{"_id":"58de9d5a4f1c1b380763f19c","slug":"mercury-reached-38-degrees-broken-seven-years-record","type":"story","status":"publish","title_hn":"पारा 38 डिग्री पहुंचा, टूटा सात साल का रिकार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पारा 38 डिग्री पहुंचा, टूटा सात साल का रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो / फैजाबाद
Updated Fri, 31 Mar 2017 11:48 PM IST
विज्ञापन
फैजाबाद में गर्मी से बचने के लिए भरतकुंड सरोवर में स्नान करते बच्चे ।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूर्य धरती पर आग के गोले बरसा रहा है। तापमान में तेजी से इजाफा हो रहा है। मार्च माह में मई जैसी गर्मी पड़ हो रही है। मौसम के तीखे तेवरे से बच्चों से लेकर बड़ों तक परेशान है। गर्मी की वजह से दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
सुबह से लेकर सायं पांच बजे तक पछुआ हवा के थपेड़ों को सहने के लिए मजबूर रहे। शुक्रवार को 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। अमूमन यह तापमान मई महीने में पाया जाता है। पिछले सात सालों में यह तापमान सबसे अधिक रिकार्ड किया गया है।
पिछले एक सप्ताह में तापमान में बढोत्तरी से गांव से लेकर शहर तक हर कोई हलकान है। खेतों में कार्य करने वाले किसान हर हाल में दस बजे घर की ओर लौट जा रहे हैं। शहरों में भी 12 बजने के साथ ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। उसके बाद जो लोग घरों से निकले वह कसाबा बांध कर ही निकले।
विज्ञापन
नरेन्द्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के मौमस वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि पिछले साल मार्च में तापमान दो डिग्री कम था, उनकी माने तो पुरआ-पछुआ हवाएं चलेगी। पछुआ हवा चली तो तापमान में कमी नहीं आएगी। उनकी माने तो अप्रैल के प्रथम पखवारे में 42 डिग्री तक तापमान जाने की उम्मीद है।
ऐसा ही मौमस रहा तो किसानों को हर सप्ताह सब्जियों की सिंचाई करनी पड़ेगी। इससे किसानों की लागत बढ़ जाएगी और पानी के अधिक सेवन से भूगर्भ जल स्तर भी नीचे खिसकेगा।- डॉ. मिथलेश, हार्टी कल्चर वैज्ञानिक, कृषि विवि कुमारगंज
अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस)
25 मार्च -36.00
26 मार्च -38.00
27 मार्च - 38.00
28 मार्च - 39.00
29 मार्च - 39.00
30 मार्च -35.00
31 मार्च -38.00
धूप के एक्सपोजर से स्किन कैंसर का खतरा
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा कहते हैं कि कड़ाके की धूप हल्के में न निकलें। 40 डिग्री टेंपरेचर से अधिक तापमान में यदि व्यक्ति लगातार कार्य करता रहा तो स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। तेज धूप की वजह से लोग सन बर्न का शिकार हो रहे हैं। चेहरे झुलस जा रहे हैं। गर्मी की वजह से अधिक पसीना होने की वजह से फंगल इंफेक्शन के खतरे भी बढ़ गए हैं। पसीना और गर्मी की वजह से पीठ व शरीर के अन्य अंग पहले लाल हो जाते हैं और फिर इन्हीं अंगों पर काले रंग के चकत्ते भी पड़ जाते हैं।
