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पहाड़ के हितों को ध्यान में रखकर हो राजधानी का फैसला
Updated Thu, 14 Sep 2017 10:35 PM IST
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अल्मोड़ा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने संबंधी बयान की निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ के हितों को ध्यान में रखकर राजधानी पर फैसला लिया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि पर्वतीय राज्य की मांग को लेकर उत्तराखंडवासियों ने आंदोलन किया था और अनेक लोगों ने शहादत दी। लंबे संघर्ष के बाद राज्य की प्राप्ति हुई, लेकिन आज केवल निजी स्वार्थ साधने के लिए पर्वतीय राज्य की राजधानी गैरसैंण के स्थान पर देहरादून बनाने की साजिश हो रही है। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने संबंधी बयान भाजपा और उसके प्रदेश अध्यक्ष की पहाड़ विरोधी नीति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के समय केवल विकास के लिए पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग की गई। आज भी विकास मैदानी क्षेत्रों तक सीमित रह गया है। पलायन से पहाड़ के अधिकांश गांव खाली हो गए हैं। अलग राज्य की मांग पहले पर्वतीय जिलों को लेकर हुई। बाद में इसमें हरिद्वार कुंभ क्षेत्र को भी जोड़ दिया गया। उन्होंने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी राजनीतिक दल राजधानी के मुद्दे पर पहाड़ के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लें।
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बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता बिट्टू कर्नाटक और संचालन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजेश बिष्ट ने किया। बैठक में अमन अंसारी, देवेंद्र प्रसाद कर्नाटक, विनोद भट्ट, हेम चंद्र जोशी, रोहित शैली निजाम कुरैशी, अशोक पांडे, जितेंद्र कांडपाल, राकेश बिष्ट, गौरव कांडपाल, प्रकाश मेहता, रजनीश कर्नाटक, दीपेश जोशी, शैलेंद्र तिलारा, शहनवाज अंसारी, जोयाखान, हरीश सिजवाली, नन्नू बिष्ट, हृदेश तिवारी आदि ने भाग लिया।
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वक्ताओं ने कहा कि पर्वतीय राज्य की मांग को लेकर उत्तराखंडवासियों ने आंदोलन किया था और अनेक लोगों ने शहादत दी। लंबे संघर्ष के बाद राज्य की प्राप्ति हुई, लेकिन आज केवल निजी स्वार्थ साधने के लिए पर्वतीय राज्य की राजधानी गैरसैंण के स्थान पर देहरादून बनाने की साजिश हो रही है। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने संबंधी बयान भाजपा और उसके प्रदेश अध्यक्ष की पहाड़ विरोधी नीति को दर्शाता है।
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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के समय केवल विकास के लिए पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग की गई। आज भी विकास मैदानी क्षेत्रों तक सीमित रह गया है। पलायन से पहाड़ के अधिकांश गांव खाली हो गए हैं। अलग राज्य की मांग पहले पर्वतीय जिलों को लेकर हुई। बाद में इसमें हरिद्वार कुंभ क्षेत्र को भी जोड़ दिया गया। उन्होंने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी राजनीतिक दल राजधानी के मुद्दे पर पहाड़ के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लें।
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बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता बिट्टू कर्नाटक और संचालन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजेश बिष्ट ने किया। बैठक में अमन अंसारी, देवेंद्र प्रसाद कर्नाटक, विनोद भट्ट, हेम चंद्र जोशी, रोहित शैली निजाम कुरैशी, अशोक पांडे, जितेंद्र कांडपाल, राकेश बिष्ट, गौरव कांडपाल, प्रकाश मेहता, रजनीश कर्नाटक, दीपेश जोशी, शैलेंद्र तिलारा, शहनवाज अंसारी, जोयाखान, हरीश सिजवाली, नन्नू बिष्ट, हृदेश तिवारी आदि ने भाग लिया।