रानीखेत (अल्मोड़ा)। महाशिवरात्रि का मेला कुमाऊं की प्राचीन संस्कृति का वाहक है। पूरे कुमाऊं में शिवरात्रि के दिन तमाम शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। चिलियानौला का शिव मंदिर भी प्राचीन शिवरात्रि मेले का गवाह रहा है। यह मेला मिनी स्याल्दे बिखौती मेले के नाम से प्रख्यात है। पूर्व में यहां 12 जोड़े नगाड़े निशान, छोलिया नृत्य करते हुए कलाकार युवाओं को प्राचीन संस्कृति से रूबरू कराते थे, हालांकि अब नगाड़े निशानों की संख्या सिमट चुकी है, लेकिन शिवरात्रि के दिन वर्तमान में भी यहां वृहद मेला लगता है।
चिलियानौला के प्राचीन शिव मंदिर में महाशिवरात्रि मेले की शुरुआत 1904 के आस पास हुई थी। सबसे बड़े विकासखंड के रूप में शुमार ताड़ीखेत ब्लॉक की आधी आबादी तब यहां मेला देखने पहुंचती थी। बधांण और आसपास के ग्रामीण 12 जोड़े नगाड़े, निशान और श्रंकार नृत्य करते हुए बाजार में प्रस्तुति देते थे। हालांकि यह परंपरा अब भी जारी है, लेकिन नगाड़े, निशानों की संख्या सीमित हो गई है। हैड़ाखान मंदिर पर एकत्रित होकर ग्रामीण नगाड़े निशानों के साथ शिव मंदिर पहुंचते हैं। इस बार भी एक मार्च को यहां मेले का आयोजन होगा। मेला समिति के सदस्य पूर्व प्रधान गणेश कुवार्बी ने बताया कि इस बार मेले का आयोजन होगा। मेले को भव्य बनाने के लिए सभी से सहयोग मांगा जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बाहर के कलाकारों की टीमें भी आमंत्रित होंगी। स्कूल के बच्चों की ओर से भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।