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नशा नहीं, रोजगार दो आंदोलन के नेता डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का निधन

Sat, 22 Sep 2018 11:06 PM IST
Updated Sat, 22 Sep 2018 11:06 PM IST
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नशा नहीं, रोजगार दो आंदोलन के नेता डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का निधन
अल्मोड़ा। चिपको आंदोलन के प्रमुख नेता और नशा नहीं, रोजगार दो आंदोलन, राज्य आंदोलन सहित उत्तराखंड के तमाम जनसंघर्षों से जुड़े रहे जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता वरिष्ठ पत्रकार उलोवा के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉ. बिष्ट पिछले काफी समय से बीमार थे। शनिवार तड़के चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी अंत्येष्टि में भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। डॉ. बिष्ट अपने पीछे अपने पीछे पत्नी श्रीमती रेवती बिष्ट के अलावा दो पुत्रों जयमित्र बिष्ट, अजय बिष्ट सहित भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।
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डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का जन्म चार फरवरी 1947 को अल्मोड़ा में हुआ। मूल रूप से विकासखंड स्याल्दे के तिमली गांव निवासी उनके पिता स्व. गोविंद अल्मोड़ा कचहरी में कार्य करते थे। डॉ. बिष्ट का जन्म भी अल्मोड़ा में ही हुआ। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने तत्कालीन संगठक महाविद्यालय अल्मोड़ा में प्रवेश लिया और छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। 1972 में वह तत्कालीन अल्मोड़ा संगठक महाविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष बने और उन्होंने पहली बार छात्रों की समस्याओं के साथ ही राज्य और उत्तराखंड के मुद्दों को लेकर संघर्ष की शुरुआत की। उसके बाद उत्तराखंड के मुद्दों को लेकर छात्रों ने अहम भूमिका निभाई।
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डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने चिपको आंदोलन, विश्वविद्यालय आंदोलन, वन बचाओ आंदोलन, नशा नहीं, रोजगार दो, नदी बचाओ और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन में वह अपने साथियों के साथ 40 दिन तक जेल में रहे। इसके अलावा राज्य के कई अन्य आंदोलनों में भी उनकी कई बार गिरफ्तारी हुई। उन्होंने 1974 में अपने तीन अन्य साथियों के साथ अस्कोट से आराकोट तक की 45 दिन की यात्रा की। 1977 में उत्तराखंड जन संघर्ष वाहिनी के गठन के बाद डॉ. बिष्ट और कुछ अन्य नेताओं के नेतृत्व में वनों को बचाने के लिए जबरदस्त आंदोलन हुआ। उत्तराखंड के अलावा देश में मानवाधिकार, पर्यावरण, नदियों आदि के मुद्दों को लेकर भी वह देश के विभिन्न इलाकों में आयोजित होने वाले सम्मेलनों और जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे।
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दोपहर बाद विश्वनाथ घाट में उनकी अंत्येष्टि कर दी गई। उनके दोनों पुत्रों ने मुखाग्नि दी। अंत्येष्टि में केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सहित राज्य भर से तमाम सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता, पत्रकार और बुद्धिजीवी मौजूद थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, जाने माने इतिहासकार प्रो. शेखर पाठक, वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह, उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी के अलावा अल्मोड़ा के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया सहित जन प्रतिनिधियों और संगठनों ने गहरा शोक जताया है।
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