Ayodhya: विकराल हुई सरयू, लाल निशान से 117 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचा पानी, 50 लोगों को पुलिस ने बचाया
अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। लोगों का पलायन जारी है। पुलिस ने बाढ़ में फंसे 50 लोगों को जल पुलिस ने निकाला।
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पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश से उफनाई सरयू खतरे के निशान से 117 सेमी. ऊपर पहुंच गई है। तीन तहसीलों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी भरने से करीब 10 हजार आबादी प्रभावित हो गई है। सोहावल तहसील क्षेत्र में बाढ़ में फंसे 50 लोगों को जल पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पलायन भी तेज हो गया है। प्रशासन ने बचाव व राहत कार्य तेज कर दिया है। सरयू के तराई इलाकों में तो दहशत है ही, शहरी इलाकों में भी बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। जिसके चलते सरयू के तट पर बसे शहरी इलाकों में स्थित करीब 12 मठ-आश्रम सहित कई घर बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। वहीं सदर तहसील के विकासखंड पूरा बाजार अंतर्गत ग्रामसभा मूडाडीहा ,पिपरी संग्राम, सेवराहवा, मडना माझा ,बलुईया, रामपुर पुवारी माझा की स्थिति बहुत ही दयनीय है।
पिपरी संग्राम निवासी नवमी निषाद ,भगवानदीन, सोनू, नंदी निषाद ने बताया कि यहां तक कोई नाव नहीं आई है। बच्चे भूख से परेशान हैं। सेवराहवा निवासी संगीता ने बताया कि दो दिन से चूल्हा नहीं जला है। हम लोग भूख प्यास से परेशान हैं। मडना के लेखपाल रामपाल ने बताया कि सदर तहसील के प्रभावित गांवों में सात नाव चलाई जा रही हैं। सोहावल-अयोध्या से तरबगंज-गोंडा जाने के लिए ढेमवा पुल का आखिरी छोर कट जाने से संपर्क टूट गया। जिससे गोंडा सीमा अंतर्गत दत्त नगर, मोती गंज मांझा ,बेउंदा माझा गांव के निवासी बाढ़ की चपेट में आ गये। बाढ़ प्रभावितों ने सोहावल में आश्रय लेने के लिए नाव पर सवार हो आगे बढ़े। ढेमवा पुल पर पहुंचते ही बल्ली के सहारे बनाई गयी सीढ़ी बह गयी। जिससे बाढ़ प्रभावित बीच मंझधार में फंस गए। जानकारी होने पर एसडीएम सोहावल मनोज कुमार श्रीवास्तव व तहसीलदार पवन कुमार गुप्ता ने जल पुलिस से सहायता मांगी। जल पुलिस ने 50 लोगों को नदी से बाहर निकाला। उपजिलाधिकारी ने बताया कि लगभग 50 अधिक बाढ़ पीड़ितों को बाहर निकाल कर आश्रय स्थल कंपोजिट विद्यालय ढेमवा लाया गया है।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार शाम छह बजे सरयू का जलस्तर 93.90 मीटर रिकॉर्ड किया गया। जो कि खतरे के निशान 92.73 मीटर से 117 सेमी. ऊपर है। जल आयोग का कहना है कि जलस्तर में अभी वृद्धि का क्रम जारी रहेगा। उधर प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया है। बाढ़ की स्थिति की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। राहत व बचाव कार्य के लिए अलग-अलग विभागों की टीम लगाई गई है। रुदौली तहसील क्षेत्र के सरयू के किनारे बसे सरांय नासिर, मुजेहना, सल्लाहपुर, अब्बुपुर, सलेमपुर, नूरगंज, कैथी, मांझा, मंहगू पुरवा सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों में पलायन तेज हो गया है। कुछ परिवार पलायन कर रौनाही तटबंध पर खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं। जिन्हें भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है। सल्लाहपुर निवासी रामकेवल ने बताया कि आधा दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है।
