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नमूना फेल, फिर भी दे रहे कैल्शियम की दवा
अमर उजाला ब्यूरो/रायबरेली
Updated Fri, 04 Mar 2016 11:42 PM IST
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कैल्शियम की दवा
- फोटो : अमर उजाला
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सीन एक
लालगंज तहसील क्षेत्र के लोहरामऊ गांव की रहने वाली गीता के पैर में दर्द हो रहा था। गीता जिला अस्पताल इलाज कराने आई थी। डॉक्टर ने इलाज करने के बाद उसे कैल्शियम की दवा भी लिख दी। इस पर गीता काउंटर पर पहुंची और उसके हाथ में वही दवा थमाई गई, जिसका नमूना फेल आया है। लालगंज की रहने वाली सोनपती के भी हाथ पैर में दर्द था। उसे भी वही दवा दी गई, जिसका नमूना फेल आया है।
सीन दो
हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के हिलगी गांव निवासी राम मनोहर जिला अस्पताल इलाज कराने आया था। वह सड़क हादसे में घायल हो गया था। उसके पैर में दर्द हो रहा था। उसे भी कैल्शियम की दवा दी गई। राम मनोहर को क्या पता था कि जो कैल्शियम की दवा उसे उपलब्ध कराई गई है, उससे कोई भला होने वाला नहीं है। पर उसके मन में तो यही था कि दवा से उसे फायदा मिलेगा। राही ब्लॉक क्षेत्र के मुंशीगंज की रहने वाली माया को भी नमूने फेल वाली कैल्शियम की दवा दी गई। जानकारी देने पर बोली यह तो सरासर गलत है। इस पर तो कार्रवाई होनी चाहिए।
रायबरेली। जिला अस्पताल में रोगियों के इलाज के नाम पर किस तरह अंधेरगर्दी चल रही है, उसे बताने के लिए ये दो सीन महज बानगी भर हैं। जिस कैल्शियम की दवा का नमूना फेल आया है, उसी दवा से रोगियों की सेहत को ठीक किया जा रहा है।
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पर सीएमएस हों या फिर अधिकारी, उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। मुख्य औषधि सुरक्षा अधिकारी सुमित वर्मा ने सितंबर 2015 में जिला अस्पताल के दवा गोदाम से ओसोकॉल-500 टैबलेट का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। जांच में दवा का नमूना फेल आया था। सीएमएस का दावा था कि एक लाख टैबलेट मंगवाई गई थी। करीब 40 हजार टैबलेट दवा बची है।
नमूना फेल होने के बाद उसका वितरण रोक दिया गया है। साथ ही नमूना फेल होने पर कंपनी को काली सूची में डालने के लिए पत्र लिखा गया है। पर शुक्रवार को यह दावा हवा हवाई साबित दिखा। ओसोकॉल-500 टैबलेट का वितरण कराया जा रहा था। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी रोगियों की सेहत के लिए कितना फिक्रमंद हैं।
कैल्शियम से मजबूत होतीं हड्डियां
रोगियों के लिए कैल्शियम दवा बहुत उपयोगी होती है। बड़ों के साथ ही छोटे बच्चों के लिए भी यह दवा उपयोगी होती है, क्योंकि इससे हड्डियां मजबूत होती हैं। सड़क हादसे में घायल या फिर पैर दर्द करने पर कैल्शियम का इस्तेमाल किया जाता है। पर जिस दवा का अस्पताल में वितरण किया जा रहा है, उसका नमूना फेल आया है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है।
दूसरी दवा का कराया जा रहा वितरण: सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि जिस ओसोकॉल-500 टैबलेट का नमूना फेल आया है, उसका वितरण बंद करा दिया गया है। कैल्शियम की दूसरी दवा मंगवाकर उसका वितरण कराया जा रहा है। सीएमएस के दावे को मान भी लिया जाए कि दूसरी दवा का वितरण हो रहा है, लेकिन कंपनी तो वही, जिसको काली सूची में डालने के लिए पत्र लिखा गया है, इस सवाल पर सीएमएस ने चुप्पी साध ली।
