{"_id":"5a1aee844f1c1b686a8b5d23","slug":"101511714436-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशी कंपनियों के कारण आर्थिक गुलामी की ओर जा रहा भारत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी कंपनियों के कारण आर्थिक गुलामी की ओर जा रहा भारत
Updated Sun, 26 Nov 2017 10:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। वर्तमान अर्थव्यवस्था और स्वदेशी विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद देश में हजारों की संख्या में विदेशी कंपनियां आईं और वह आज भी देश को लूटने में लगी हुई हैं। जिससे हम तेजी से गुलामी की ओर जा रहे हैं। वक्ताओं ने देश की एकता और अखंडता को पुन: कायम करने के लिए वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। वक्ताओं ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार एवं स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने के साथ इसके व्यापक प्रचार प्रसार पर भी जोर दिया।
निर्मल सेवा समिति और पतंजलि योग समिति की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में कार्यक्रम की संयोजक डा. मंजुला बिष्ट ने कहा कि विदेशी कंपनियां शीतल पेय के नाम पर नए ॅ-नए उत्पाद बेच रही हैं और देश से करोड़ों रुपये कमाकर अपने देश को ले जा रही हैं। यही नहीं इन कंपनियों से देश का करोड़ों लीटर भूगर्भीय जल संपदा का दोहन भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार टेक्सटाइल, दवाइयां और सौंदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में भी विदेशी कंपनियों का जाल फैला हुआ है। वक्ताओं ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार एवं स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने के साथ इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि गो पालन को आर्थिक व्यवस्था का आधार मानकर प्राकृतिक संसाधनों को विकसित कर देश को आर्थिक रूप से समृद्ध और सुदृढ़ किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जसौद सिंह बिष्ट ने और संचालन रूप सिंह बिष्ट ने किया। इस अवसर पर कृष्णा कांडपाल, डा. वसुधा पंत, डा. एसएस पथनी द्वारा भी विचार रखे गए। गोष्ठी में बीसी पांडे, आनंद सिंह बिष्ट, मनोहर सिंह, भूपेंद्र सिंह वल्दिया, कृपाल सिंह, हर्षवर्धन, पूजा सत्याल, पूजा सांगा, सुरेंद्र बिष्ट आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
निर्मल सेवा समिति और पतंजलि योग समिति की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में कार्यक्रम की संयोजक डा. मंजुला बिष्ट ने कहा कि विदेशी कंपनियां शीतल पेय के नाम पर नए ॅ-नए उत्पाद बेच रही हैं और देश से करोड़ों रुपये कमाकर अपने देश को ले जा रही हैं। यही नहीं इन कंपनियों से देश का करोड़ों लीटर भूगर्भीय जल संपदा का दोहन भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार टेक्सटाइल, दवाइयां और सौंदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में भी विदेशी कंपनियों का जाल फैला हुआ है। वक्ताओं ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार एवं स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने के साथ इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि गो पालन को आर्थिक व्यवस्था का आधार मानकर प्राकृतिक संसाधनों को विकसित कर देश को आर्थिक रूप से समृद्ध और सुदृढ़ किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जसौद सिंह बिष्ट ने और संचालन रूप सिंह बिष्ट ने किया। इस अवसर पर कृष्णा कांडपाल, डा. वसुधा पंत, डा. एसएस पथनी द्वारा भी विचार रखे गए। गोष्ठी में बीसी पांडे, आनंद सिंह बिष्ट, मनोहर सिंह, भूपेंद्र सिंह वल्दिया, कृपाल सिंह, हर्षवर्धन, पूजा सत्याल, पूजा सांगा, सुरेंद्र बिष्ट आदि मौजूद थे।
विज्ञापन