{"_id":"6268384fc8d6610709681a46","slug":"waiting-for-orders-from-the-management-of-shrines-faizabad-news-lko62797100","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्मस्थलों के प्रबंधतंत्र को आदेश का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्मस्थलों के प्रबंधतंत्र को आदेश का इंतजार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। लाउड स्पीकर विवाद के बीच उत्तरप्रदेश सरकार ने यूपी में धर्मस्थलों पर लगे लाउडस्पीकर को हटाने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया है। धर्मस्थलों पर लगे अवैध लाउडस्पीकर हटाए जाएंगे, इसको लेकर धर्मगुरुओं से संवाद किया जाएगा।
इस बीच रामनगरी अयोध्या के कई धार्मिक स्थलों पर अभी भी लाउडस्पीकर टंगें हैं तो कुछ ने आवाज धीमी कर दी है। जबकि अधिकांश उपासना स्थलों के प्रबंधतंत्र को अभी आदेश का इंतजार है।
धर्मगुरुओं का कहना है कि जो सरकार का आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। इन दिनों उपासना स्थल पर लाउडस्पीकर चर्चा में हैं। विभिन्न शहरों में लाउडस्पीकर पर अजान और हनुमान चालीसा को लेकर बहस चल रही है।
विज्ञापन
इसी बीच अयोध्या के कई मंदिरों ने स्पीकर की आवाज धीमी कर ली है। वहीं कुछ मंदिर-मस्जिदों में अभी भी लाउडस्पीकर बज रहे हैं। इन पूजा-इबादत स्थलों के प्रबंधतंत्र का कहना है कि वे लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नियमों के दायरे में रहकर कर रहे हैं।
उन्हें शासन-प्रशासन से लाउडस्पीकर हटाने का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। सरकार का आदेश होगा तो निश्चित रूप से उसका पालन किया जाएगा। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ कनक भवन में पहले से ही लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाता है।
वहीं दशरथमहल में लाउडस्पीकर की आवाज इतनी धीमी कर दी गई है कि आवाज परिसर से बाहर न जाए। इसी तरह रामनगरी के अन्य कई मंदिरों ने भी सरकार के आदेश के अनुपालन में अपने-अपने मंदिरों में लगे वाद्ययंत्रों की आवाज धीमी कर ली है।
वहीं शहर के प्रमुख मस्जिदों में शामिल मोती मस्जिद, चौक के वक्फ मस्जिद हसन रजा खां, शिया जामा मस्जिद व इमामबाड़ा जवाहर अली खां मस्जिद में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल हो रहा है, यहां के प्रबंधतंत्र का कहना है कि कोई आदेश नहीं मिला है, सरकार का जो आदेश होगा उसे माना जाएगा।
हनुमानगढ़ी में लाउडस्पीकर पर रामधुन ब्रह्ममुहुर्त से ही बजने लगती है। यह प्राचीन व्यवस्था है। हनुमानगढ़ी की परंपरा अन्य मंदिरों से अलग है। यहां जो भी निर्णय होता है वह पंचान अखाड़े लेते हैं। प्रशासन को पंचों से वार्ता करना चाहिए, सरकार का जो निर्देश होगा उसका पालन करेंगे।-रमेश दास, पुजारी हनुमानगढ़ी
लाउडस्पीकर बजाने के जो नियम निर्धारित हैं उनका पालन रामनगरी के मंदिरों में पहले से ही किया जा रहा है। सरकार का जो आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। सुझाव है कि प्रशासन को धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर उनकी राय लेकर आदेश का अनुपालन कराना चाहिए। -महंत रामदास, नाका हनुमानगढ़ी
मस्जिद में लाउडस्पीकर 2019 से ही लगा है। इसके लिए प्रशासन से आदेश लिया गया था। आवाज पहले से ही धीमी रखी गई है। अभी हमें लाउडस्पीकर हटाने के लिए कोई आ नहीं मिला है, जो सरकार का आदेश होगा निश्चित रूप से उसका पालन किया जाएगा, हमें कोई एतराज नहीं है।- डॉ.मिर्जा शहाब, अध्यक्ष, कमेटी मोती मस्जिद
हमने लाउडस्पीकर बजाने के लिए जो नियम हैं उसका पालन हमेशा किया है। इसके लिए प्रशासन से अनुमति भी ली गई है। फिलहाल लाउडस्पीकर की आवाज को धीमा कर लिया गया है जो मानक निर्धारित हैं उसका पालन किया जाता है,शासन का जो आदेश होगा उसको माना जाएगा। -जाकिर हुसैन, अध्यक्ष वक्फ मस्जिद हसन रजा खां
मुस्लिम पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने प्रदेश के जितने भी मस्जिद के इमाम हैं उनसे अपील की है अपने-अपने लाउड स्पीकर की आवाज धीमी कर दें, क्योंकि अजान की जो आवाज है नमाजियों के कान में वह खुद ही पहुंच जाती है। इकबाल अंसारी ने कहा कि जिनको नमाज पढ़नी है वह लाउड स्पीकर के सहारे नहीं रहते हैं। उनके कानों में आवाज अपने आप पहुंच जाती है। इसलिए अजान के समय लाडड स्पीकर बजाने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
इस बीच रामनगरी अयोध्या के कई धार्मिक स्थलों पर अभी भी लाउडस्पीकर टंगें हैं तो कुछ ने आवाज धीमी कर दी है। जबकि अधिकांश उपासना स्थलों के प्रबंधतंत्र को अभी आदेश का इंतजार है।
विज्ञापन
धर्मगुरुओं का कहना है कि जो सरकार का आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। इन दिनों उपासना स्थल पर लाउडस्पीकर चर्चा में हैं। विभिन्न शहरों में लाउडस्पीकर पर अजान और हनुमान चालीसा को लेकर बहस चल रही है।
विज्ञापन
इसी बीच अयोध्या के कई मंदिरों ने स्पीकर की आवाज धीमी कर ली है। वहीं कुछ मंदिर-मस्जिदों में अभी भी लाउडस्पीकर बज रहे हैं। इन पूजा-इबादत स्थलों के प्रबंधतंत्र का कहना है कि वे लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नियमों के दायरे में रहकर कर रहे हैं।
उन्हें शासन-प्रशासन से लाउडस्पीकर हटाने का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। सरकार का आदेश होगा तो निश्चित रूप से उसका पालन किया जाएगा। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ कनक भवन में पहले से ही लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाता है।
वहीं दशरथमहल में लाउडस्पीकर की आवाज इतनी धीमी कर दी गई है कि आवाज परिसर से बाहर न जाए। इसी तरह रामनगरी के अन्य कई मंदिरों ने भी सरकार के आदेश के अनुपालन में अपने-अपने मंदिरों में लगे वाद्ययंत्रों की आवाज धीमी कर ली है।
वहीं शहर के प्रमुख मस्जिदों में शामिल मोती मस्जिद, चौक के वक्फ मस्जिद हसन रजा खां, शिया जामा मस्जिद व इमामबाड़ा जवाहर अली खां मस्जिद में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल हो रहा है, यहां के प्रबंधतंत्र का कहना है कि कोई आदेश नहीं मिला है, सरकार का जो आदेश होगा उसे माना जाएगा।
हनुमानगढ़ी में लाउडस्पीकर पर रामधुन ब्रह्ममुहुर्त से ही बजने लगती है। यह प्राचीन व्यवस्था है। हनुमानगढ़ी की परंपरा अन्य मंदिरों से अलग है। यहां जो भी निर्णय होता है वह पंचान अखाड़े लेते हैं। प्रशासन को पंचों से वार्ता करना चाहिए, सरकार का जो निर्देश होगा उसका पालन करेंगे।-रमेश दास, पुजारी हनुमानगढ़ी
लाउडस्पीकर बजाने के जो नियम निर्धारित हैं उनका पालन रामनगरी के मंदिरों में पहले से ही किया जा रहा है। सरकार का जो आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। सुझाव है कि प्रशासन को धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर उनकी राय लेकर आदेश का अनुपालन कराना चाहिए। -महंत रामदास, नाका हनुमानगढ़ी
मस्जिद में लाउडस्पीकर 2019 से ही लगा है। इसके लिए प्रशासन से आदेश लिया गया था। आवाज पहले से ही धीमी रखी गई है। अभी हमें लाउडस्पीकर हटाने के लिए कोई आ नहीं मिला है, जो सरकार का आदेश होगा निश्चित रूप से उसका पालन किया जाएगा, हमें कोई एतराज नहीं है।- डॉ.मिर्जा शहाब, अध्यक्ष, कमेटी मोती मस्जिद
हमने लाउडस्पीकर बजाने के लिए जो नियम हैं उसका पालन हमेशा किया है। इसके लिए प्रशासन से अनुमति भी ली गई है। फिलहाल लाउडस्पीकर की आवाज को धीमा कर लिया गया है जो मानक निर्धारित हैं उसका पालन किया जाता है,शासन का जो आदेश होगा उसको माना जाएगा। -जाकिर हुसैन, अध्यक्ष वक्फ मस्जिद हसन रजा खां
मुस्लिम पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने प्रदेश के जितने भी मस्जिद के इमाम हैं उनसे अपील की है अपने-अपने लाउड स्पीकर की आवाज धीमी कर दें, क्योंकि अजान की जो आवाज है नमाजियों के कान में वह खुद ही पहुंच जाती है। इकबाल अंसारी ने कहा कि जिनको नमाज पढ़नी है वह लाउड स्पीकर के सहारे नहीं रहते हैं। उनके कानों में आवाज अपने आप पहुंच जाती है। इसलिए अजान के समय लाडड स्पीकर बजाने की जरूरत नहीं है।