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मस्जिद मरम्मत पर मौलानाओं, मुफ्तियों ने जताया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sun, 04 Sep 2016 10:40 PM IST
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अयोध्या में बैठक करते मौलाना व मुफ्ती।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर के कई मुफ्तियों व मौलानाओं ने बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब के आवास पर रविवार शाम बैठक कर हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास से मस्जिद की मरम्मत को शरीयत के खिलाफ बताया। कहा कि हनुमानगढ़ी के स्वामित्व में अड़गड़ा की शाही मस्जिद है। आलमगिरी मस्जिद राम की पैड़ी से सटी है।
बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि ज्ञानदास लोकप्रिय हों इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है। वह सिर्फ अपने फायदे के लिए ही यह सब कर रहे हैं। कहा कि वह लिखकर हदिया (तोहफा) के तौर पर मस्जिद हमें दे दें। मौलाना मुफ्ती मोइनुद्दीन ने कहा कि गैर मुस्लिम का पैसा मस्जिद में नहीं लग सकता है।
मोहब्बत की रवादारी के दूसरे भी तरीके हैं। उनका कदम ठीक तो है लेकिन उन्हें स्वयं कार्य न कराके मुस्लिमों को इजाजत दे दें कि वह मरम्मत करा लें। अड़गड़ा मस्जिद के मो. जुनैद कादरी ने कहा कि अड़गड़ा पर स्थित उस मस्जिद का नाम आलमगिरी मस्जिद नहीं, यह शाही मस्जिद है।
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आलमगिरी मस्जिद राम की पैड़ी से सटी है। बैठक में दारुल उलूम बहार शाह के हजरत मौलाना मुफ्ती मोइनुद्दीन, हजरत मौलाना मुफ्ती शमशुल कमर, मो. मारुफ, मो. जुनैद कादरी, जामा मस्जिद टेढ़ीबाजार के इमाम आसिफ मोहम्मद असलम, मदरसा फैजुल उलूम हैबतपुर कारी अब्दुल हफीज, मौलाना मो. उबैस रजा मौजूद रहे।
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बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि ज्ञानदास लोकप्रिय हों इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है। वह सिर्फ अपने फायदे के लिए ही यह सब कर रहे हैं। कहा कि वह लिखकर हदिया (तोहफा) के तौर पर मस्जिद हमें दे दें। मौलाना मुफ्ती मोइनुद्दीन ने कहा कि गैर मुस्लिम का पैसा मस्जिद में नहीं लग सकता है।
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मोहब्बत की रवादारी के दूसरे भी तरीके हैं। उनका कदम ठीक तो है लेकिन उन्हें स्वयं कार्य न कराके मुस्लिमों को इजाजत दे दें कि वह मरम्मत करा लें। अड़गड़ा मस्जिद के मो. जुनैद कादरी ने कहा कि अड़गड़ा पर स्थित उस मस्जिद का नाम आलमगिरी मस्जिद नहीं, यह शाही मस्जिद है।
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आलमगिरी मस्जिद राम की पैड़ी से सटी है। बैठक में दारुल उलूम बहार शाह के हजरत मौलाना मुफ्ती मोइनुद्दीन, हजरत मौलाना मुफ्ती शमशुल कमर, मो. मारुफ, मो. जुनैद कादरी, जामा मस्जिद टेढ़ीबाजार के इमाम आसिफ मोहम्मद असलम, मदरसा फैजुल उलूम हैबतपुर कारी अब्दुल हफीज, मौलाना मो. उबैस रजा मौजूद रहे।