बस नाव का ही एक सहारा है। कोई घर की छत पर तो कोई छप्पर पर बैठकर रात बिता रहा है। वही दूसरी ओर रुदौली व रामसनेहीघाट की सीमा पर बसे कोइलवर व गनौली आदि गांवों की स्थिति बेहद खराब हो जाने से ग्रामीण पलायन कर रौनाही तटबंध पर शरण ले रहे हैं। सैकड़ों पशु बिना चारा के पानी में ही खड़े हैं। रुदौली तहसील क्षेत्र की करीब तीन हजार की आबादी दुश्वारियां झेल रही है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से महंगू का पुरवा के 140 परिवार , कैथी मांझा के लगभग 82, सराय नासिर 25, कैथी गांव 15, सल्लाहपुर 185, अब्बूपुर 27, मुजेहना के 35 परिवार परेशानियां झेलने को विवश हैं। कैथी मांझा निवासी श्रीदत्त यादव ने बताया कि पांच दिन पहले लेखपाल आए थे, जो सब के घर जा कर नाम लिखे हैं। पशु विभाग की टीम ने सभी मवेशियों को टीकाकरण किया गया है। लेकिन अभी तक डॉक्टर गांव नहीं पहुंचे ।
रुदौली तहसील के सल्लाहपुर गांव निवासी कलीम अहमद बोले कि 40 वर्षों में पहली बार ऐसी बाढ़ देखी है। फसल, घर, गृहस्थी का सामान सब डूब गया है। खाने पीने के लाले पड़ गए हैं। पशुओं के चारा का भी कोई इंतजाम प्रशासन द्वारा नहीं किया गया है। मंहगूपुरवा निवासी राज कमल बताते हैं कि दवा, भोजन कुछ भी नहीं मिल रहा। गांव कैथी माझा के ग्रामीण रामशंकर, गौरीशंकर, मौजीराम, बीरेंद्र बहादुर ने बताया कि गांव में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। फिर भी मिट्टी का तेल नही मिलता है। गांव में अभी तक राहत सामग्री आदि नहीं मिली है। तमसा का पानी तारुन क्षेत्र के गयासपुर मजरे सोनेडाड़ संपर्क मार्ग पर चढ़ गया। बच्चे इसी पानी से होकर स्कूल आने जाने को विवश हैं। गांव में कमपोजिट विद्यालय हैं और विद्यालय के अध्यापकों को बाहर से गांव में पढ़ाने आने के लिए बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लेखपाल अभी तक निरीक्षण करने नहीं पहुंचे हैं। सरयू की उफनाती लहरें न सिर्फ तबाही की कहानी लिख रही हैं, बल्कि एक नया रिकॉर्ड बनाने को भी आतुर हैं। 13 साल पहले 2009 में सरयू ने उच्चतम जलस्तर 94.10 मीटर के जलस्तर को छुआ था, जो आज भी सरयू का उच्चतम फ्लड लेवल माना जाता है।
अब सरयू उच्चतम फ्लड लेवल से सरयू का जलस्तर मात्र 20 सेमी दूर है। जल आयोग के कर्मी विजय कुमार बताते हैं कि सरयू का उच्चतम जलस्तर 94.10 मीटर अक्तूबर 2009 में रिकॉर्ड हुआ था। इसे ही उच्चतम फ्लड लेवल माना जाता है। बताया कि पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश के चलते बैराजों में पानी भर गया है, जिन्हें लगातार खाली किया जा रहा है जिसके चलते हर घंटे एक सेमी. की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व महेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि जिले में सदर, रुदौली व सोहावल तहसील के 18 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। राहत व बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। 10 बाढ़ चौकियां बनाकर 24 घंटे बाढ़ की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों में दो हजार पैकेट खाद्य सामग्री बांटी जा चुकी है। 3.50 क्विंटल से अधिक भूसा व 800 तिरपाल बांटा जा चुका है। मेडिकल, पशुपालन, राजस्व विभाग की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगाई गई हैं।- महेंद्र कुमार सिंह,