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प्रतिनिधि हो ऐसा जो पात्रों तक पहुंचा दे योजनाएं
फैजाबाद
Updated Tue, 14 Feb 2017 12:16 AM IST
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फैजाबाद-अशरफपुर में अमर उजाला के सियासी अड्डे में मौजूद लोग ।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर से थोड़ी ही दूर पर रायबरेली रोड के करीब अशरफपुर गांव समास्याओं से घिरा है। बिजली, खंड़जा, राशन कार्ड, नाली, आदि पर यहां के ग्रामीणों ने खुलकर बात रखी। अन्य गांवों की तरह यहां भी समस्याएं बहुतेरी हैं। मसलन सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रों तक नहीं पहुंच रहा है।
चुनाव में बढ़-चढ़ कर दावे किए जाते हैं लेकिन उसके बाद विधायक उस पर अमल करने के प्रति गंभीर नहीं रहते हैं। चुनाव जीतने के बाद यदि गंभीर हो जाए तो स्थिति सुधरने में देर नहीं लगेगी। अशरफपुर गांव में अमर उजाला सियासी अड्डा में ग्रामीणों ने सोमवार को बेबाकी से अपनी राय जताई।
गांव का दर्द उभर आया कि चुने जाने के बाद नेता फिर चुनाव के वक्त ही दिखते हैं। जनप्रतिनिधियों को गांव-गिरांव की समस्याओं से लेना-देना नहीं रहता है, वे हमारे दुखों में भी नहीं दिखते। गांव में विकास कार्य हुए है तो उसमें भी भेदभाव किए जाने की बात सामने आई।
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जनपक्षीय दृष्टि से विकास होने के बजाय व्यक्तियों को ध्यान में रखकर विकास किए जाने का मामला भी उछला। अर्ह लोगों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने तल्खी भरे तेवर में अपने विचार व्यक्त किए। इतना सब गड़बड़ होने के बावजूद गांव वालों के आंखों में आशा का दीपक टिमटिमा रहा है।
उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में ये सभी समस्याए कम होगी। एक ग्रामीण ने कहा कि गांव में हर घर तक सड़क नहीं है और नाली भी नहीं बन पाई है। नाली नहीं होने से यहां पर गंदा पानी एकत्रित होता है। एक व्यक्ति ने कहा कि खाद-पानी, बिजली और सड़क सभी प्रकार की सुविधाए अभी ठीक से इस गांव को नहीं मिल पाई है।
नेताओं की ओर से बड़े-बड़े किए जा रहे वादे के प्रति मतदाताओं में भरपूर सजगता-सतर्कता दिखी। मतदाता सावधान है ऐसे नेताओं से जिनकी कथनी-करनी में अंतर है। जाति और मजहब की बात कर वोट हथियाने वालों को करारा जवाब देने के मूड में लोग दिखे।
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चुनाव में बढ़-चढ़ कर दावे किए जाते हैं लेकिन उसके बाद विधायक उस पर अमल करने के प्रति गंभीर नहीं रहते हैं। चुनाव जीतने के बाद यदि गंभीर हो जाए तो स्थिति सुधरने में देर नहीं लगेगी। अशरफपुर गांव में अमर उजाला सियासी अड्डा में ग्रामीणों ने सोमवार को बेबाकी से अपनी राय जताई।
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गांव का दर्द उभर आया कि चुने जाने के बाद नेता फिर चुनाव के वक्त ही दिखते हैं। जनप्रतिनिधियों को गांव-गिरांव की समस्याओं से लेना-देना नहीं रहता है, वे हमारे दुखों में भी नहीं दिखते। गांव में विकास कार्य हुए है तो उसमें भी भेदभाव किए जाने की बात सामने आई।
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जनपक्षीय दृष्टि से विकास होने के बजाय व्यक्तियों को ध्यान में रखकर विकास किए जाने का मामला भी उछला। अर्ह लोगों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने तल्खी भरे तेवर में अपने विचार व्यक्त किए। इतना सब गड़बड़ होने के बावजूद गांव वालों के आंखों में आशा का दीपक टिमटिमा रहा है।
उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में ये सभी समस्याए कम होगी। एक ग्रामीण ने कहा कि गांव में हर घर तक सड़क नहीं है और नाली भी नहीं बन पाई है। नाली नहीं होने से यहां पर गंदा पानी एकत्रित होता है। एक व्यक्ति ने कहा कि खाद-पानी, बिजली और सड़क सभी प्रकार की सुविधाए अभी ठीक से इस गांव को नहीं मिल पाई है।
नेताओं की ओर से बड़े-बड़े किए जा रहे वादे के प्रति मतदाताओं में भरपूर सजगता-सतर्कता दिखी। मतदाता सावधान है ऐसे नेताओं से जिनकी कथनी-करनी में अंतर है। जाति और मजहब की बात कर वोट हथियाने वालों को करारा जवाब देने के मूड में लोग दिखे।