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अचानक निजी बैंक बंद होने से हड़कंप
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Sat, 05 Mar 2016 04:43 PM IST
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शहर के मुखलिसपुर रोड पर स्थित एक निजी बैंक की शाखा के अचानक बंद हो जाने से उपभोक्ताओं में हड़कंप मच गया। शुक्रवार को निजी बैंक की शाखा पर पहुंचे लोगों ने प्रदर्शन कर विरोध जाहिर किया। उपभोक्ताओं ने रकम गबन कर लेने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे बंजरिया निवासी आलम, शिवशंकर, विश्वानाथ, झीनक, मोलनापुर निवासी बबलू का आरोप था कि मुखलिसपुर रोड पर विश्वामित्र इंडिया परिवार नाम की निजी बैक की शाखा करीब सात पहले खुली थी। निजी बैंक एजेंट के माध्यम से पैसा उपभोक्ताओं का जमा किए थे। कुछ उपभोक्ताओ की डिपॉजिट शुक्रवार को पूरी गई थी,जिसे भुगतान के लिए बैंक के कर्मियों ने बुलाया था।
कुछ उपभोक्ता जब शाखा पर पहुंचे तो देखा कि कंप्यूटर,रिकॉर्ड आदि सब गायब था। सिर्फ कुर्सिया और मेज दिखाई दी तो उपभोक्ताओं के होश उड़ गए। अगल - बगल रहने वाले लोगों से उपभोक्ताओं ने पूछताछ की तो पता चला कि कर्मचारी रात में ही जरुरी सामान लेकर चले गए।
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उपभोक्ता विश्वनाथ ने बताया कि वह 12000 रुपये, आलम 90000 रुपये, झीनक 31000, शिवशंकर 18000 रुपये और बबलू ने 12800 रुपये जमा किए थे। कुछ लोगों का डिपाजिट पूरा हो चुका था,जिसे लेने के लिए पहुंचे थे,लेकिन शाखा के अचानक बंद होने से लोग निराश हो गए।
लोगों ने बताया कि काफी संख्या में उपभोक्ताओं ने पैसा जमा है। रकम के गबन का भी आरोप मढ़ा। प्रदर्शन की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और लोगों को समझा बुझा कर शांत कराई।
कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि विश्वामित्र इंडिया परिवार नाम की निजी बैंक के जरिए उपभोक्ताओ का पैसा लेकर भाग जाने की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जा रही है। शाखा में कार्यरत रहे कर्मचारी को ढूूंढा जा रहा है।
उनके मिलने पर पूछताछ के बाद ही इसकी आगे की सच्चाई सामने आएगी और उसके बाद जरुरी कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदर्शन कर रहे बंजरिया निवासी आलम, शिवशंकर, विश्वानाथ, झीनक, मोलनापुर निवासी बबलू का आरोप था कि मुखलिसपुर रोड पर विश्वामित्र इंडिया परिवार नाम की निजी बैक की शाखा करीब सात पहले खुली थी। निजी बैंक एजेंट के माध्यम से पैसा उपभोक्ताओं का जमा किए थे। कुछ उपभोक्ताओ की डिपॉजिट शुक्रवार को पूरी गई थी,जिसे भुगतान के लिए बैंक के कर्मियों ने बुलाया था।
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कुछ उपभोक्ता जब शाखा पर पहुंचे तो देखा कि कंप्यूटर,रिकॉर्ड आदि सब गायब था। सिर्फ कुर्सिया और मेज दिखाई दी तो उपभोक्ताओं के होश उड़ गए। अगल - बगल रहने वाले लोगों से उपभोक्ताओं ने पूछताछ की तो पता चला कि कर्मचारी रात में ही जरुरी सामान लेकर चले गए।
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उपभोक्ता विश्वनाथ ने बताया कि वह 12000 रुपये, आलम 90000 रुपये, झीनक 31000, शिवशंकर 18000 रुपये और बबलू ने 12800 रुपये जमा किए थे। कुछ लोगों का डिपाजिट पूरा हो चुका था,जिसे लेने के लिए पहुंचे थे,लेकिन शाखा के अचानक बंद होने से लोग निराश हो गए।
लोगों ने बताया कि काफी संख्या में उपभोक्ताओं ने पैसा जमा है। रकम के गबन का भी आरोप मढ़ा। प्रदर्शन की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और लोगों को समझा बुझा कर शांत कराई।
कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि विश्वामित्र इंडिया परिवार नाम की निजी बैंक के जरिए उपभोक्ताओ का पैसा लेकर भाग जाने की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जा रही है। शाखा में कार्यरत रहे कर्मचारी को ढूूंढा जा रहा है।
उनके मिलने पर पूछताछ के बाद ही इसकी आगे की सच्चाई सामने आएगी और उसके बाद जरुरी कार्रवाई की जाएगी।