अब 'कानून के हाथ' करेंगे सरकार बचाने में मदद
संकट से उबरने को बागी विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने की तैयारी।
दिनभर कानून की बारीकियों में उलझी रहीं संसदीय कार्यमंत्री।
विधानसभा अध्यक्ष के घर पर जमी रही विधिवेत्ताओं की फौज।
कांग्रेस के पास इस समय तक हैं 36 विधायक।
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विस्तार
28 मार्च तक बहुमत साबित करने और बागी विधायकों से लगे झटके से उबरने के लिए कांग्रेस ने अब दल बदल कानून का सहारा लिया है। शनिवार की देर शाम दल बदल कानून के तहत बागी नौ विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने की तैयारी भी कांग्रेस ने कर ली।
इन सभी विधायकों को नोटिस जारी कर दिया गया है। कांग्रेस विधानमंडल दल की मुख्य सचेतक और संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने इसकी पुष्टि की। इससे पूर्व दिनभर दल बदल कानून के नोटिस की भाषा और आधार को लेकर राय मशविरा किया जाता रहा।
शनिवार का पूरा दिन कांग्रेस ने नौ बागी विधायकों के मैनेजमेंट प्लान की मशक्कत में गुजारा। आखिरकार तय किया गया कि इस मामले में बागी नौ विधायकों के खिलाफ दल बदल कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस के पास इस समय तक 36 विधायक हैं। इनमें से शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, शैलारानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, प्रदीप बतरा, कुंवर प्रणव चैंपियन, अमृता रावत, सुबोध उनियाल और उमेश शर्मा काऊ ने हरीश रावत की सरकार के खिलाफ खुलकर बगावत की थी। 36 में से नौ विधायकों के जाने से झटके से सरकार भी संकट में पड़ी।
संकट से उबरने को दिनभर होती रही मशक्कत
शनिवार को दिनभर इस संकट से उबरने के लिए मशक्कत होती रही। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के यमुना कालोनी स्थित आवास पर संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश और विधिवेत्ताओं की फौज इसी काम में जुटी रही। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का साफ कहना था कि सदन में व्हिप का कोई उल्लंघन नहीं किया गया।
अलग होने के लिए दो तिहाई सदस्यों की संख्या जरूरी
सूत्रों के मुताबिक बागी विधायकों के आचरण और सरकार विरोधी तेवर को आधार बनाने का मन भी बनाया गया। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई।
बाद में नोटिस तैयार कर मुख्य सचेतक इंदिरा हृदयेश ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया। संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ने कहा कि नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह भी कहा गया कि दल बदल कानून के तहत मूल दल से अलग होने के लिए दो तिहाई सदस्यों की संख्या होनी जरूरी है।
यहीं कानून है सरकार के पास विकल्प के तौर पर
राजभवन की ओर से 28 मार्च तक बहुमत साबित करने के निर्देश के बाद कांग्रेस सरकार के पास बचाव का एक मात्र यही कानून के उपयोग के विकल्प की बात भी की जा रही है।
इसी को देखते हुए इस कानून के तहत की जा रही कार्रवाई को पूरी तरह से ठोक बजाकर देखा जा रहा है। बहुमत साबित करने के लिए कांग्रेस के पास कम ही दिन हैं, ऐसे में कार्रवाई में भी कांग्रेस बहुत अधिक समय जाया करना नहीं चाहती।