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फूलों से सजे रामलला, दर्शन कर निहाल हुए भक्त

Thu, 10 Jun 2021 11:52 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 11:52 PM IST
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Ramlala decorated with flowers, devotees were happy after seeing
अयोध्या ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर सजी रामलला की झांकी। - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि में अस्थाई मंदिर में विराजमान रामलला का दरबार फूलों से सजाया गया। विभिन्न प्रकार के पुष्पों से सजी फूल बंग्ला झांकी का दर्शन कर भक्त निहाल हुए। इस अवसर पर रामलला को नवीन वस्त्र धारण कराया गया, साथ ही विशेष भोग भी अर्पित किया गया।
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वैष्णव नगरी के मंदिरों में ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक युग में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों के गर्भगृह में पंखे व कूलर की व्यवस्था है।
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श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि अमावस्या तिथि पर रामलला का दरबार कमल, गेंदा, चमेली, बेला, चंपा के फूलों से सुसज्जित किया गया। श्रीराम को कमल के पुष्प, गुलाब के पुष्प, बेला, चमेली, चंपा के पुष्प प्रिय हैं। इसलिए भगवान राम के बाल रूप विग्रह को खासकर कमल के पुष्पों की माला से सजाया गया।
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इससे पूर्व मंगला आरती के बाद भगवान की विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की गई। उन्हें नए पीले वस्त्र धारण कराए गए। अमावस्या तिथि होने के कारण भगवान को पूड़ी, सब्जी, खीर, पेड़ा व फल का विशेष भोग लगाया गया। फूलों से सजे अपने आराध्य का गुरुवार को दर्शन कर रामलला के दर्शनार्थी निहाल हो उठे।
ज.गु.रामदिनेशाचार्य कहते हैं कि मंदिरों में देव प्रतिमा की विधि-विधान पूर्वक प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। इसलिए प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। ऐसे में जब देवता सजीव हैं तो उनकी भी अपनी आवश्यकताएं होती हैं। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा की पद्धति अपनाई।

इस सेवा पद्धति में जीव स्वरूप में ही मानकर भगवान की सेवा की जाती है। इसी कड़ी में विभिन्न तिथियों पर उत्सव का भी आयोजन होता है, इसी उत्सव की परंपरा में फूलबंग्ला महोत्सव का आयोजन होता रहा है।
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