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वैज्ञानिकों ने किसानों को दी आधुनिक खेती की जानकारी
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:24 PM IST
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अल्मोड़ा। गोविंद वल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के ग्रामीण तकनीकी परिसर में ग्रामीणों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। संस्थान द्वारा चलाई जा रही परियोजना ‘मध्य हिमालयी क्षेत्रों में आजीविका संवर्द्धन हेतु तकनीकी हस्तांतरण द्वारा आदर्श गांव का विकास’ के तहत प्रशिक्षण के दौरान किसानों को भूमि में आधुनिक सरल एवं कम खर्चीली तकनीकों और स्थानीय संसाधनों का उचित उपयोग करते हुए आर्थिक स्थिति को मजबूत करने, प्राकृतिक पर्यावरण सुधार करने की जानकारी दी गई।
ताकुला ब्लॉक के भेटुली गांव के ग्रामीणों के लिए आयोजित शिविर में ग्रामीण तकनीकी परिसर के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीएस रावत ने सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी और इन परियोजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया।
शोधार्थी मनीषा पिमोली और मुकेश देवराड़ी ने पॉलीहाउस, पॉलीपिट और पॉलीटनल, मशरूम उत्पादन, समन्वित मत्स्य पालन, बर्मी कम्पोस्ट, बायोकम्पोस्ट एवं पीरूल, खरपतवार के उपयोग से धूम्र रहित ईंधन तैयार करने की जानकारी दी। प्रशिक्षण शिविर के द्वितीय सत्र में तकनीकी विशेषज्ञ डीएस बिष्ट ने संरक्षित खेती द्वारा बेमौसमी सब्जी उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। समापन सत्र में प्रशिक्षार्थियों ने जानकारी को महत्वपूर्ण बताते हुए इन तकनीकों को गांव में अपनाने की इच्छा भी जताई।
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संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सीएसईडी केंद्र के प्रमुख डॉ. आरसी सुंदरियाल ने समापन मौके पर कहा कि ग्रामीणों को जागरूक होने की आवश्यकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रावत ने योजना के तहत समूह बनाकर काम करने पर जोर दिया। संचालन वैज्ञानिक डॉ. हर्षित पंत ने किया। इस मौके पर वैज्ञानिक आरके सिंह समेत परियोजना में कार्यरत परियोजना कंसलटेंट दीप्ति भोजक, महेश राम, संजीव आर्या भी मौजूद थेे।
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ताकुला ब्लॉक के भेटुली गांव के ग्रामीणों के लिए आयोजित शिविर में ग्रामीण तकनीकी परिसर के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीएस रावत ने सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी और इन परियोजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया।
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शोधार्थी मनीषा पिमोली और मुकेश देवराड़ी ने पॉलीहाउस, पॉलीपिट और पॉलीटनल, मशरूम उत्पादन, समन्वित मत्स्य पालन, बर्मी कम्पोस्ट, बायोकम्पोस्ट एवं पीरूल, खरपतवार के उपयोग से धूम्र रहित ईंधन तैयार करने की जानकारी दी। प्रशिक्षण शिविर के द्वितीय सत्र में तकनीकी विशेषज्ञ डीएस बिष्ट ने संरक्षित खेती द्वारा बेमौसमी सब्जी उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। समापन सत्र में प्रशिक्षार्थियों ने जानकारी को महत्वपूर्ण बताते हुए इन तकनीकों को गांव में अपनाने की इच्छा भी जताई।
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संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सीएसईडी केंद्र के प्रमुख डॉ. आरसी सुंदरियाल ने समापन मौके पर कहा कि ग्रामीणों को जागरूक होने की आवश्यकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रावत ने योजना के तहत समूह बनाकर काम करने पर जोर दिया। संचालन वैज्ञानिक डॉ. हर्षित पंत ने किया। इस मौके पर वैज्ञानिक आरके सिंह समेत परियोजना में कार्यरत परियोजना कंसलटेंट दीप्ति भोजक, महेश राम, संजीव आर्या भी मौजूद थेे।