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Flood in Ayodhya: फटिकशिला सहित 10 आश्रम बाढ़ से घिरे, मंदिर में रह रहे 40 संतों को उठानी पड़ रहीं दुश्वारियां

Wed, 21 Sep 2022 04:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 21 Sep 2022 04:44 PM IST
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Ten ashrams including Phatikshila temple surrounded by flood water
अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद फटिकशिला आश्रम में भरा पानी। - फोटो : amar ujala

पहाड़ों पर भारी बारिश व शारदा और गिरिजा बैराजों से छोड़ गए चार लाख क्यूसेक पानी से उफनाई सरयू नदी कहर बरपा रही है। बाढ़ के पानी ने मंगलवार को रामनगरी के शहरी इलाकों में दस्तक दे दी है। जिससे रामघाट हाल्ट के पीछे का इलाका जलमग्न हो गया है। यहां स्थित प्राचीन फटिकशिला मंदिर सहित मधुकरिया संतों के करीब 10 आश्रम भी पानी से घिर गए हैं।

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फटिकशला मंदिर की गोशाला पानी में डूब गई है। फैजाबाद शहर के गुप्तारघाट के निर्मली कुंड तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। बाढ़ के पानी के चलते फटिकशिला में रहने वाले करीब 40 नाम जापक संतों की दुश्वारियां भी बढ़ गई हैं। सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार को खतरे के निशान से 49 सेमी. ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया है। उधर रुदौली, सोहावल व सदर तहसील के करीब 20 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। लक्ष्मणघाट परिक्रमा मार्ग भी लबालब है। सरयू तट का आरती घाट भी पानी में डूब गया है। रामघाट हाल्ट स्टेशन के पीछे का इलाका बाढ़ के पानी से घिर गया है। वहीं संत तुलसीदास घाट स्थित श्मशान घाट की कई दुकानें पानी में डूब गई हैं। दुकानदारों की हजारों की लकड़ियां पानी में बह गई।
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जिससे उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गुप्तारघाट के आसपास भी दुकानदारों की दुकानें पानी में समाहित हो चुकी हैं। निर्मली कुंड की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। गुमनामी बाबा की समाधिस्थल तक पानी पहुंच चुका है।
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केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के मुताबिक मंगलवार शाम सरयू का जलस्तर 93.26 मीटर रिकॉर्ड हुआ है। जो कि खतरे के निशान 92.73 मीटर से 49 सेमी. ऊपर है। हालांकि राहत की खबर यह है कि सरयू के जलस्तर में वृद्धि का क्रम फिलहाल थम गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व महेंद्र सिंह ने बताया कि बाढ़ को लेकर अलर्ट घोषित किया गया है। 24 घंटे बाढ़ की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावितों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

अंतिम संस्कार को लग रही लंबी लाइन
बाढ़ के पानी के चलते सरयू तट का श्मशान घाट भी डूब गया है। मजबूरन लोग बैकुंठ धाम पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं, लेकिन यह स्थल भी पानी से घिर गया है। वाहन दूर खड़ाकर पैदल ही लोगों को यहां तक आना पड़ रहा है। लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कराने वाले रितेश दास बताते हैं कि प्रतिदिन 30 से 40 शव पहुंच रहे हैं। वैकुंठ धाम पर अंत्येष्टि के लिए लोगों को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। बताया कि करीब छह दुकानदारों की सैकड़ों क्विंटल लकड़ियां व पूजन सामग्री बाढ़ में बह गई है।

बाढ़ पीड़ितों ने डीएम को बताई समस्याएं
जिला अधिकारी नितीश कुमार मंगलवार को रुदौली क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा करने पहुंचे। बाढ़ पीड़ितों ने उनके सामने समस्याओं की झड़ी लगा दी। दोपहर 2 बजे महंगू का पुरवा गांव पहुँचे जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनने के बाद उपजिलाधिकारी रुदौली को निराकरण के निर्देश दिए। वहीं, पूरा बाजार के मूड़ाडीहा गांव में एसडीएम सदर ने एनडीआरएफ टीम के साथ बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा किया।

