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मणिपर्वत पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में

Wed, 31 Jul 2019 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jul 2019 10:45 PM IST
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threat to Security of devotees
मणि पर्वत के प्रवेश द्वार पर की गई बैरीकेडिंग। - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। मणिपर्वत पर लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में है। मंदिर का भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। दीवारों पर दरारें पड़ चुकी हैं।
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वहीं पुरातत्व विभाग ने चेतावनी बोर्ड लगाकर किनारा कर लिया है। महानिदेशक को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार अतिक्रमण से पुरातात्विक मणिपर्वत का संरक्षण संभव नहीं है।
अतिक्रमणकारियों को नोटिस देने व जिला प्रशासन से कार्रवाई का आग्रह करने का कोई असर नहीं है। सवाल उठता है कि तीन अगस्त को सावन झूला मेले में यहां उमड़ने वाली लाखों की भीड़ यदि हादसे का शिकार होती है तो जिम्मेदार कौन होगा।
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रामनगरी में सावन झूलनोत्सव का श्रीगणेश तीन अगस्त को मणिपर्वत मेले के साथ होगा। इस मेले में लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य सीता राम को झूला झुलाने के लिए मणिपर्वत मेले में उमड़ते हैं।
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मणिपर्वत पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित होने के बावजूद कोई कार्य मौके पर नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर पुरातत्व विभाग ने जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है।
भारतीय पुरातत्व विभाग के उपमंडल अधिकारी डीके जायसवाल कहते हैं कि मणिपर्वत का मुख्य मंदिर जो टीले पर है उतना ही संरक्षित है जहां भगवान विराजमान हैं। शेष जो बनाया गया है वह अवैध निर्माण है। लगातार निर्माण होता जा रहा है जिससे दवाब बढ़ रहा है मणिपर्वत पर कभी भी हादसा हो सकता है।
संरक्षित मणिपर्वत के पास किए गए अतिक्रमण को हटवाने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। एएसआई के पास कोई अपनी फोर्स नहीं हैं।
अवैध निर्माण की शिकायत भी समय-समय पर प्रशासन से की जाती है लेकिन पुलिस ने अवैध कब्जों को हटवाने को लेकर कोई एक्शन नहीं लिया है। नियम के मुताबिक संरक्षित इमारतों और स्थलों के सौ मीटर के दायरे में कोई नया निर्माण नहीं करवाया जा सकता है।
जब तक अवैध अतिक्रमण नहीं हटाए जाते तब तक मणिपर्वत के संरक्षण की योजना नहीं बन सकती। बताया कि इसकी रिपोर्ट महानिदेशक नई दिल्ली को भी भेजी गई है, साथ एहतियात बरतने के लिए खतरे का नोटिस बोर्ड भी लगाया गया है।

वहीं, मंदिर प्रशासन का कहना है कि हम कोई निर्माण कराना चाहते हैं तो पुरातत्व विभाग रोक लगा देता है। मणिपर्वत का भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है, मेले में करीब पांच लाख श्रद्धालु आते हैं ऐसे में भीड़ का दबाव बढ़ने पर हादसे का खतरा बढ़ जाता है बावजूद इसके प्रशासन कुछ नहीं कर रहा।
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