भजन सोपोरी ने संतूर पर राग जोग से झुमाया
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गंगा किनारे ध्रुपद तीर्थ पर संगीत मेले की तीसरी निशा का आगाज पं.दालचंद शर्मा के पखावज वादन से हुआ। इन्होंने नाथद्वारा शैली की परंपरागत बंदिश को तालों में निबद्ध कर बजाया तो संगीत प्रेमी झूमने लगे। इसके बाद उन्होंने बाज परन की प्रस्तुति की। इसमें उन्होंने तालों पर बाज जैसी तीव्रता का एहसास कराया। सारंगी पर पं.संतोष मिश्र, तानपूरे पर वरुण ने संगत की। इनके बाद शशिकांत पाठक ने पखावज वादन से संगीत निशा को गति प्रदान की। सारंगी पर लहरा दिया महाश्वर दयाल नागर ने।
इनके बाद उस्ताद वसीफुद्दीन डागर ने राग पूरिया में अलापचारी की। इसके बाद राग वसंत में चौताल की बंदिश उन्होंने पेश की। बंदिश के बोल थे- नवल रंग प्रफुल्लित चहुंओर...। इन्होंने राग हिंडोला में धमार की बंदिश- ब्रज में देखो धूम मचाई से विराम लिया। इनके बाद प्रसिद्ध संतूर वादक पं. भजन सोपोरी ने मंच संभाला। सोपोरी के आते ही तालियां गूंजने लगीं।
उन्होंने संतूर पर राग जोग की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के बाद ध्रुपद अंग की रचनाएं बजाईं। इनके साथ सुर संतूर पर जुगलबंदी की कश्मीरी शिष्या वीथिका ने। पखावज पर संगत की ऋषि शंकर उपाध्याय ने। इस मौके पर कुंवर अनंत नारायण सिंह के अलावा संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र भी उपस्थित थे। संचालन डॉ. राजेश्वर आचार्य ने किया।