{"_id":"5b1b7bcd4f1c1ba56e8b6fe6","slug":"prerak-tripathi-from-kanpur-is-topper-in-jipmer","type":"story","status":"publish","title_hn":"JIPMER प्रवेश परीक्षा में कानपुर के प्रेरक त्रिपाठी बने टॉपर","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
JIPMER प्रवेश परीक्षा में कानपुर के प्रेरक त्रिपाठी बने टॉपर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 09 Jun 2018 01:20 PM IST
विज्ञापन
प्रेरक त्रिपाठी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
द जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रिसर्च (JIPMER) ने प्रवेश परीक्षा 2018 का परिणाम जारी कर दिया है। कानपुर के प्रेरक त्रिपाठी ने ऑल इंडिया थर्ड रैंक (AIR-3) हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। इसके पहले प्रेरक ने नीट 2018 में ऑल इंडिया 33 रैंक और प्रदेश में दूसरी रैंक पाई थी। बता दें कि यह परीक्षा इस बार 3 जून को देश भर में आयोजित की गई थी।
इससे पहले नीट 2018 में ऑल इंडिया स्तर पर 33वीं रैंक पाकर यूपी के सेकेंड टॉपर बने कानपुर के प्रेरक त्रिपाठी हर किसी के लिए प्रेरणा बन गए थे। रावतपुर के प्रेरक 2016 में उम्र कम होने के चलते नीट की परीक्षा नहीं दे पाए थे। इस बार मौका मिला और पहली बार में ही 33वीं रैंक हासिल कर शहर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमका दिया। प्रेरक बताते हैं कि स्कूल, कोचिंग और सेल्फ स्टडी मिलाकर वह रोजाना 12 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे। शेड्यूल इस तरह बना रखा था कि पढ़ाई के बीच बोरियत न महसूस हो।
उन्होंने 12वीं वर्ष 2017 में मंटोरा पब्लिक स्कूल से 93 प्रतिशत अंकों के साथ पास की जबकि दसवीं में 9.2 सीजीपीए हासिल किए थे। पिता अविनाश चंद्र त्रिपाठी नाबार्ड मध्य प्रदेश के कोआर्डिनेटर हैं। भोपाल में रहते हैं और मां हेमा त्रिपाठी गृहिणी हैं। परिणाम जारी होते ही मां के साथ प्रेरक अपने पिता से मिलने के लिए भोपाल के लिए निकल गए। चार भाई और एक बहन में दूसरे नंबर पर प्रेरक हैं। बड़ी बहन उत्कर्षिता इलाहाबाद से बीफार्मा कर रहीं हैं। छोटा भाई देवांश और बहन सुरचिता 9वीं में हैं।
विज्ञापन
10वीं में ही पढ़ने लगे थे 11वीं की किताब
प्रेरक बताते हैं कि जब वह 10वीं में थे तो उन्हें फिजियोलॉजी पढ़ना अच्छा लगता था। 10वीं की किताब दो माह में पूरी पूरी पढ़ डाली और फिर 11वीं की किताब पढ़नी शुरू कर दी। प्रेरक के मुताबिक इसी से उनमें डॉक्टर बनने की ख्वाहिश आई और 10वीं के बाद कोचिंग स्कॉलरशिप के लिए एग्जाम दिया। आकाश इंस्टीट्यूट से फाउंडेशन कोर्स की तैयारी की और दो साल में सफल हो गए। प्रेरक अपनी सफलता के लिए इंस्टीट्यूट के शिक्षकों को श्रेय देते हैं।
एम्स से करना चाहते हैं पढ़ाई, रिजल्ट का इंतजार