बच्चों पर भारी पड़ रही गर्मी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि मौसम में तेजी से इजाफा हो रहा है तो इस दौरान वायरल डायरिया और वायरल चेस्ट इन्फेक्शन के रोगियों की तादाद बढ़ी है। वायरल डायरिया में बच्चों को पानी की तरह दस्त आता है। शरीर से पानी तेजी से निकलता है। बच्चा सुस्त होने लगता है। आंखें धंस जाती है। शरीर से अधिक मात्रा में पानी निकल जाने से किडनी फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। पांच वर्ष तक के बच्चों में वायरल चेस्ट इन्फेक्शन होने की वजह से जुकाम से शुरुआत होती है। हल्की खांसी नाक का बहना और तेज बुखार भी होता है। यह दोनों बीमारी बच्चों के लिए घातक हैं जैसे ही बच्चों में इस प्रकार का लक्षण दिखे वैसे ही निकट के अस्पताल में इलाज कराएं।
विज्ञापन
सुबह से लेकर सायं पांच बजे तक पछुआ हवा के थपेड़ों को सहने के लिए मजबूर रहे। शुक्रवार को 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। अमूमन यह तापमान मई महीने में पाया जाता है। पिछले सात सालों में यह तापमान सबसे अधिक रिकार्ड किया गया है।
विज्ञापन
पिछले एक सप्ताह में तापमान में बढोत्तरी से गांव से लेकर शहर तक हर कोई हलकान है। खेतों में कार्य करने वाले किसान हर हाल में दस बजे घर की ओर लौट जा रहे हैं। शहरों में भी 12 बजने के साथ ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। उसके बाद जो लोग घरों से निकले वह कसाबा बांध कर ही निकले।
विज्ञापन
नरेन्द्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के मौमस वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि पिछले साल मार्च में तापमान दो डिग्री कम था, उनकी माने तो पुरआ-पछुआ हवाएं चलेगी। पछुआ हवा चली तो तापमान में कमी नहीं आएगी। उनकी माने तो अप्रैल के प्रथम पखवारे में 42 डिग्री तक तापमान जाने की उम्मीद है।
ऐसा ही मौमस रहा तो किसानों को हर सप्ताह सब्जियों की सिंचाई करनी पड़ेगी। इससे किसानों की लागत बढ़ जाएगी और पानी के अधिक सेवन से भूगर्भ जल स्तर भी नीचे खिसकेगा।- डॉ. मिथलेश, हार्टी कल्चर वैज्ञानिक, कृषि विवि कुमारगंज
अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस)
25 मार्च -36.00
26 मार्च -38.00
27 मार्च - 38.00
28 मार्च - 39.00
29 मार्च - 39.00
30 मार्च -35.00
31 मार्च -38.00
धूप के एक्सपोजर से स्किन कैंसर का खतरा
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा कहते हैं कि कड़ाके की धूप हल्के में न निकलें। 40 डिग्री टेंपरेचर से अधिक तापमान में यदि व्यक्ति लगातार कार्य करता रहा तो स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। तेज धूप की वजह से लोग सन बर्न का शिकार हो रहे हैं। चेहरे झुलस जा रहे हैं। गर्मी की वजह से अधिक पसीना होने की वजह से फंगल इंफेक्शन के खतरे भी बढ़ गए हैं। पसीना और गर्मी की वजह से पीठ व शरीर के अन्य अंग पहले लाल हो जाते हैं और फिर इन्हीं अंगों पर काले रंग के चकत्ते भी पड़ जाते हैं।
बच्चों पर भारी पड़ रही गर्मी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि मौसम में तेजी से इजाफा हो रहा है तो इस दौरान वायरल डायरिया और वायरल चेस्ट इन्फेक्शन के रोगियों की तादाद बढ़ी है। वायरल डायरिया में बच्चों को पानी की तरह दस्त आता है। शरीर से पानी तेजी से निकलता है। बच्चा सुस्त होने लगता है। आंखें धंस जाती है। शरीर से अधिक मात्रा में पानी निकल जाने से किडनी फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। पांच वर्ष तक के बच्चों में वायरल चेस्ट इन्फेक्शन होने की वजह से जुकाम से शुरुआत होती है। हल्की खांसी नाक का बहना और तेज बुखार भी होता है। यह दोनों बीमारी बच्चों के लिए घातक हैं जैसे ही बच्चों में इस प्रकार का लक्षण दिखे वैसे ही निकट के अस्पताल में इलाज कराएं।