जिलाधिकारी ने गांव कैथी व महंगू का पुरवा का निरीक्षण किया। यहां अधिकतर ग्रामीणों ने धान की फसल डूबने व मवेशियों के चारे की समस्या की शिकायत की। कैथी माझा निवासी शिव कुमार ने गांव आने-जाने के लिए प्रशासन से नाव की व्यवस्था कराने व बारिश से राहत के लिए पन्नी उपलब्ध कराने की मांग की। जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।

महंगू का पुरवा निवासी राज कमल यादव ने कहा कि हमारे गांव मजरा मरौचा मांझा हैं। जहां दो दर्जन लोग अपनी मवेशियों को रखे हुए हैं। नाव न होने के कारण वह रोजाना होने वाला करीब 500 क्विंटल दूध बेचने के लिए नहीं ले जा पा रहे हैं।
महंगू का पुरवा निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राघवेंद्र यादव ने रौनाही तटबंध से अख्तियारपुर संपर्क मार्ग की दुर्दशा को लेकर बाढ़ पीड़ितों को आवागमन में होने वाली समस्याओं से अवगत कराया। इस मौके पर उपजिलाधिकारी रुदौली स्वप्निल यादव समेत राजस्व व पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। बाढ़ की चपेट में आने वाले मांझा कला के निवासियों की शरण स्थली सहाराबाग बाढ़ चौकी पर भी डीएम पहुंचे।

यहां उनकी निगरानी में मसौधा से आए पशु चिकित्सकों ने मवेशियों के स्वास्थ्य की जांच की। एसडीएम सोहावल मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस दौरान 90 बाढ़ पीड़ितों को रहने के तिरपाल, 10-10 किलो आटा, चावल, दो किलो दाल, मसाला, गुड़, बिस्किट, रिफाइंड तेल, मोमबत्ती, माचिस, साबुन आदि वितरित करवाया। जिलाधिकारी ने पहले से दी गई आवश्यक सुविधाओं की जांच पड़ताल की। सरयू नदी में आई बाढ़ के चलते अपने घर को छोड़कर दूसरे स्थानों पर शरण लिए लोगों को समय पर खाना पानी नहीं मिल रहा है। शौचालय की भी उचित व्यवस्था न होने से बाढ़ पीड़ितों की परेशानी बढ़ गई है। बाढ़ ग्रस्त गांव मूडाडीहा ,उरदाहवा, पिपरी संग्राम, पूरे चेतन गांव केे करीब 150 परिवार पॉलीथिन में जीवन यापन कर रहे हैं।


उरदाहवा निवासी अमरजीत यादव का कहना हैै कि बाढ़ आने से उनका घर पानी से गिर गया है। हम किसी तरह पूरा परिवार लेकर ऊंचे स्थान पर जिंदगी बिता रहे हैं। मूड़ाडीहा निवासी भगौवती, बिहारी, जय राम, राम प्रसाद , त्रिलोकी यादव का कहना है कि अभी तक प्रशासन की तरफ से कुछ भी सहायता नहीं मिली है। अगर दो चार लीटर मिट्टी का तेल मिल जाता तो कम सेेेे कम भोजन की व्यवस्था हो जाती। तो वही उरदाहवा निवासी राजेंद्र यादव ने बताया कि घर में पानी भर जाने से ग्राम सचिवालय में शरण ली है। एसडीएम सदर रामकुमार शुक्ला ने एनडीआरएफ की टीम के साथ मंगलवार को पूरा के बाढ़ग्रस्त गांव मूड़ाडीहा के मजरे पूरे चेतन, पिपरी संग्राम, माझा सलेमपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जहां अधिक पानी भरा है। उस इलाके के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा। उन्होंने इसके लिए लेखपाल से नाव उपलब्ध कराने को कहा। मौके पर क्षेत्रीय लेखपाल सौरभ पांडेय, मूड़ाडीहा प्रधान गया प्रसाद याव, बीडीसी सुरेंद्र यादव समेत अन्य मौजूद रहे।

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