प्रेरक बताते हैं कि वह एम्स दिल्ली से एमबीबीएस करना चाहते हैं। एम्स एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा भी दी है। रिजल्ट का इंतजार है। अगर अच्छी रैंक रही तो वह एम्स में दाखिला ले लेंगे नहीं तो दिल्ली स्थित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करेंगे।
सफलता का मंत्र
- जिस क्षेत्र में रुचि हो उसी की पढ़ाई करनी चाहिए।
- पढ़ाई के साथ सकारात्मक सोच रखें, असफलता से कभी डरें नहीं।
- पाठ्यक्रम को अलग-अलग भाग में विभाजित कर लें और फिर उसकी तैयारी करें।
- कठिन विषय से भागने की बजाय उसे समझने की कोशिश करें।
विज्ञापन
इससे पहले नीट 2018 में ऑल इंडिया स्तर पर 33वीं रैंक पाकर यूपी के सेकेंड टॉपर बने कानपुर के प्रेरक त्रिपाठी हर किसी के लिए प्रेरणा बन गए थे। रावतपुर के प्रेरक 2016 में उम्र कम होने के चलते नीट की परीक्षा नहीं दे पाए थे। इस बार मौका मिला और पहली बार में ही 33वीं रैंक हासिल कर शहर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमका दिया। प्रेरक बताते हैं कि स्कूल, कोचिंग और सेल्फ स्टडी मिलाकर वह रोजाना 12 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे। शेड्यूल इस तरह बना रखा था कि पढ़ाई के बीच बोरियत न महसूस हो।
विज्ञापन
उन्होंने 12वीं वर्ष 2017 में मंटोरा पब्लिक स्कूल से 93 प्रतिशत अंकों के साथ पास की जबकि दसवीं में 9.2 सीजीपीए हासिल किए थे। पिता अविनाश चंद्र त्रिपाठी नाबार्ड मध्य प्रदेश के कोआर्डिनेटर हैं। भोपाल में रहते हैं और मां हेमा त्रिपाठी गृहिणी हैं। परिणाम जारी होते ही मां के साथ प्रेरक अपने पिता से मिलने के लिए भोपाल के लिए निकल गए। चार भाई और एक बहन में दूसरे नंबर पर प्रेरक हैं। बड़ी बहन उत्कर्षिता इलाहाबाद से बीफार्मा कर रहीं हैं। छोटा भाई देवांश और बहन सुरचिता 9वीं में हैं।
विज्ञापन
10वीं में ही पढ़ने लगे थे 11वीं की किताब
प्रेरक बताते हैं कि जब वह 10वीं में थे तो उन्हें फिजियोलॉजी पढ़ना अच्छा लगता था। 10वीं की किताब दो माह में पूरी पूरी पढ़ डाली और फिर 11वीं की किताब पढ़नी शुरू कर दी। प्रेरक के मुताबिक इसी से उनमें डॉक्टर बनने की ख्वाहिश आई और 10वीं के बाद कोचिंग स्कॉलरशिप के लिए एग्जाम दिया। आकाश इंस्टीट्यूट से फाउंडेशन कोर्स की तैयारी की और दो साल में सफल हो गए। प्रेरक अपनी सफलता के लिए इंस्टीट्यूट के शिक्षकों को श्रेय देते हैं।
एम्स से करना चाहते हैं पढ़ाई, रिजल्ट का इंतजार
प्रेरक बताते हैं कि वह एम्स दिल्ली से एमबीबीएस करना चाहते हैं। एम्स एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा भी दी है। रिजल्ट का इंतजार है। अगर अच्छी रैंक रही तो वह एम्स में दाखिला ले लेंगे नहीं तो दिल्ली स्थित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करेंगे।
सफलता का मंत्र
- जिस क्षेत्र में रुचि हो उसी की पढ़ाई करनी चाहिए।
- पढ़ाई के साथ सकारात्मक सोच रखें, असफलता से कभी डरें नहीं।
- पाठ्यक्रम को अलग-अलग भाग में विभाजित कर लें और फिर उसकी तैयारी करें।
- कठिन विषय से भागने की बजाय उसे समझने की कोशिश करें।
कमेंट
कमेंट X