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अब 'कानून के हाथ' करेंगे सरकार बचाने में मदद 

Sat, 19 Mar 2016 09:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 19 Mar 2016 09:26 PM IST
सार

संकट से उबरने को बागी विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने की तैयारी।
दिनभर कानून की बारीकियों में उलझी रहीं संसदीय कार्यमंत्री।
विधानसभा अध्यक्ष के घर पर जमी रही विधिवेत्ताओं की फौज।
कांग्रेस के पास इस समय तक हैं 36 विधायक।

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Against the government, MLA have issued notices.
सदन में जाते मुख्यमंत्री हरीश रावत। - फोटो : AmarUjala

विस्तार

28 मार्च तक बहुमत साबित करने और बागी विधायकों से लगे झटके से उबरने के लिए कांग्रेस ने अब दल बदल कानून का सहारा लिया है। शनिवार की देर शाम दल बदल कानून के तहत बागी नौ विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने की तैयारी भी कांग्रेस ने कर ली। 

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इन सभी विधायकों को नोटिस जारी कर दिया गया है। कांग्रेस विधानमंडल दल की मुख्य सचेतक और संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने इसकी पुष्टि की। इससे पूर्व दिनभर दल बदल कानून के नोटिस की भाषा और आधार को लेकर राय मशविरा किया जाता रहा।
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शनिवार का पूरा दिन कांग्रेस ने नौ बागी विधायकों के मैनेजमेंट प्लान की मशक्कत में गुजारा। आखिरकार तय किया गया कि इस मामले में बागी नौ विधायकों के खिलाफ दल बदल कानून के तहत कार्रवाई की जाए। 
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कांग्रेस के पास इस समय तक 36 विधायक हैं।  इनमें से शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, शैलारानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, प्रदीप बतरा, कुंवर प्रणव चैंपियन, अमृता रावत, सुबोध उनियाल और उमेश शर्मा काऊ ने हरीश रावत की सरकार के खिलाफ खुलकर बगावत की थी। 36 में से नौ विधायकों के जाने से झटके से सरकार भी संकट में पड़ी। 

संकट से उबरने को दिनभर होती रही मशक्कत 
शनिवार को दिनभर इस संकट से उबरने के लिए मशक्कत होती रही। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के यमुना कालोनी स्थित आवास पर संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश और विधिवेत्ताओं की फौज इसी काम में जुटी रही। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का साफ कहना था कि सदन में व्हिप का कोई उल्लंघन नहीं किया गया। 

अलग होने के लिए दो तिहाई सदस्यों की संख्या जरूरी

Against the government, MLA have issued notices.
कानून - फोटो : demo


सूत्रों के मुताबिक बागी विधायकों के आचरण और सरकार विरोधी तेवर को आधार बनाने का मन भी बनाया गया। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई। 

बाद में नोटिस तैयार कर मुख्य सचेतक इंदिरा हृदयेश ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया। संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ने कहा कि नोटिस जारी कर दिए गए हैं। 

सूत्रों के मुताबिक यह भी कहा गया कि दल बदल कानून के तहत मूल दल से अलग होने के लिए दो तिहाई सदस्यों की संख्या होनी जरूरी है। 

यहीं कानून है सरकार के पास विकल्प के तौर पर 
राजभवन की ओर से 28 मार्च तक बहुमत साबित करने के निर्देश के बाद कांग्रेस सरकार के पास बचाव का एक मात्र यही कानून के उपयोग के विकल्प की बात भी की जा रही है। 

इसी को देखते हुए इस कानून के तहत की जा रही कार्रवाई को पूरी तरह से ठोक बजाकर देखा जा रहा है। बहुमत साबित करने के लिए कांग्रेस के पास कम ही दिन हैं, ऐसे में कार्रवाई में भी कांग्रेस बहुत अधिक समय जाया करना नहीं चाहती।

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