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औद्योगीकरण से ही होगी पूर्वांचल की उन्नति : मुख्य सचिव
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Fri, 22 Apr 2016 10:42 PM IST
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मुख्य सचिव का स्वागत करते मंडलायुक्त।
- फोटो : अमर उजाला
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वर्तमान सरकार की मंशा उद्योगों को बढ़ावा देने की है। पूर्वांचल की उन्नति तभी हो सकती है, जब इलाके में औद्योगिकरण हो। इसी क्रम में वे नई औद्योगिक इकाई का शुभारंभ करने यहां आए हैं। सरकार की औद्योगिकरण की नीति से सभी को फायदा होगा।
रोजगार के अवसर मिलेंगे। यह बातें यहां एक निजी यश पेपर मिल लिमिटेड के परिसर में नई यूनिट के निर्माण हेतु शिलान्यास के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश के मुख्य सचिव अलोक रंजन ने कही।
उन्होंने कहा कि कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के रूप में फैजाबाद जनपद काफी पिछड़ा है।
यहां पर दो-तीन उद्योग ही हैं जिसमें यह पेपर मिल एक है। औद्योगिक विकास हेतु सरकार ने कई बड़े कदम उठाये हैं। सरकार द्वारा नये औद्यौगिक इकाईयों के स्थापना में कई सुविधाएं दी हैं। सरकार उद्योग के स्थापना हेतु औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना के साथ-साथ उस क्षेत्र में चौड़ी सड़कें , विद्युत, पानी की समुचित व्यवस्था करा रही है।
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उन्होंने पेपर पैकेजिंग उत्पादन बनाने में पर्यावरण को बिलकुल भी क्षति न पहुंचाते हुए गन्ने की खोई से प्लेट, गिलास, थाली, कटोरी आदि बनाने की नई इकाई की तारीफ की। कहा कि वर्तमान में जो सामग्री नष्ट न होने वाली पैकेजिंग सामग्री में पैक होकर आ रही है, उससे पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा हैं जिस पर रोक लगाई जा सकती हैं।
यह प्रदेश में ही नहीं देश में पहला बड़ा प्रोजेक्ट होगा। इस तरह का पैकेजिंग प्रोडेक्ट केवल चीन में ही बनता हैं। प्रोजेक्ट की लागत प्रथम फेस में 50 करोड़ रुपये है।
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रोजगार के अवसर मिलेंगे। यह बातें यहां एक निजी यश पेपर मिल लिमिटेड के परिसर में नई यूनिट के निर्माण हेतु शिलान्यास के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश के मुख्य सचिव अलोक रंजन ने कही।
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उन्होंने कहा कि कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के रूप में फैजाबाद जनपद काफी पिछड़ा है।
यहां पर दो-तीन उद्योग ही हैं जिसमें यह पेपर मिल एक है। औद्योगिक विकास हेतु सरकार ने कई बड़े कदम उठाये हैं। सरकार द्वारा नये औद्यौगिक इकाईयों के स्थापना में कई सुविधाएं दी हैं। सरकार उद्योग के स्थापना हेतु औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना के साथ-साथ उस क्षेत्र में चौड़ी सड़कें , विद्युत, पानी की समुचित व्यवस्था करा रही है।
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उन्होंने पेपर पैकेजिंग उत्पादन बनाने में पर्यावरण को बिलकुल भी क्षति न पहुंचाते हुए गन्ने की खोई से प्लेट, गिलास, थाली, कटोरी आदि बनाने की नई इकाई की तारीफ की। कहा कि वर्तमान में जो सामग्री नष्ट न होने वाली पैकेजिंग सामग्री में पैक होकर आ रही है, उससे पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा हैं जिस पर रोक लगाई जा सकती हैं।
यह प्रदेश में ही नहीं देश में पहला बड़ा प्रोजेक्ट होगा। इस तरह का पैकेजिंग प्रोडेक्ट केवल चीन में ही बनता हैं। प्रोजेक्ट की लागत प्रथम फेस में 50 करोड़ रुपये है।