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शुरू नहीं हो सका शिल्प उन्नयन एवं प्रशिक्षण संस्थान का निर्माण
Updated Sat, 10 Nov 2018 10:13 PM IST
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अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्र की परंपरागत कला और शिल्प को बचाने और संरक्षित करने के लिए कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में करीब तीन साल पहले गुरुड़ाबांज में 100 करोड़ की लागत से स्व. हरिराम टम्टा पारंपरिक शिल्प उन्नयन और प्रशिक्षण संस्थान मंजूर किया गया था। नौ नवंबर 2016 को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इसका शिलान्यास करने गुरुड़ाबांज पहुंचीं लेकिन इसके बावजूद भूमि के समतलीकरण और चारदीवारी के अलावा वहां आज तक कुछ काम नहीं हो सका है।
पर्वतीय क्षेत्र की भवन निर्माण कला, लकड़ी से बनाए जाने वाले बर्तन, नक्काशीदार दरवाजे (खोली), खिड़की (छज्जे), ताम्र कला, परंपरागत वाद्य यंत्रों समेत अन्य परंपरागत शिल्प विलुप्त हो रहा है। इस तरह का काम करने वाले शिल्पियों की नई पीढ़ी इस काम को छोड़ रही है। जिससे धीरे-धीरे यह परंपरागत कला और शिल्प विलुप्त होता जा रहा है। पारंपरिक शिल्पों के विलुप्त होते जाने से बेरोजगारी भी बढ़ती जा रही है।
करीब तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य के पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण, उन्नयन और युवाओं को पारंपरिक शिल्पों का प्रशिक्षण देने को गुरुड़ाबांज में शिल्पकार हरिराम टम्टा पर पारंपरिक शिल्प उन्नयन और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने और इसके लिए 100 करोड़ का प्राविधान करने की घोषणा की थी।
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नौ नवंबर 2016 को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुड़ाबांज आकर इस संस्थान का शिलान्यास किया। उसके बाद तत्कालीन सरकार ने इसके लिए 1.20 करोड़ रुपये ही अवमुक्त किए। जिससे चारदीवारी आदि का कार्य किया गया। हालांकि सरकार ने 2017 तक इस संस्थान को स्थापित करने की बात कही थी लेकिन आज तक इसके लिए कोई बजट मंजूर नहीं हुआ।
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पर्वतीय क्षेत्र की भवन निर्माण कला, लकड़ी से बनाए जाने वाले बर्तन, नक्काशीदार दरवाजे (खोली), खिड़की (छज्जे), ताम्र कला, परंपरागत वाद्य यंत्रों समेत अन्य परंपरागत शिल्प विलुप्त हो रहा है। इस तरह का काम करने वाले शिल्पियों की नई पीढ़ी इस काम को छोड़ रही है। जिससे धीरे-धीरे यह परंपरागत कला और शिल्प विलुप्त होता जा रहा है। पारंपरिक शिल्पों के विलुप्त होते जाने से बेरोजगारी भी बढ़ती जा रही है।
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करीब तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य के पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण, उन्नयन और युवाओं को पारंपरिक शिल्पों का प्रशिक्षण देने को गुरुड़ाबांज में शिल्पकार हरिराम टम्टा पर पारंपरिक शिल्प उन्नयन और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने और इसके लिए 100 करोड़ का प्राविधान करने की घोषणा की थी।
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नौ नवंबर 2016 को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुड़ाबांज आकर इस संस्थान का शिलान्यास किया। उसके बाद तत्कालीन सरकार ने इसके लिए 1.20 करोड़ रुपये ही अवमुक्त किए। जिससे चारदीवारी आदि का कार्य किया गया। हालांकि सरकार ने 2017 तक इस संस्थान को स्थापित करने की बात कही थी लेकिन आज तक इसके लिए कोई बजट मंजूर नहीं हुआ।