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हल षष्ठी पर्व आज, महिलाएं पुत्र के लिए रखेगी व्रत
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अयोध्या। भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी पर पड़ने वाले हल छठ व्रत को लेकर माताओं में उत्साह है। माताएं पुत्र की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखेंगी। वहीं, किसानों के घर में इस दिन हल और बैल की पूजा की जाती है। यह दिन भगवान कृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलराम जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
गोसाईगंज के रामपलिया निवासी सुनीता मिश्रा ने बताया कि इस दिन सुबह महुआ के दातून उसके पत्ते, दही, करवा के पत्ते, सरपत के अंदर कुस लेकर लोग निकल पड़ते हैं।
नहाने के बाद नए कपड़े पहनकर स्थानीय ठकुराइन पोखरे पर पहुंचकर पाली में महुआ, तिन्नी चावल, दही, फूल माला, महुआ के पत्ते में रखकर कुश के पास जाकर छठी मां का पूजा करते हैं और गीत गाए जाते हैं।
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वह बतातीं हैं कि इसी दिन बलराम जी का जन्म हुआ था और उनका मुख्य शस्त्र हल था, इसलिए इसे हल छठ भी कहते हैं। माता ने बताया कि भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हल षष्ठी भी कहते हैं।
कई जगहों पर हल छठ, ललही छठ या फिर तिनछठी भी कहा जाता है। इस व्रत में हल से जुती हुई अनाज व सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता है। इसलिए महिलाएं इस दिन तालाब में उगे पसही या तिन्नी के चावल खाकर व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं भैंस के दूध, घी और दही का इस्तेमाल करती हैं।
वहीं किसानों के घर में इस दिन हल की और बैल की पूजा की जाती है। कहीं-कहीं महिलाएं पुत्र की रक्षा के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को तिन्नी के चावल खाकर पारण करती हैं।
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गोसाईगंज के रामपलिया निवासी सुनीता मिश्रा ने बताया कि इस दिन सुबह महुआ के दातून उसके पत्ते, दही, करवा के पत्ते, सरपत के अंदर कुस लेकर लोग निकल पड़ते हैं।
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नहाने के बाद नए कपड़े पहनकर स्थानीय ठकुराइन पोखरे पर पहुंचकर पाली में महुआ, तिन्नी चावल, दही, फूल माला, महुआ के पत्ते में रखकर कुश के पास जाकर छठी मां का पूजा करते हैं और गीत गाए जाते हैं।
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वह बतातीं हैं कि इसी दिन बलराम जी का जन्म हुआ था और उनका मुख्य शस्त्र हल था, इसलिए इसे हल छठ भी कहते हैं। माता ने बताया कि भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हल षष्ठी भी कहते हैं।
कई जगहों पर हल छठ, ललही छठ या फिर तिनछठी भी कहा जाता है। इस व्रत में हल से जुती हुई अनाज व सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता है। इसलिए महिलाएं इस दिन तालाब में उगे पसही या तिन्नी के चावल खाकर व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं भैंस के दूध, घी और दही का इस्तेमाल करती हैं।
वहीं किसानों के घर में इस दिन हल की और बैल की पूजा की जाती है। कहीं-कहीं महिलाएं पुत्र की रक्षा के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को तिन्नी के चावल खाकर पारण करती हैं।