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मार्च में समाप्त हो जाएगी चारा विकास परियोजना
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अल्मोड़ा। भैंसवाड़ा फार्म में चल रही चारा विकास परियोजना पशुपालकों को हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है, लेकिन भैंसवाड़ा फार्म में चल रही यह परियोजना अगले माह मार्च में समाप्त हो जाएगी। जिससे फार्म में कार्यरत 15 दैनिक श्रमिकों के बेरोजगार होने की आशंका है।
पर्वतीय क्षेत्र में जाड़े और गरमी के सीजन में पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या बनी रहती है। इसको देखते हुए आजीविका परियोजना के सहयोग से पशुपालन विभाग द्वारा भैंसवाड़ा फार्म में 2015 से चारा विकास परियोजना संचालित की जा रही है। फार्म के करीब छह हेक्टेयर क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल उगाई जाने वाली चारा घास का उत्पादन किया जा रहा है। साथ ही घास का बीज भी तैयार किया जाता है।
फार्म में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर काश्तकारों को हरा चारा घास उत्पादन के लिए गुर सिखाए जाते हैं। पशुपालकों को समय-समय पर फार्म का भ्रमण कराया जाता है।
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भ्रमण पर आने वाले काश्तकारों को चारा घास बीज मिनी किट निशुल्क दिया जाता है। यदि परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया तो वहां कार्य कर रहे 15 दैनिक मजदूरों का रोजगार समाप्त हो जाएगा।
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पर्वतीय क्षेत्र में जाड़े और गरमी के सीजन में पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या बनी रहती है। इसको देखते हुए आजीविका परियोजना के सहयोग से पशुपालन विभाग द्वारा भैंसवाड़ा फार्म में 2015 से चारा विकास परियोजना संचालित की जा रही है। फार्म के करीब छह हेक्टेयर क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल उगाई जाने वाली चारा घास का उत्पादन किया जा रहा है। साथ ही घास का बीज भी तैयार किया जाता है।
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फार्म में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर काश्तकारों को हरा चारा घास उत्पादन के लिए गुर सिखाए जाते हैं। पशुपालकों को समय-समय पर फार्म का भ्रमण कराया जाता है।
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भ्रमण पर आने वाले काश्तकारों को चारा घास बीज मिनी किट निशुल्क दिया जाता है। यदि परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया तो वहां कार्य कर रहे 15 दैनिक मजदूरों का रोजगार समाप्त हो जाएगा।