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किसानों की समस्याओं का अब ऑनलाइन होगा निपटारा
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:18 AM IST
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- फोटो : getty images
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फसल में रोग लग गया हो या फिर कीट चट कर रहे हों, किसान परेशान न हों। अपनी फसल की स्थिति के बारे में ऑनलाइन समस्या दर्ज कराएं। घर पर स्मार्ट फोन हो तो फसल की फोटो भी पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं।
शिकायत दर्ज कराने के 48 घंटे के अंदर विशेषज्ञ अधिकारी आपके खेत पर होंगे और किसान को बताएंगे कि कौन सी दवाएं कितनी मात्रा में डाली जाए। यदि किसान के पास स्मार्ट फोन नहीं है तो वह साधारण फोन से एसएमएस कर अपने फसल के रोग और निदान के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में अत्यधिक मात्रा में रसायनिक उर्वरक व कीटनाशी दवाओं का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। अमूमन किसान पेस्टीसाइड की बिक्री करने वालों से ही पूछकर खेतों में रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। यही वजह है कि पेस्टीसाइड की खपत में इजाफा हो रहा है।
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फसलों को गुणवत्तायुक्त बनाने और कम मात्रा में रसायनों की खपत हो इसके लिए प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन ने सहभागी फसल निगरानी निदान प्रणाली के तहत यूपी एग्रीकल्चर एनआईसी इन पोर्टल विकसित किया है।
इस पोर्टल पर किसान कहीं से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए किसान को अपना नाम-पता और फसल में लगे रोग को दर्ज करना होगा। यदि किसान को समझ में नहीं आ रहा है कि कौन सा रोग लगा है, तो फसल में लगे रोग का लक्षण दर्ज करें।
और तो और यदि किसान के पास स्मार्ट फोन हो तो वह अपनी फसल का फोटो खींचकर पोर्टल पर डाल सकते हैं। पोर्टल पर समस्या दर्ज होते ही कृषि भवन लखनऊ से उसे जिले के जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय में मैसेज भेज दिया जाएगा।
फिर जिला कृषि रक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह 48 घंटे के अंदर किसानों की समस्याओं का निस्तारण करें। जरूरत पड़ने पर किसान के खेत पर जाएं। जिन किसानों के पास स्मार्ट फोन नहीं है वह किसान साधारण फोन से 9452247111 या फिर 9452257111 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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शिकायत दर्ज कराने के 48 घंटे के अंदर विशेषज्ञ अधिकारी आपके खेत पर होंगे और किसान को बताएंगे कि कौन सी दवाएं कितनी मात्रा में डाली जाए। यदि किसान के पास स्मार्ट फोन नहीं है तो वह साधारण फोन से एसएमएस कर अपने फसल के रोग और निदान के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
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कृषि क्षेत्र में अत्यधिक मात्रा में रसायनिक उर्वरक व कीटनाशी दवाओं का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। अमूमन किसान पेस्टीसाइड की बिक्री करने वालों से ही पूछकर खेतों में रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। यही वजह है कि पेस्टीसाइड की खपत में इजाफा हो रहा है।
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फसलों को गुणवत्तायुक्त बनाने और कम मात्रा में रसायनों की खपत हो इसके लिए प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन ने सहभागी फसल निगरानी निदान प्रणाली के तहत यूपी एग्रीकल्चर एनआईसी इन पोर्टल विकसित किया है।
इस पोर्टल पर किसान कहीं से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए किसान को अपना नाम-पता और फसल में लगे रोग को दर्ज करना होगा। यदि किसान को समझ में नहीं आ रहा है कि कौन सा रोग लगा है, तो फसल में लगे रोग का लक्षण दर्ज करें।
और तो और यदि किसान के पास स्मार्ट फोन हो तो वह अपनी फसल का फोटो खींचकर पोर्टल पर डाल सकते हैं। पोर्टल पर समस्या दर्ज होते ही कृषि भवन लखनऊ से उसे जिले के जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय में मैसेज भेज दिया जाएगा।
फिर जिला कृषि रक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह 48 घंटे के अंदर किसानों की समस्याओं का निस्तारण करें। जरूरत पड़ने पर किसान के खेत पर जाएं। जिन किसानों के पास स्मार्ट फोन नहीं है वह किसान साधारण फोन से 9452247111 या फिर 9452257111 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।