{"_id":"651b11b64f0708e7500b0e84","slug":"sriram-stambh-arrived-faizabad-news-c-97-1-ayo1002-3501-2023-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: पितृपक्ष के बाद मणिपर्वत पर स्थापित होगा श्रीराम स्तंभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: पितृपक्ष के बाद मणिपर्वत पर स्थापित होगा श्रीराम स्तंभ
Tue, 03 Oct 2023 12:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 03 Oct 2023 12:26 AM IST
विज्ञापन
श्रीराम स्तंभ का कारसेवकपुरम में किया गया पूजन।
अयोध्या। राजस्थान के माउंटआबू से अयोध्या के लिए निकला श्रीराम स्तंभ 36 घंटे में 1222 किलोमीटर की दूरी तय कर सोमवार सुबह 10 बजे अयोध्या पहुंचा। श्रीराम स्तंभ का कारसेवकपुरम में वैदिक आचार्यों ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। अशोक सिंहल फाउंडेशन के सौजन्य से श्रीराम वनगमन स्थल के 290 स्थानों पर श्रीराम स्तंभ लगाए जाने की योजना है। पहला स्तंभ पितृपक्ष के बाद अयोध्या के मणिपर्वत पर स्थापित किया जाएगा।
श्रीराम स्तंभ शनिवार सुबह 11 बजे राजस्थान से ट्रक से रवाना हुआ था। जगह-जगह स्वागत के चलते इसे अयोध्या पहुंचने में 36 घंटे लग गए। हालांकि श्रीराम स्तंभ स्थापना की योजना में कुछ बदलाव किया गया है। अशोक सिंहल फाउंडेशन के सदस्य मनाेज तिवारी ने बताया कि अभी चूंकि पितृपक्ष चल रहा है और इस दौरान शुभ कार्यों का निषेध होता है, ऐसे में इस स्तंभ को पितृपक्ष के बाद स्थापित किया जाएगा। तब तक इसे अस्थायी रूप से कारसेवकपुरम में ही स्थापित किया जा रहा है।
बताया कि आचार्य श्रीराम अवतार शर्मा ने राम वनगमन मार्गाें पर करीब 40 साल तक शोध किया। गूगल मैप के जरिए चिन्हित किए गए वन गमन के 290 स्थलों पर श्रीराम स्तंभ स्थापित किए जाने की योजना है। इससे नई पीढ़ी को श्रीराम की वन यात्रा के पड़ाव स्थलों की जानकारी हो सकेगी। साथ ही इन स्थलों को नई पहचान मिलेगी और यहां पर्यटन की भी संभावनाएं बढ़ेंगी। पहला स्तंभ मणिपर्वत पर स्थापित किया जाएगा। मणिपर्वत पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इमारत है। मणिपर्वत का जो इतिहास रूद्रयामल में बताया गया है, उसके तहत जनकपुर से आई मणियों के पहाड़ से यह पर्वत निर्मित हुआ है। यहां हर साल सावन में बड़ा मेला लगता है।
विज्ञापन
1000 साल तक सुरक्षित रहेगा श्रीराम स्तंभ
सैंड स्टोन यानी बलुआ पत्थर की खासियत स्टेबिलिटी और जबरदस्त बाइंडिंग है। माना जाता है कि इसकी आयु करीब एक हजार साल है। मजबूती और सुंदरता के साथ ही अन्य पत्थरों के मुकाबले इसमें अधिक भार सहने की क्षमता और आसानी से महीन पच्चीकारी और गढ़ाई की विशेषता है। श्रीराम स्तंभ भी इसी पत्थर से निर्मित है, जो मौसम की मार से सुरक्षित रहेगा। इसके लिए पत्थर पर विशेष कोटिंग की गई है। इसलिए संसद भवन, इंडिया गेट, अक्षरधाम और इस्कान के अधिकांश मंदिरों में भी यही पत्थर लगा है। राममंदिर में भी इन्हीं पत्थरों का प्रयोग किया जा रहा है। इस पत्थर में रूनी यानी स्टोन कैंसर नहीं होता। बारिश से पत्थर के रंग में निखार आता है।
