{"_id":"64e6592dc84f47881b07b9a7","slug":"ram-temple-shiva-faizabad-news-c-97-1-ayo1002-1576-2023-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: श्रीराम के साथ भगवान शिव भी बरसाएंगे कृपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: श्रीराम के साथ भगवान शिव भी बरसाएंगे कृपा
Thu, 24 Aug 2023 12:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 24 Aug 2023 12:38 AM IST
विज्ञापन
अयोध्या। रामनगरी में प्रभु श्रीराम और भगवान शिव की अभिन्नता पहले से प्रतिपादित हैं। रामनगरी में सप्तहरि के साथ ही सप्तशिव भी पूजित-प्रतिष्ठित हैं। अब रामजन्मभूमि परिसर में भक्तों को श्रीराम के साथ शिव की कृपा भी प्राप्त होगी। राममंदिर के परकोटे में नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। ओंकारेश्वर से पांच दिनों की यात्रा कर नर्मदेश्वर महादेव अयोध्या प्रतिष्ठा यात्रा बुधवार को अयोध्या पहुंची। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने यात्रा का अभिनंदन किया और शिवलिंग की पूजा-अर्चना व अभिषेक किया।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नर्मदेश्वर शिवलिंग समर्पित करने वाले महंत नर्मदानंद बापू ने कहा कि मान्यता है कि नर्मदा नदी का हर कंकड़ शंकर है। बताया कि 18 अगस्त को यात्रा ओंकारेश्वर इंदौर से शुरू हुई थी। पांच दिनों में एक हजार किलोमीटर की दूरी तय कर बुधवार को अयोध्या पहुंची है। बताया कि शिवलिंग की स्थापना मंदिर के परकोटे में की जाएगी। परकोटे में मां जानकी, गणेश, हनुमान, महादेव, भगवान सूर्य का मंदिर बनाया जाना है।
बताया कि शिवलिंग चार फीट का है ओर वजन 600 किलोग्राम है। इसमें कोई भी निशान नहीं है, यह नर्मदा नदी के किनारे प्राप्त हुआ था। तीन माह तक शिवलिंग की पूजा-अर्चना की गई थी। राममंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ़ अनिल मिश्र ने बताया कि तीन माह तक साधना करने के बाद शिवलिंग को अयोध्या लाया गया है। शिवलिंग को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्वीकार किया है, इसे कारसेवक पुरम में रखा गया है। बाद में शिवलिंग को स्थापित करने पर विचार किया जाएगा।
विज्ञापन
एक-दूसरे की माला जपते हैं राम व शिव
रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि वैष्णव संप्रदाय में राम की उपासना होती है लेकिन जब वैष्णव की बात आती है तो सबसे बड़े वैष्णव भगवान शिव हैं। भागवत की यह पंक्तियां इसको चरितार्थ करती हैं कि वैष्णवानां यथा संभव:। वैष्णव में जितना महत्व राम को देते हैं, उतना ही शिव को। शिव व राम एक-दूसरे की माला जपते हैं।
विज्ञापन
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नर्मदेश्वर शिवलिंग समर्पित करने वाले महंत नर्मदानंद बापू ने कहा कि मान्यता है कि नर्मदा नदी का हर कंकड़ शंकर है। बताया कि 18 अगस्त को यात्रा ओंकारेश्वर इंदौर से शुरू हुई थी। पांच दिनों में एक हजार किलोमीटर की दूरी तय कर बुधवार को अयोध्या पहुंची है। बताया कि शिवलिंग की स्थापना मंदिर के परकोटे में की जाएगी। परकोटे में मां जानकी, गणेश, हनुमान, महादेव, भगवान सूर्य का मंदिर बनाया जाना है।
विज्ञापन
बताया कि शिवलिंग चार फीट का है ओर वजन 600 किलोग्राम है। इसमें कोई भी निशान नहीं है, यह नर्मदा नदी के किनारे प्राप्त हुआ था। तीन माह तक शिवलिंग की पूजा-अर्चना की गई थी। राममंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ़ अनिल मिश्र ने बताया कि तीन माह तक साधना करने के बाद शिवलिंग को अयोध्या लाया गया है। शिवलिंग को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्वीकार किया है, इसे कारसेवक पुरम में रखा गया है। बाद में शिवलिंग को स्थापित करने पर विचार किया जाएगा।
विज्ञापन
एक-दूसरे की माला जपते हैं राम व शिव
रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि वैष्णव संप्रदाय में राम की उपासना होती है लेकिन जब वैष्णव की बात आती है तो सबसे बड़े वैष्णव भगवान शिव हैं। भागवत की यह पंक्तियां इसको चरितार्थ करती हैं कि वैष्णवानां यथा संभव:। वैष्णव में जितना महत्व राम को देते हैं, उतना ही शिव को। शिव व राम एक-दूसरे की माला जपते हैं।