फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Do not justify reconciliation after archaeological evidence: Nritya Gupopaladas

पुरातात्विक साक्ष्य के बाद सुलह का औचित्य नहीं : नृत्यगोपालदास

Fri, 24 Mar 2017 11:14 PM IST
फैजाबाद
फैजाबाद Updated Fri, 24 Mar 2017 11:14 PM IST
विज्ञापन
Do not justify reconciliation after archaeological evidence: Nritya Gupopaladas
महंत नृत्य गोपाल दास। - फोटो : अमर उजाला
पुरातात्विक साक्ष्य मिलने के बाद श्रीराम जन्मभूमि को लेकर सुलह-समझौते की रट का कोई औचित्य नहीं है। साक्ष्य हिंदुओं के पक्ष में हैं, फिर बातचीत कैसी और क्यों? यह बात श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास ने यहां जारी एक बयान में कही। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रधानमंत्री से मिलकर सोमनाथ की तर्ज पर संसद में कानून बनाकर राम मंदिर निर्माण के लिए बातचीत करेंगे।
विज्ञापन


शुक्रवार को जारी बयान में महंत नृत्यगोपालदास ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सुझाव के बाद मीडिया और सुलह-समझौता वादियों की सक्रियता को बेवजह तूल देना बताया। कहा कि जहां भगवान का प्रकटीकरण हुआ, वह ही रामलला की जन्मभूमि है। अदालत में संपत्ति का मामला विचाराधीन था।
विज्ञापन


साक्ष्य और वर्तमान स्थिति सब रामलला के पक्ष में है, फिर भी न्यायिक विलंब के चलते 67 वर्ष में फैसला तो दूर, जहां से चले वहीं आकर फिर खड़े हो गए। कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का देश सम्मान करता है लेकिन समझौते का अब कोई औचित्य नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि देश में आजादी के दो वर्ष बाद ही गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया। जबकि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का विवाद न्यायालय में ही अटका रहा। कहा कि 2010 में उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में संपत्ति के स्वामित्व की जगह विभाजन कर दिया। अब प्रधानमंत्री से मंदिर निर्माण आंदोलन से जुड़े संत-धर्माचार्यों का प्रतिनिधमंडल मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed