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वेतन व पेंशन निकालने को मारामारी
फैजाबाद
Updated Thu, 01 Dec 2016 10:47 PM IST
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फैजाबाद-गुरुवार को विकासभवन स्थित पीएनबी बैंक की शाखा पर पैसे की निकासी के लिए लगी कतार ।
- फोटो : अमर उजाला
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नोट बंदी से नगदी संकट के बीच महीने की पहली तारीख को नौकरी पेशा-कामगारों के वेतन और रिटायरकर्मियों को पेंशन लेने के लिए सांसत झेलनी पड़ी। तमाम बैंकों पर नो कैश की नोटिस चस्पा हो गई तो बाकी बैंक भी नकदी की लिमिट तय कर काम चलाऊ इंतजाम करते दिखे।
हजारों लोगों को बैंकों से बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीण बैंकों में वेतन लेने आए हजारों शिक्षकों व ब्लॉक कर्मियों को फूटी कौड़ी नहीं मिली। सहकारी बैंकों ने खाद-बीज बिक्री के पैसे से दो-दो हजार तक बांटे।
शहर के बीओबी फतेहगंज शाखा में दोपहर होते नकदी समाप्त हो गई, जबकि एसबीआई, इलाहाबाद बैंक, पीएनबी, यूको, सेंट्रल आदि बड़े बैंकों ने दस हजार से दो तक ही कैश निकालने की लिमिट तय काम चलाते दिखे। देहात इलाकों में ग्रामीण बैंक, आयावर्त बैंक, सहकारी बैंकों में नगदी का सूखा रहा।
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एसबीआई की मुख्य शाखा से 10 हजार तक निकालने की लिमिट फिक्स कर दी गई। इसी तरह यूको बैंक ने चार हजार, पीएनबी ने दो हजार, इलाहाबाद बैंक ने छह हजार तक की नगदी देने का नोटिस टंगवा दिया। बीओबी में तो दोपहर होते ही कैश समाप्त हो गया। उधर, शहर समेत देहात के 60 फीसदी से अधिक एटीएम कैश की कमी से ताले में बंद रहे। जहां खुले थे वहां लंबी कतारें लगी रही।
एसबीआई चेस्ट प्रबंधक पीके सिंह ने बताया कि चेस्ट से पहली तारीख को कुल तीन करोड़ की निकासी ही हो पाई, जो काफी कम पड़ गई। मुख्य शाखा में वेतन-पेंशन लेने आए लोगों को 10 हजार देकर काम चलाया गया।
बाकी जुड़े बैंकों में हालत और खराब रही। पहले करीब 6 करोड़ तक की रोजाना चेस्ट से निकासी के साथ इतनी ही रकम लोगों से नकदी भी जमा होती थी। नोटबंदी के बाद लोगों में ज्यादा निकासी की होड़ से डिमांड कई गुना बढ़ गई है। विकास भवन के पीएनबी के प्रबंधन अनमोल ने बताया कि नगदी कम होने से 10 हजार की लिमिट तय की थी, कुल 400 लोगों को भुगतान हुआ है।
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हजारों लोगों को बैंकों से बैरंग लौटना पड़ा। ग्रामीण बैंकों में वेतन लेने आए हजारों शिक्षकों व ब्लॉक कर्मियों को फूटी कौड़ी नहीं मिली। सहकारी बैंकों ने खाद-बीज बिक्री के पैसे से दो-दो हजार तक बांटे।
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शहर के बीओबी फतेहगंज शाखा में दोपहर होते नकदी समाप्त हो गई, जबकि एसबीआई, इलाहाबाद बैंक, पीएनबी, यूको, सेंट्रल आदि बड़े बैंकों ने दस हजार से दो तक ही कैश निकालने की लिमिट तय काम चलाते दिखे। देहात इलाकों में ग्रामीण बैंक, आयावर्त बैंक, सहकारी बैंकों में नगदी का सूखा रहा।
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एसबीआई की मुख्य शाखा से 10 हजार तक निकालने की लिमिट फिक्स कर दी गई। इसी तरह यूको बैंक ने चार हजार, पीएनबी ने दो हजार, इलाहाबाद बैंक ने छह हजार तक की नगदी देने का नोटिस टंगवा दिया। बीओबी में तो दोपहर होते ही कैश समाप्त हो गया। उधर, शहर समेत देहात के 60 फीसदी से अधिक एटीएम कैश की कमी से ताले में बंद रहे। जहां खुले थे वहां लंबी कतारें लगी रही।
एसबीआई चेस्ट प्रबंधक पीके सिंह ने बताया कि चेस्ट से पहली तारीख को कुल तीन करोड़ की निकासी ही हो पाई, जो काफी कम पड़ गई। मुख्य शाखा में वेतन-पेंशन लेने आए लोगों को 10 हजार देकर काम चलाया गया।
बाकी जुड़े बैंकों में हालत और खराब रही। पहले करीब 6 करोड़ तक की रोजाना चेस्ट से निकासी के साथ इतनी ही रकम लोगों से नकदी भी जमा होती थी। नोटबंदी के बाद लोगों में ज्यादा निकासी की होड़ से डिमांड कई गुना बढ़ गई है। विकास भवन के पीएनबी के प्रबंधन अनमोल ने बताया कि नगदी कम होने से 10 हजार की लिमिट तय की थी, कुल 400 लोगों को भुगतान हुआ है।