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केंद्र व्यवस्थापकों ने अटकाया कक्ष निरीक्षकों का पारिश्रमिक
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अयोध्या। यूपी बोर्ड की परीक्षा में केंद्र व्यवस्थापकों की उदासीनता के चलते कक्ष निरीक्षकों के पारिश्रमिक का भुगतान अटका हुआ है।
जबकि करीब सात हजार कक्ष निरीक्षकों के भुगतान के लिए मई से ही करीब 30 लाख रुपये का बजट विभाग को आवंटित है। केंद्र व्यवस्थापकों की हीलाहवाली की वजह से कक्ष निरीक्षकों को पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। अब डीआईओएस ने शीघ्र ही देयक प्रपत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बीते वर्ष की यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल व इंटर के कुल 91,125 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इनके लिए 132 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
जबकि परीक्षा के दौरान निगरानी व सकुशल परीक्षा संचालन के लिए करीब सात हजार कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें राजकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक भी तैनात किए गए थे।
परीक्षा में ड्यूटी करने वाले कक्ष निरीक्षकों को प्रति पाली तीस रुपये के हिसाब से पारिश्रमिक दिया जाता है। वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों के लिए यह धनराशि काफी अहम होती है। इसके भुगतान के लिए विभाग की ओर से भी समय से प्रयास शुरू किया गया और मई में ही करीब तीस लाख रुपये इस मद में प्राप्त हो गए।
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धन आवंटित होते ही केंद्र व्यवस्थापकों को समय से देयक प्रपत्र उपलब्ध कराने के लिए विभाग की ओर से फरमान जारी किया गया, लेकिन केंद्र व्यवस्थापकों ने इस कार्य के प्रति उदासीनता का परिचय दिया।
देयक प्रपत्र प्राप्त न होने पर विभाग की ओर से इसे लेकर कई बार नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन केंद्र व्यवस्थापकों के कान पर जूं नहीं रेंगी। इसी का नतीजा रहा कि बीते गुरुवार तक डीआईओएस कार्यालय में मात्र 12 केंद्रों से ही देयक प्रपत्र उपलब्ध हो सका। ऐसे में केंद्र व्यवस्थापकों की लापरवाही का सबब कक्ष निरीक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। अब डीआईओएस ने इसको लेकर सख्ती बरतने का संकेत दिया है।
बोर्ड परीक्षा के पारिश्रमिक के लिए धन मौजूद है, लेकिन केंद्र व्यवस्थापक बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद भी देयक प्रपत्र मुहैया नहीं करा रहे हैं, इसकी वजह से भुगतान नहीं हो पा रहा है। शीघ्र ही समस्त विवरण मुहैया नहीं कराया गया तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आरबी सिंह चौहान, जिला विद्यालय निरीक्षक
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जबकि करीब सात हजार कक्ष निरीक्षकों के भुगतान के लिए मई से ही करीब 30 लाख रुपये का बजट विभाग को आवंटित है। केंद्र व्यवस्थापकों की हीलाहवाली की वजह से कक्ष निरीक्षकों को पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। अब डीआईओएस ने शीघ्र ही देयक प्रपत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बीते वर्ष की यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल व इंटर के कुल 91,125 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इनके लिए 132 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
जबकि परीक्षा के दौरान निगरानी व सकुशल परीक्षा संचालन के लिए करीब सात हजार कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें राजकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक भी तैनात किए गए थे।
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परीक्षा में ड्यूटी करने वाले कक्ष निरीक्षकों को प्रति पाली तीस रुपये के हिसाब से पारिश्रमिक दिया जाता है। वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों के लिए यह धनराशि काफी अहम होती है। इसके भुगतान के लिए विभाग की ओर से भी समय से प्रयास शुरू किया गया और मई में ही करीब तीस लाख रुपये इस मद में प्राप्त हो गए।
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धन आवंटित होते ही केंद्र व्यवस्थापकों को समय से देयक प्रपत्र उपलब्ध कराने के लिए विभाग की ओर से फरमान जारी किया गया, लेकिन केंद्र व्यवस्थापकों ने इस कार्य के प्रति उदासीनता का परिचय दिया।
देयक प्रपत्र प्राप्त न होने पर विभाग की ओर से इसे लेकर कई बार नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन केंद्र व्यवस्थापकों के कान पर जूं नहीं रेंगी। इसी का नतीजा रहा कि बीते गुरुवार तक डीआईओएस कार्यालय में मात्र 12 केंद्रों से ही देयक प्रपत्र उपलब्ध हो सका। ऐसे में केंद्र व्यवस्थापकों की लापरवाही का सबब कक्ष निरीक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। अब डीआईओएस ने इसको लेकर सख्ती बरतने का संकेत दिया है।
बोर्ड परीक्षा के पारिश्रमिक के लिए धन मौजूद है, लेकिन केंद्र व्यवस्थापक बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद भी देयक प्रपत्र मुहैया नहीं करा रहे हैं, इसकी वजह से भुगतान नहीं हो पा रहा है। शीघ्र ही समस्त विवरण मुहैया नहीं कराया गया तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आरबी सिंह चौहान, जिला विद्यालय निरीक्षक