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लालगंज तहसील क्षेत्र के लोहरामऊ गांव की रहने वाली गीता के पैर में दर्द हो रहा था। गीता जिला अस्पताल इलाज कराने आई थी। डॉक्टर ने इलाज करने के बाद उसे कैल्शियम की दवा भी लिख दी। इस पर गीता काउंटर पर पहुंची और उसके हाथ में वही दवा थमाई गई, जिसका नमूना फेल आया है। लालगंज की रहने वाली सोनपती के भी हाथ पैर में दर्द था। उसे भी वही दवा दी गई, जिसका नमूना फेल आया है।
सीन दो
हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के हिलगी गांव निवासी राम मनोहर जिला अस्पताल इलाज कराने आया था। वह सड़क हादसे में घायल हो गया था। उसके पैर में दर्द हो रहा था। उसे भी कैल्शियम की दवा दी गई। राम मनोहर को क्या पता था कि जो कैल्शियम की दवा उसे उपलब्ध कराई गई है, उससे कोई भला होने वाला नहीं है। पर उसके मन में तो यही था कि दवा से उसे फायदा मिलेगा। राही ब्लॉक क्षेत्र के मुंशीगंज की रहने वाली माया को भी नमूने फेल वाली कैल्शियम की दवा दी गई। जानकारी देने पर बोली यह तो सरासर गलत है। इस पर तो कार्रवाई होनी चाहिए।
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रायबरेली। जिला अस्पताल में रोगियों के इलाज के नाम पर किस तरह अंधेरगर्दी चल रही है, उसे बताने के लिए ये दो सीन महज बानगी भर हैं। जिस कैल्शियम की दवा का नमूना फेल आया है, उसी दवा से रोगियों की सेहत को ठीक किया जा रहा है।
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पर सीएमएस हों या फिर अधिकारी, उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। मुख्य औषधि सुरक्षा अधिकारी सुमित वर्मा ने सितंबर 2015 में जिला अस्पताल के दवा गोदाम से ओसोकॉल-500 टैबलेट का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। जांच में दवा का नमूना फेल आया था। सीएमएस का दावा था कि एक लाख टैबलेट मंगवाई गई थी। करीब 40 हजार टैबलेट दवा बची है।
नमूना फेल होने के बाद उसका वितरण रोक दिया गया है। साथ ही नमूना फेल होने पर कंपनी को काली सूची में डालने के लिए पत्र लिखा गया है। पर शुक्रवार को यह दावा हवा हवाई साबित दिखा। ओसोकॉल-500 टैबलेट का वितरण कराया जा रहा था। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी रोगियों की सेहत के लिए कितना फिक्रमंद हैं।
कैल्शियम से मजबूत होतीं हड्डियां
रोगियों के लिए कैल्शियम दवा बहुत उपयोगी होती है। बड़ों के साथ ही छोटे बच्चों के लिए भी यह दवा उपयोगी होती है, क्योंकि इससे हड्डियां मजबूत होती हैं। सड़क हादसे में घायल या फिर पैर दर्द करने पर कैल्शियम का इस्तेमाल किया जाता है। पर जिस दवा का अस्पताल में वितरण किया जा रहा है, उसका नमूना फेल आया है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है।
दूसरी दवा का कराया जा रहा वितरण: सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का कहना है कि जिस ओसोकॉल-500 टैबलेट का नमूना फेल आया है, उसका वितरण बंद करा दिया गया है। कैल्शियम की दूसरी दवा मंगवाकर उसका वितरण कराया जा रहा है। सीएमएस के दावे को मान भी लिया जाए कि दूसरी दवा का वितरण हो रहा है, लेकिन कंपनी तो वही, जिसको काली सूची में डालने के लिए पत्र लिखा गया है, इस सवाल पर सीएमएस ने चुप्पी साध ली।