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दिल्ली रूट पर रहा यात्रियों का अधिक दबाव
Kasganj
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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कासगंज। त्योहार को मनाने के लिए घर आए लोग अब फिर से अपने काम धंधों और नौकरियों पर लौटने लगे। वहीं, भैया दूज मनाने के बाद शुक्रवार को बहनों का अपनी ससुराल लौटने का सिलसिला शुुरू हो गया। इन्हें वाहनों की किल्लत की समस्या का सामना करना पड़ गया। वाहनों की कमी से यात्रियों को काफी दिक्कतें रहीं। वहीं, रेल गाड़ियों में भी काफी भीड़भाड़ का आलम नजर आया।
भैया दौज के साथ दीपावली पर्व का समापन हो गया। त्योहार को मनाने के लिए घर पर आए नौकरीपैशा लोग अब लौटने लगे। नगरीय और कसबाई इलाकों के बड़ी संख्या में लोग बाहरी राज्यों और जनपदों में रोजीरोटी कमाने के लिए काम करते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दिल्ली में काम करने वालों की होती हैं। इसके चलते दिल्ली के रूट पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया। रोडवेज द्वारा इसके लिए पहले से तैयारियां कर ली गईं थीं। रोडवेज द्वारा अधिकतर बसें दिल्ली रूट पर लगा दी गईं। अन्य रूटों पर बसों की कमी पड़ गईं। इसके चलते जहां लोकल सवारियां को डग्गेमार वाहनों के सहारे ग्रामीण और कसबाई इलाकों से अपना आवागमन करने को मजबूर होना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर भैया दूज के बाद बहनों के लौटने का क्रम शुरू हुआ तो मार्गों पर यात्रियों की काफी भीड़ नजर आई। यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए भटकते रहे। जैसे ही कोई बस नजर आती वे उसमें स्थान पाने के लिए टूट पड़ते। जुगाड़, टेंपो, ट्रैक्टर और दुपहिया वाहन सहित, जो वाहन मिला उसमें यात्रा करनी पड़ी। यहां तक लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बसों, टेंपो की छतों पर बैठकर भी यात्रा करने से परहेज नहीं किया। इधर, रेलों में भी भीड़भाड़ का आलम रहा। ट्रेनों की छतों पर बैठकर भी लोग यात्रा करते देखे गए।
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भैया दौज के साथ दीपावली पर्व का समापन हो गया। त्योहार को मनाने के लिए घर पर आए नौकरीपैशा लोग अब लौटने लगे। नगरीय और कसबाई इलाकों के बड़ी संख्या में लोग बाहरी राज्यों और जनपदों में रोजीरोटी कमाने के लिए काम करते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दिल्ली में काम करने वालों की होती हैं। इसके चलते दिल्ली के रूट पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया। रोडवेज द्वारा इसके लिए पहले से तैयारियां कर ली गईं थीं। रोडवेज द्वारा अधिकतर बसें दिल्ली रूट पर लगा दी गईं। अन्य रूटों पर बसों की कमी पड़ गईं। इसके चलते जहां लोकल सवारियां को डग्गेमार वाहनों के सहारे ग्रामीण और कसबाई इलाकों से अपना आवागमन करने को मजबूर होना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर भैया दूज के बाद बहनों के लौटने का क्रम शुरू हुआ तो मार्गों पर यात्रियों की काफी भीड़ नजर आई। यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए भटकते रहे। जैसे ही कोई बस नजर आती वे उसमें स्थान पाने के लिए टूट पड़ते। जुगाड़, टेंपो, ट्रैक्टर और दुपहिया वाहन सहित, जो वाहन मिला उसमें यात्रा करनी पड़ी। यहां तक लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बसों, टेंपो की छतों पर बैठकर भी यात्रा करने से परहेज नहीं किया। इधर, रेलों में भी भीड़भाड़ का आलम रहा। ट्रेनों की छतों पर बैठकर भी लोग यात्रा करते देखे गए।
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