फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Consumer Forum will give you compensation

उपभोक्ता फोरम दिलाएगा आपको हर्जाना

Tue, 15 Mar 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई Updated Tue, 15 Mar 2016 12:52 AM IST
विज्ञापन
Consumer Forum will give you compensation
जिला उपभोक्ता फोरम - फोटो : अमर उजाला

हरदोई। ग्राहक जागरूक है तो उसको अधिकार दिलाने के लिए उपभोक्ता फोरम भी साथ है। विश्व उपभोक्ता दिवस पर मंगलवार को गोष्ठी आदि का आयोजन कर उपभोक्ताओं को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। जागरूक ग्राहक किसी उत्पाद की बिक्री के बाद उससे असंतुष्ट है और अपना मूल्य हर्जाने के तौर पर वसूलना चाहता है तो उपभोक्ता फोरम पूरा साथ देता है। जिले में कई ऐसे उदाहरण हैं जिनमें लोगाें को न्याय मिला और दूसरों के लिए वह प्रेरणास्रोत बन गए।

विज्ञापन


जिले में करीब वर्ष 1990 से उपभोक्ता फोरम अदालत कार्य कर रही हैं। करीब 16 हजार से अधिक वाद फोरम में दर्ज हो चुके हैं। बीते कुछ वर्षों में लोगों ने जागरूक होकर उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर अपने अधिकारों को प्राप्त किया है। अन्य अदालतों की अपेक्षा अभी भी फोरम में दायर होने वाले वादों की संख्या काफी कम है। लोगों को सेवाएं प्रदान करने वाली संस्थाएं जैसे बीमा, अस्पताल, यातायात, विद्युत गृह निर्माण, मनोरंजन, वित्त एवं बैंक व अन्य व्यापार से जुड़ी संस्थाएं उपभोक्ता की श्रेणी में आ रही हैं। इस संबंध में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष बीपी शुक्ल ने बताया कि जिला उपभोक्ता फोरम के गठन के बाद से साल दर साल लोगों में जागरूकता आई है।
विज्ञापन


यह हैं उपभोक्ता के अधिकार
. त्रुटिपूर्ण माल अथवा सेवाओं में नुकसान से सुरक्षा का अधिकार
. खरीदे माल अथवा प्राप्त सेवाओं के संबंध में सूचना का अधिकार
. अनेक सेवाओं एवं माल में से चयन का अधिकार
. खरीदे त्रुटिपूर्ण माल या प्रदत्त त्रुटिपूर्ण सेवा के विषय में सुने जाने का अधिकार
. अनुतोष प्राप्त करने का तथा उपभोक्ता शिक्षण का अधिकार

इंसेट
फोरम के जानकार अधिवक्ता नीरज नयन निगम व बीमा कंपनी से जुड़े अधिवक्ता पीके जैन ने बताया कि वाद दायर करने वालों के तथ्य यदि यही हैं तो उसे लाभ देने के लिए आदेश दिया जा सकता है। न्यायालय विपक्षी पक्षकार को भुगतान की गई कीमत को लौटाने का निर्देश कर सकता है। यही नहीं न्यायालय अनुचित व्यापार व्यवहार को समाप्त किए जाने का निर्देश भी दे सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
क्या है न्याय शुल्क

. एक रुपये से एक लाख तक के दावे पर देना होता है 100 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट
. एक लाख से पांच लाख के लिए 200 रुपये
. पांच से 10 लाख के लिए 400 रुपये
. 10 से 20 लाख के लिए 500 रुपये
विश्व उपभोक्ता दिवस की खबर का जोड़ .....

फोरम ने दिलाई थी 31 हजार 500 की क्षति
हरदोई। शहर के  लखनऊ रोड निवासी अवध किशोर खरे ने शहर के सिविल लाइंस स्थित एक इलेक्ट्रानिक्स की दुकान से एक एसी खरीदा था। एसी पर एक वर्ष की वारंटी और कंप्रेशर के लिए चार वर्ष की वारंटी विक्रय के साथ दी गई थी। लेकिन समय से पहले ही एसी खराब हुआ। कंपनी ने जब एसी नहीं बदला तो फोरम की मदद से दुकानदार को फिर उसका मूल्य 31500 रूपए मय ब्याज व खर्चे सहित अदा करना पड़ा।

रेलवे महाप्रबंधक को अदा करना पड़ा था हर्जाना
हरदोई। स्टेशन रोड निवासी छाया शर्मा ने उपभोक्ता फ ोरम के समक्ष उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक समेत अन्य के खिलाफ परिवाद दायर किया उन्होंने आरोप लगाया था कि अपने निजी कार्य के चलते दिल्ली अक्सर जाना आना जाना पड़ता है। उन्हाेंने काशी विश्वनाथ ट्रेन से वातानुकूलित कोच में नई दिल्ली से हरदोई तक के लिए वरिष्ठ नागरिक के रूप में सीट बुक कराई और यात्रा शुरू की। जिस समय परिवादिनी ने ट्रेन में यात्रा शुरू की थी वह बिल्कुल ठीक थी। रात्रि में परिवादिनी जब अपनी बर्थ पर सोने लगी तो उसने पीठ में खुजली महसूस की काफी प्रयास के बावजूद उसे नींद नहीं आई। उसने देखा कि बर्थ पर तमाम खटमल एवं कीड़े मौजूद थे। जिनके काटने से उसे असहनीय पीड़ा हुईजिला उपभोक्ता फ ोरम ने मामले की सुनवाई कर उत्तर रेलवे महाप्रबंधक को आदेश दिया कि यह सेवा में कमी का मामला है जिसके लिए रेलवे परिवादिनी को क्षतिपूर्ति के लिए दस हजार रुपये एवं वाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये अदा करें।


फोरम ने दिया जब आदेश तब मिला न्याय
हरदोई। बिलग्राम चुंगी निवासी राजीव कुमार सिंह के पिता राजेंद्र पाल सिंह ने भारतीय जीवन बीमा निगम से एक पालिसी ली थी। बीमा कराते समय वह पूर्ण स्वस्थ्य थे व उन्होंने पालिसी की किश्तों का नियमित भुगतान भी किया। राजेंद्र पाल की मृत्यु हो गई। जब परिजनों ने बीमा कंपनी से पालिसी के क्लेम की धनराशि एक लाख रुपये की मांग की तो कंपनी की ओर से इस तर्क के साथ उन्हे बीमा धनराशि देने से इंकार कर दिया गया फोरम ने सुनवाई करने के बाद एलआईसी को आदेश दिया कि धन की धनराशि एक लाख रुपये का भुगतान छह प्रतिशत ब्याज की दर से करें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed