धरती का दर्द बताने को साइकल पर देश भ्रमण
अपने अभियान के दौरान बुधवार की दोपहर अमर उजाला दफ्तर पहुंचे अनुज ने कहा, ‘पर्यावरण की रक्षा के लिए यह मेरा पहला अभियान नहीं है। इससे पहले कानपुर में एक शीशम का पेड़ काटे जाने पर मैंने सिर मुंडाकर विरोध जताया था। इसके बाद नगर निगम को मुझसे माफी मांगनी पड़ी थी।’ कहा, ग्लोबल वार्मिंग पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट है। यूं ही पेड़ कटते रहे तो प्रकृति विकराल रूप धारण कर लेगी। सब कुछ पल भर में नष्ट हो जाएगा। मैं अपने सफर में जिन लोगों से मिलता हूं, उन्हें एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित करता हूं
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अनुज ने बताया कि 22 जनवरी 2016 को उन्होंने कानपुर से अपना अभियान शुरू किया था। वह दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड होते हुए उत्तर प्रदेश लौटे हैं। अभियान के दौरान करीब 200 रुपये रोजाना खाने और नाश्ते पर खर्च होते हैं। रात उनकी ढाबा, धर्मशाला या गुरुद्वारे में गुजरती है। अनुज ने बताया कि गुरुवार की शाम वह यहां से इलाहाबाद के लिए रवाना होंगे। फिर वहां से प्रतापगढ़ होते हुए लखनऊ जाएंगे। बताया कि अब तक दस हजार किमी का सफर तय कर चुके हैं।