से सर्किट हाउस टैंक, पातालदेवी टैंक और एडम्स टैंक के लिए तीन अलग-अलग पेयजल लाइनें हैं।
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पेयजल लाइनें जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच चुकी हैं। जनसंख्या बढ़ने के साथ ही पेयजल की खपत भी बढ़ने लगी है। वर्तमान में 16 से 18 एमएलडी पानी की जरूरत है, परंतु जल संस्थान आठ एमएलडी पानी की ही आपूर्ति कर पा रहा है।
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गर्मी के सीजन में पानी की खपत बढ़ जाती है। जरूरत का आधा पानी ही मिलने से लोगों को गर्मी के सीजन में गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। शहर के कई मोहल्लों में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति हो रही है।