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फव्वारा और ड्रिप सिंचाई तकनीक खेती के लिए उपयोगी
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अल्मोड़ा। फव्वारा और ड्रिप सिंचाई तकनीक पर्वतीय क्षेत्र के लिए काफी लाभदायक है। इस प्रणाली से जहां पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है वहीं पानी की बचत भी होती है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत काश्तकारों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली स्थापित करने के लिए 45 फीसदी तक अनुदान दिया जा रहा है।
अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के साथ ही अल्मोड़ा जिले में भी अधिकतर कृषि भूमि असिंचित है। खेती बारिश पर ही निर्भर रहती है। बारिश समय पर नहीं होने पर कई बार किसानों को नुकसान उठना पड़ता है। ऐसे में विभिन्न सूक्ष्म सिंचाई तकनीक काश्तकारों के लिए लाभदायक है।
पीएमकेएसवाई के राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन के तहत इकाई स्थापित करने के लिए सामान्य श्रेणी के किसानों को कुल लागत में से 40.5 फीसदी केंद्र और 4.5 फीसदी राज्य सरकार अनुदान दे रही है। 55 फीसदी काश्तकार को वहन करना होगा। वहीं लघु सीमांत श्रेणी के कृषकों को केंद्र सरकार 49.5 फीसदी और राज्य सरकार 5.5 फीसदी अनुदान दे रही है।
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जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि टपक, फव्वारा सिंचाई प्रणाली, सूक्ष्म, पोर्टेबल और स्प्रिंकलर सिंचाई यूनिट काश्तकार अपने खेतों में स्थापित कर सकते हैं। अब तक जिले में 32 यूनिटें स्थापित कर दी गई हैं।
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अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के साथ ही अल्मोड़ा जिले में भी अधिकतर कृषि भूमि असिंचित है। खेती बारिश पर ही निर्भर रहती है। बारिश समय पर नहीं होने पर कई बार किसानों को नुकसान उठना पड़ता है। ऐसे में विभिन्न सूक्ष्म सिंचाई तकनीक काश्तकारों के लिए लाभदायक है।
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पीएमकेएसवाई के राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन के तहत इकाई स्थापित करने के लिए सामान्य श्रेणी के किसानों को कुल लागत में से 40.5 फीसदी केंद्र और 4.5 फीसदी राज्य सरकार अनुदान दे रही है। 55 फीसदी काश्तकार को वहन करना होगा। वहीं लघु सीमांत श्रेणी के कृषकों को केंद्र सरकार 49.5 फीसदी और राज्य सरकार 5.5 फीसदी अनुदान दे रही है।
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जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि टपक, फव्वारा सिंचाई प्रणाली, सूक्ष्म, पोर्टेबल और स्प्रिंकलर सिंचाई यूनिट काश्तकार अपने खेतों में स्थापित कर सकते हैं। अब तक जिले में 32 यूनिटें स्थापित कर दी गई हैं।