{"_id":"577012664f1c1b2c2a79aa12","slug":"rain-forecast-fail","type":"story","status":"publish","title_hn":"निकली चटख धूप, बारिश का पूर्वानुमान हुआ फेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निकली चटख धूप, बारिश का पूर्वानुमान हुआ फेल
Amar ujala Bureau
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:08 PM IST
विज्ञापन
मौसम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मौसम, मानसून और वर्षा को लेकर मौसम वैज्ञानिकों समेत ज्योतिषियों का भी गणित गड़बड़ाता दिख रहा है। ऐसे में बेड़न डालकर किसान आसमान की ओर देख रहे हैं, जबकि रविवार को पूरे दिन चटख धूप आग बरसाती दिखी।
बीते चार दिनों में दिन में बदरी और रात में चांदनी जैसे हालात घाघ की सूखा पड़ने वाली उक्ति.. रात निबद्दर, दिन में बद्दर, बहै पुरवइया झब्बर-झब्बर। कहै घाघ कुछ अजगुति होई, कुआं खोदि के धोबी धोई और रात चांदनी दिन घटा, तब जानौ बरखा हटा... को चरितार्थ करती दिख रही है।
हाल यह है कि एक लाख हेक्टेयर में रोपाई लक्ष्य के सापेक्ष अभी 15 फीसदी हुई है, जिसे सिंचाई कर हरा रखना चुनौती बन गई है। जिले में लगभग एक लाख सात हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई किए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। किसान धान की रोपाई के लिए तैयार बैठा है।
विज्ञापन
जून का दूसरा पखवारा शुरू होते ही मानसून को अवध क्षेत्र में प्रवेश कर जाना चाहिए। 20 से 30 जून के बीच में 106 मिमी वर्षा रिकार्ड की जाती रही, लेकिन किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। पिछले दो वर्षों में सूखा पड़ने की वजह से खेत भी सूखे हुए हैं। धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।
एनडी विवि कुमारगंज के मौसम वैज्ञानिकों की ओर से विभिन्न दिनों में की भविष्यवाणी फेल साबित हुई है। रविवार को तेज धूप और उमस ने बेहाल कर दिया। पानी न बरसने से किसान जहां परेशान हो उठा है, वहीं लोग गर्मी, धूप उमस से बिलबिला रहे हैं।
एनडी विवि के पूर्व मौसम विज्ञानी डॉ. पद्माकर तिवारी कहते हैं कि इस बार प्री मानसूनी बारिश भी नाममात्र हुई, मानसूनी बादल 20 जून से ही छाए हुए हैं, मगर फैजाबाद में बारिश नहीं हो रही है। प्रेशर नहीं बन पा रहा है। बारिश में दो दिन और लग सकता है।
अरब सागर का मानसून गोवा, महाराष्ट्र होते हुए राजस्थान तक बरस रहा है, जबकि बंगाल की खाड़ी का मानसून हवाओं का दबाव न बन पाने से कमजोर हो रहा है। एनडी विवि के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ तिवारी कहते हैं कि फैजाबाद को लेकर सारा पूर्वानुमान गड़बड़ा रहा है। मानसून कमजोर हो गया है, नया डवलप नहीं कर रहा है।
ऐसे हालत में किसान सूखे से परेशान हैं। जल्द बारिश न हुई तो रोपाई प्रभावित होगी। मौसम, मानसून और वर्षा को लेकर ज्योतिषियों का भी गणित गड़बड़ा गया है। वाराणसी से प्रकाशित एक पंचांग में तो आषाढ़ में जहां-तहां खंड वृष्टि की भविष्यवाणी हुई है तो दूसरे पंचांग में झमाझम बारिश होने का योग लिखा गया है।
इन पंचांगों में श्रावण (सावन) माह में अतिवृष्टि होना लिखा गया है। किसान आशा भरी निगाह से आकाश की ओर ताक रहे हैं। घाघ और भड्डरी की कहावतों पर नजर डालें तो प्रकृति यहां के किसानों और जिले से रूठी हुई लगती है।
विज्ञापन
बीते चार दिनों में दिन में बदरी और रात में चांदनी जैसे हालात घाघ की सूखा पड़ने वाली उक्ति.. रात निबद्दर, दिन में बद्दर, बहै पुरवइया झब्बर-झब्बर। कहै घाघ कुछ अजगुति होई, कुआं खोदि के धोबी धोई और रात चांदनी दिन घटा, तब जानौ बरखा हटा... को चरितार्थ करती दिख रही है।
विज्ञापन
हाल यह है कि एक लाख हेक्टेयर में रोपाई लक्ष्य के सापेक्ष अभी 15 फीसदी हुई है, जिसे सिंचाई कर हरा रखना चुनौती बन गई है। जिले में लगभग एक लाख सात हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई किए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। किसान धान की रोपाई के लिए तैयार बैठा है।
विज्ञापन
जून का दूसरा पखवारा शुरू होते ही मानसून को अवध क्षेत्र में प्रवेश कर जाना चाहिए। 20 से 30 जून के बीच में 106 मिमी वर्षा रिकार्ड की जाती रही, लेकिन किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। पिछले दो वर्षों में सूखा पड़ने की वजह से खेत भी सूखे हुए हैं। धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।
एनडी विवि कुमारगंज के मौसम वैज्ञानिकों की ओर से विभिन्न दिनों में की भविष्यवाणी फेल साबित हुई है। रविवार को तेज धूप और उमस ने बेहाल कर दिया। पानी न बरसने से किसान जहां परेशान हो उठा है, वहीं लोग गर्मी, धूप उमस से बिलबिला रहे हैं।
एनडी विवि के पूर्व मौसम विज्ञानी डॉ. पद्माकर तिवारी कहते हैं कि इस बार प्री मानसूनी बारिश भी नाममात्र हुई, मानसूनी बादल 20 जून से ही छाए हुए हैं, मगर फैजाबाद में बारिश नहीं हो रही है। प्रेशर नहीं बन पा रहा है। बारिश में दो दिन और लग सकता है।
अरब सागर का मानसून गोवा, महाराष्ट्र होते हुए राजस्थान तक बरस रहा है, जबकि बंगाल की खाड़ी का मानसून हवाओं का दबाव न बन पाने से कमजोर हो रहा है। एनडी विवि के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ तिवारी कहते हैं कि फैजाबाद को लेकर सारा पूर्वानुमान गड़बड़ा रहा है। मानसून कमजोर हो गया है, नया डवलप नहीं कर रहा है।
ऐसे हालत में किसान सूखे से परेशान हैं। जल्द बारिश न हुई तो रोपाई प्रभावित होगी। मौसम, मानसून और वर्षा को लेकर ज्योतिषियों का भी गणित गड़बड़ा गया है। वाराणसी से प्रकाशित एक पंचांग में तो आषाढ़ में जहां-तहां खंड वृष्टि की भविष्यवाणी हुई है तो दूसरे पंचांग में झमाझम बारिश होने का योग लिखा गया है।
इन पंचांगों में श्रावण (सावन) माह में अतिवृष्टि होना लिखा गया है। किसान आशा भरी निगाह से आकाश की ओर ताक रहे हैं। घाघ और भड्डरी की कहावतों पर नजर डालें तो प्रकृति यहां के किसानों और जिले से रूठी हुई लगती है।