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सपा मुखिया के खिलाफ कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Tue, 06 Sep 2016 11:54 PM IST
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सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ जिला जज कोर्ट में सीजेएम के आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका दायर की गई है। एडीजे दामोदर सिंह ने मामले की सुनवाई के लिए 9 सितंबर की तारीख नियत की है।
अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीकांड को लेकर सपा सुप्रीमो मुलायम के खिलाफ 3 सितंबर को बड़ी छावनी के संत ओमप्रकाश की ओर से दायर किए गए इस्तगासे को सीजेएम की अदालत ने ग्राह्यता के बिंदु पर खारिज कर दिया था।
निगरानीकर्ता के अधिवक्ता हरिओम दुबे व आरपी पाठक ने बताया कि ओमप्रकाश ने एक सितंबर को दायर केस में कहा था कि 28 अगस्त को समाचार पत्रों पर मुलायम ने अपने बयान में कहा कि यदि अयोध्या में 1990 में 16 के बजाए 30 कारसेवक भी मारे जाते तो भी मुझे कोई हर्ज नहीं होता और मेरे ही इशारे पर कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं।
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कहा कि सपा मुखिया के आदेश पर 30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या में पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चला कई श्रद्धालुओं की हत्या कर दी थी। लेकिन महज 16 हत्याओं की ही पुष्टि प्रशासन ने की। बताया कि मुलायम के इस बयान से सामाजिक व धार्मिक सौहार्द की क्षति हुई तथा लोगों के मध्य विद्वेष की भावना पैदा हुई।
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अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीकांड को लेकर सपा सुप्रीमो मुलायम के खिलाफ 3 सितंबर को बड़ी छावनी के संत ओमप्रकाश की ओर से दायर किए गए इस्तगासे को सीजेएम की अदालत ने ग्राह्यता के बिंदु पर खारिज कर दिया था।
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निगरानीकर्ता के अधिवक्ता हरिओम दुबे व आरपी पाठक ने बताया कि ओमप्रकाश ने एक सितंबर को दायर केस में कहा था कि 28 अगस्त को समाचार पत्रों पर मुलायम ने अपने बयान में कहा कि यदि अयोध्या में 1990 में 16 के बजाए 30 कारसेवक भी मारे जाते तो भी मुझे कोई हर्ज नहीं होता और मेरे ही इशारे पर कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं।
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कहा कि सपा मुखिया के आदेश पर 30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या में पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चला कई श्रद्धालुओं की हत्या कर दी थी। लेकिन महज 16 हत्याओं की ही पुष्टि प्रशासन ने की। बताया कि मुलायम के इस बयान से सामाजिक व धार्मिक सौहार्द की क्षति हुई तथा लोगों के मध्य विद्वेष की भावना पैदा हुई।