{"_id":"5713a3744f1c1b9d2710fbd1","slug":"492-hectare-forest-caught-fire-in-uttarakhand","type":"story","status":"publish","title_hn":"आग से 48 दिनों में 492 हेक्टेयर जंगल हुए खाक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आग से 48 दिनों में 492 हेक्टेयर जंगल हुए खाक
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 17 Apr 2016 08:23 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की कमी से तप रहे उत्तराखंड के जंगलों में अब तक 492.38 हेक्टेयर भूमि आग की लपटों में आ चुकी है।
विज्ञापन
समय से सूचना मिलने और कारगर उपाय होने से यह गनीमत रही कि आग विशालकाय रूप नहीं ले सकी। अमेरिकी सेटेलाइट मोडिस से भारतीय वन सर्वेक्षण जंगलों की निगरानी कर रहा है। सबसे अधिक आग की घटनाएं चीड़ वाले क्षेत्रों में हुई हैं। गढ़वाल मंडल में सर्वाधिक वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं।
विज्ञापन
प्रदेश के 1200 मीटर तक ऊंचाई वाले जंगलों में चीड़ के पेड़ों की संख्या अधिक है। रविवार दोपहर तीन बजे तक प्रदेश में वनाग्नि की 239 घटनाएं कंट्रोल रूम में रिकार्ड की गई हैं। इन क्षेत्रों में चीड़ के पेड़ों के पत्ते पटे पड़े हैं। इनसे आग का और अधिक खतरा रहता है।
विज्ञापन
वन विभाग ने इन स्थानों पर क्रू स्टेशन स्थापित कर दिए हैं। पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, बागेश्वर आदि जिलों में वनाग्नि की घटनाएं अधिक हुई हैं। कंट्रोल रूम में एक मार्च से वनाग्नि की घटनाएं रिकार्ड की जा रही हैं। गढ़वाल मंडल में अब तक 135 घटनाएं हुई हैं।
इनसे 217.38 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं। कुमाऊं मंडल में अब तक वनाग्नि की 66 घटनाएं हुई हैं। यहां 139.65 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए। इसके अलावा वन्य जीव आरक्षित क्षेत्रों में आग की 38 घटनाएं हुई हैं। नेशनल पार्कों में 128.35 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हैं।
वनाग्नि नोडल अधिकारी मुख्य वन संरक्षक (रिसर्च) बीपी गुप्ता ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं पर काबू करने के लिए क्रू स्टेशन बने हैं। रिस्पांस समय जितना कम होता है उतनी जल्दी आग पर काबू पा लिया जाता है।