श्रीराम स्तंभ की खासियत
- ऊंचाई-15 फीट
- चौड़ाई- 2़ 5 फीट
- वजन- 12 टन
- सूर्य, धनुष व शिखर का चिह्न
- बारिश में और निखरेगी पत्थर की चमक
- सैकड़ों सालों तक नहीं जमेगी काई
- आसानी से की जा सकती है नक्काशी।
विज्ञापन
श्रीराम स्तंभ शनिवार सुबह 11 बजे राजस्थान से ट्रक से रवाना हुआ था। जगह-जगह स्वागत के चलते इसे अयोध्या पहुंचने में 36 घंटे लग गए। हालांकि श्रीराम स्तंभ स्थापना की योजना में कुछ बदलाव किया गया है। अशोक सिंहल फाउंडेशन के सदस्य मनाेज तिवारी ने बताया कि अभी चूंकि पितृपक्ष चल रहा है और इस दौरान शुभ कार्यों का निषेध होता है, ऐसे में इस स्तंभ को पितृपक्ष के बाद स्थापित किया जाएगा। तब तक इसे अस्थायी रूप से कारसेवकपुरम में ही स्थापित किया जा रहा है।
विज्ञापन
बताया कि आचार्य श्रीराम अवतार शर्मा ने राम वनगमन मार्गाें पर करीब 40 साल तक शोध किया। गूगल मैप के जरिए चिन्हित किए गए वन गमन के 290 स्थलों पर श्रीराम स्तंभ स्थापित किए जाने की योजना है। इससे नई पीढ़ी को श्रीराम की वन यात्रा के पड़ाव स्थलों की जानकारी हो सकेगी। साथ ही इन स्थलों को नई पहचान मिलेगी और यहां पर्यटन की भी संभावनाएं बढ़ेंगी। पहला स्तंभ मणिपर्वत पर स्थापित किया जाएगा। मणिपर्वत पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इमारत है। मणिपर्वत का जो इतिहास रूद्रयामल में बताया गया है, उसके तहत जनकपुर से आई मणियों के पहाड़ से यह पर्वत निर्मित हुआ है। यहां हर साल सावन में बड़ा मेला लगता है।
विज्ञापन
1000 साल तक सुरक्षित रहेगा श्रीराम स्तंभ
सैंड स्टोन यानी बलुआ पत्थर की खासियत स्टेबिलिटी और जबरदस्त बाइंडिंग है। माना जाता है कि इसकी आयु करीब एक हजार साल है। मजबूती और सुंदरता के साथ ही अन्य पत्थरों के मुकाबले इसमें अधिक भार सहने की क्षमता और आसानी से महीन पच्चीकारी और गढ़ाई की विशेषता है। श्रीराम स्तंभ भी इसी पत्थर से निर्मित है, जो मौसम की मार से सुरक्षित रहेगा। इसके लिए पत्थर पर विशेष कोटिंग की गई है। इसलिए संसद भवन, इंडिया गेट, अक्षरधाम और इस्कान के अधिकांश मंदिरों में भी यही पत्थर लगा है। राममंदिर में भी इन्हीं पत्थरों का प्रयोग किया जा रहा है। इस पत्थर में रूनी यानी स्टोन कैंसर नहीं होता। बारिश से पत्थर के रंग में निखार आता है।
श्रीराम स्तंभ की खासियत
- ऊंचाई-15 फीट
- चौड़ाई- 2़ 5 फीट
- वजन- 12 टन
- सूर्य, धनुष व शिखर का चिह्न
- बारिश में और निखरेगी पत्थर की चमक
- सैकड़ों सालों तक नहीं जमेगी काई
- आसानी से की जा सकती है नक्काशी।