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हिंदी में रामलीला मंचन व गायन सीखेंगे विदेशी कलाकार
Thu, 14 Feb 2019 12:25 AM IST
vivek vivek
अयोध्या
अयोध्या
Published by: vivek vivek
Updated Thu, 14 Feb 2019 12:25 AM IST
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अयोध्या में रामलीला का मंचन करते विदेशी कलाकार(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विदेशी रामलीला कलाकार अब हिंदी में भी रामलीला मंचन व गायन की कला सीखेंगे। उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए अवध क्षेत्र से रामलीला के एक्सपर्ट जाएंगे। जो विदेशी कलाकारों को हिंदी में रामलीला मंचन व गायन की कला में निपुण बनाएंगे।
प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की पहल पर अयोध्या शोध संस्थान के निर्देशन में एक्सपर्ट की टीम पहले चरण में तीन देशों गुयाना, त्रिनिडाड व सूरीनाम प्रशिक्षण देने जाएगी। राम की संस्कृति पूरे विश्व में प्रमाणिकता के साथ फैली हुई है। विश्व के करीब 70 देशों में रामलीला का मंचन होता है।
दक्षिण पूर्व एशिया से लेकर कैरेबियन देश, मध्य पूर्व व यूरोप से लेकर मध्य अमेरिका तक राम संस्कृति की व्यापकता है। विदेशियों में राम व रामलीला के प्रति अगाध श्रद्धा है। इसलिए अब वे हिंदी में रामलीला मंचन व गायन सीखने को आतुर हैं। जिसको लेकर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने पहल की है।
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पहले चरण में अवध क्षेत्र के रामलीला मंचन के एक्सपर्ट की एक टीम तीन देशों गुयाना, त्रिनिडाड व सूरीनाम में प्रशिक्षण देने जाएगी। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह बताते हैं कि मूलत: अंग्रेजी भाषी देश त्रिनिडाड में रामलीला की अत्यंत समृद्ध परंपरा रोमांचित करती है। छोटे से देश में 52 रामलीला मंडली होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यहां 2012 में रामलीला को एक्ट के रूप में सरकार द्वारा मान्य किया गया है। वहीं सूरीनाम में मैदानी रामलीला प्रचलित है। श्रीराम का अपभ्रंश डचभाषा में सूरीनाम माना जाता है। वहीं गुयाना में बना रामलीला केंद्र राम की व्यापकता का गवाह है।
इन तीनों देशों को अब हिंदी भाषा में रामलीला मंचन व गायन सिखाया जाएगा। इसकी कार्ययोजना बन रही है। एक्सपर्ट की एक टीम का चयन कर शीघ्र तीनों देशों की यात्रा पर भेजा जाएगा। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह बताते हैं कि विदेश की रामलीलाओं के संरक्षण, प्रोत्साहन, दस्तावेजीकरण हेतु उत्तर पूर्व एशिया, यूरोप, रूस तथा गिरमिटिया रामलीलाओं हेतु विशेष कार्ययोजना प्रदेश सरकार के निर्देश पर तैयार की गई है।
बताया कि विश्व के कई देशों और स्थानों के नाम राम से संबंधित हैं। इन स्थानों पर शोध कार्य करते हुए इनका संकलन तैयार किया जा रहा है। मध्य अमेरिका देश होंडुरास में हनुमान जी जैसी प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। ऐसे ही दुनिया के कई देशों में रामायण से संबंधित संदर्भ, प्रसंग प्राप्त होते हैं उनका भी दस्तावेजीकरण कराया जा रहा है। विभिन्न देशों इंडोनेशिया, फिजी, लाओस, त्रिनिडाड, रूस, थाईलैंड आदि देशों की रामलीला सामग्रियों को भी अयोध्या लाकर उन्हें सरंक्षित करने पर काम चल रहा है।
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प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की पहल पर अयोध्या शोध संस्थान के निर्देशन में एक्सपर्ट की टीम पहले चरण में तीन देशों गुयाना, त्रिनिडाड व सूरीनाम प्रशिक्षण देने जाएगी। राम की संस्कृति पूरे विश्व में प्रमाणिकता के साथ फैली हुई है। विश्व के करीब 70 देशों में रामलीला का मंचन होता है।
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दक्षिण पूर्व एशिया से लेकर कैरेबियन देश, मध्य पूर्व व यूरोप से लेकर मध्य अमेरिका तक राम संस्कृति की व्यापकता है। विदेशियों में राम व रामलीला के प्रति अगाध श्रद्धा है। इसलिए अब वे हिंदी में रामलीला मंचन व गायन सीखने को आतुर हैं। जिसको लेकर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने पहल की है।
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पहले चरण में अवध क्षेत्र के रामलीला मंचन के एक्सपर्ट की एक टीम तीन देशों गुयाना, त्रिनिडाड व सूरीनाम में प्रशिक्षण देने जाएगी। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह बताते हैं कि मूलत: अंग्रेजी भाषी देश त्रिनिडाड में रामलीला की अत्यंत समृद्ध परंपरा रोमांचित करती है। छोटे से देश में 52 रामलीला मंडली होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यहां 2012 में रामलीला को एक्ट के रूप में सरकार द्वारा मान्य किया गया है। वहीं सूरीनाम में मैदानी रामलीला प्रचलित है। श्रीराम का अपभ्रंश डचभाषा में सूरीनाम माना जाता है। वहीं गुयाना में बना रामलीला केंद्र राम की व्यापकता का गवाह है।
इन तीनों देशों को अब हिंदी भाषा में रामलीला मंचन व गायन सिखाया जाएगा। इसकी कार्ययोजना बन रही है। एक्सपर्ट की एक टीम का चयन कर शीघ्र तीनों देशों की यात्रा पर भेजा जाएगा। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह बताते हैं कि विदेश की रामलीलाओं के संरक्षण, प्रोत्साहन, दस्तावेजीकरण हेतु उत्तर पूर्व एशिया, यूरोप, रूस तथा गिरमिटिया रामलीलाओं हेतु विशेष कार्ययोजना प्रदेश सरकार के निर्देश पर तैयार की गई है।
बताया कि विश्व के कई देशों और स्थानों के नाम राम से संबंधित हैं। इन स्थानों पर शोध कार्य करते हुए इनका संकलन तैयार किया जा रहा है। मध्य अमेरिका देश होंडुरास में हनुमान जी जैसी प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। ऐसे ही दुनिया के कई देशों में रामायण से संबंधित संदर्भ, प्रसंग प्राप्त होते हैं उनका भी दस्तावेजीकरण कराया जा रहा है। विभिन्न देशों इंडोनेशिया, फिजी, लाओस, त्रिनिडाड, रूस, थाईलैंड आदि देशों की रामलीला सामग्रियों को भी अयोध्या लाकर उन्हें सरंक्षित करने पर काम चल रहा है।